काशीपुर: शिकायती प्रार्थना पत्रों की रिसीविंग नहीं देने पर नपेंगे थानाध्यक्ष

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काशीपुर, अमृत विचार। अब उत्तराखंड के थाने में प्राप्त होने वाले हर शिकायती प्रार्थना पत्र की रिसीविंग देनी होगी। साथ ही उस पर कार्यवाही की सूचना भी शिकायतकर्ता को देनी होगी। उसमें लापरवाही करने पर संबंधित हेल्प डेस्क कर्मचारी, जांचकर्ता अधिकारी या थानाध्यक्ष के विरुद्ध जनपदीय प्रभारी द्वारा कानूनी कार्यवाही की जाएगी। काशीपुर निवासी सूचना …

काशीपुर, अमृत विचार। अब उत्तराखंड के थाने में प्राप्त होने वाले हर शिकायती प्रार्थना पत्र की रिसीविंग देनी होगी। साथ ही उस पर कार्यवाही की सूचना भी शिकायतकर्ता को देनी होगी। उसमें लापरवाही करने पर संबंधित हेल्प डेस्क कर्मचारी, जांचकर्ता अधिकारी या थानाध्यक्ष के विरुद्ध जनपदीय प्रभारी द्वारा कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन (एडवोकेट) ने पुलिस मुख्यालय के लोक सूचनाधिकारी से थानों में शिकायती पत्रों की प्राप्ति देने व कार्यवाही संबंधी व्यवस्था के लिए दिए गए निर्देशों के संबंध में सूचना मांगी थी। इसके उत्तर में पुलिस मुख्यालय की लोक सूचना अधिकारी/अपर पुलिस अधीक्षक (कार्मिक) शाहजहां जावेद खान ने 26 मार्च 2021 के पत्र के साथ पुलिस महानिदेशक के परिपत्र डीजी परिपत्र की फोटो प्रति उपलब्ध करायी है।

उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार द्वारा परिपत्र सं.1 से निर्देश दिए गए हैं कि प्रार्थना पत्र रिसीविंग की पद्धति को और सृदृढ़ बनाए जाने के लिए प्रत्येक थाने पर गठित महिला डेस्क हेल्प को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाए कि कोई भी पीड़ित अथवा शिकायतकर्ता थाने के बिना अपने प्रार्थना पत्र की रिसीविंग लिए न जाए। थाने में स्थापित महिला हेल्प डेस्क रिसेप्शन सेंटर के रूप में काम करेगा। जिसमें रिसेप्शन रूम के अनुसार शिकायतकर्ता के लिए उचित सुविधाएं जैसे आगन्तुक के बैठने के लिए सहज व सुगमता पूर्ण व्यवस्था आदि हो।

वहीं महिला हेल्प डेस्क में नियुक्त कर्मचारी करूण व सरल स्वभाव वाले हो और पीड़ित/दिव्यांगजन के प्रति संवेदनशील पूर्वक व्यवहार करें। पीड़ित चूंकि पूर्व से ही पीड़ित होता है इसलिए उसे सौहार्द पूर्ण वातावरण मिले इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए यदि कोई शिकायतकर्ता  प्रार्थना पत्र नहीं लाया है तो उसकी मौखिक रिपोर्ट को जीडी में दर्ज करते हुए उस पर वैधानिक कार्यवाही की जाए। इसी प्रकार सोशल मीडिया से प्राप्त होने वाली शिकायतें जैसे व्हाट्स एप्प, ईमेल, फोन आदि पर भी संज्ञान लें और वाद समाप्ति कार्यवाही आवेदक को भी सूचित करें। यह संपूर्ण जिम्मेदारी महिला हैल्प डेस्क को दी जाए।

डीजी के परिपत्र में इस व्यवस्था की मॉनिटरिंग की भी व्यवस्था की गई है। इसके अनुसार शिकायती प्रार्थना पत्र पर जांच/कार्यवाही के पश्चात आवेदक को सूचित कर दिया गया है, यह हेल्प डेस्क के कर्मचारियों को सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। कर्मचारी प्रतिदिन प्राप्त होने वाले शिकायती प्रार्थना पत्र को एक रजिस्टर में अंकन करेगा, जिसको प्रतिदिन थाना प्रभारी द्वारा, 15 दिन में क्षेत्राधिकारी और 30 दिन में पुलिस अधीक्षक द्वारा व प्रत्येक तिमाही /आकास्मिक रूप से जनपदीय प्रभारी द्वारा चैक किया जाएगा। मुख्यालय स्तर से भी आकास्मिक स्तर पर चेकिंग की जा सकती है। इस कार्य में लापरवाही बरतने पर कार्यवाही के भी निर्देश दिए गए हैं। इसके अनुसार हेल्प डेस्क कर्मचारी द्वारा जांचकर्ता अधिकारी द्वारा अथवा थानाध्यक्ष द्वारा कर्तव्य पालन में लापरवाही बरते जाने पर जवाबदेही तय करते हुए संबंधित के विरुद्ध जनपदीय प्रभारी (पुलिस अधीक्षक/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक) द्वारा आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।

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