…तो इस चुनावी फैक्टर के चलते कल्याण सिंह बने हैं भाजपा के लिए अनमोल, समझे पूरा मामला
लखनऊ। चुनावी फैक्टर के लिहाज से राम मंदिर आंदोलन के अगुवा एवं पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए अनमोल बने हुए हैं। चाहे प्रदेश की राजनीत में जातीय समीकरण के आधार पर वोट बैंक का मामला हो अथवा आस्था से जुड़े हुए लोगों का। दोनों मुद्दों पर पूर्व मुख्यमंत्री सिंह काफी …
लखनऊ। चुनावी फैक्टर के लिहाज से राम मंदिर आंदोलन के अगुवा एवं पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए अनमोल बने हुए हैं। चाहे प्रदेश की राजनीत में जातीय समीकरण के आधार पर वोट बैंक का मामला हो अथवा आस्था से जुड़े हुए लोगों का। दोनों मुद्दों पर पूर्व मुख्यमंत्री सिंह काफी लोकप्रियता है। एसजीपीजीआई में भर्ती में पूर्व मुख्यमंत्री सिंह के कद का अंदाजा भाजपा में इसी से लगाया जा सकता है, कि पिछले आठ दिनों में दो बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, बिहार सरकार में मंत्री शहनवाज हुसैन और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का उनका हालचाल लेने पहुंच चुकी हैं।
यही नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कल्याण सिंह के बेटे को बुलाकर उनका हालचाल लिया। इसके अलावा, उनके पोते से फोन पर बात करके हालचाल ले चुके हैं। पीएम ने कल्याण सिंह से जुड़ा भावनात्मक ट्वीट भी किया। दरअसल, उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव है। भाजपा को कल्याण सिंह की चिंता को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। सियासी जानकार भाजपा को कल्याण सिंह की चिंता सताने के पीछे की दो अहम वजह बताते हैं।
पहली- वे राम मंदिर आंदोलन के नायक रहे हैं। दूसरी- वह जिस लोध बिरादरी से आते हैं उसके यूपी में 8 प्रतिशत वोट है। भाजपा के पदाधिकारियों के मुताबिक कल्याण सिंह हमेशा ही पार्टी के लिए उपयोगी साबित हुए हैं। वह राम मंदिर आंदोलन के सबसे बड़े नायक रहे हैं। पार्टी की कोशिश है की कल्याण सिंह के जीवन के अंतिम क्षणों में पार्टी उनके साथ पूरी तरह से खड़ी दिखे। इससे लोधी समुदाय के अलावा समस्त ओबीसी वोट बैंक एवं राम मंदिर आंदोलन से जुड़े एक खास वर्ग के बीच भी अच्छा संदेश जाएगा।
70 से अधिक सीटों पर है लोधी समाज का असर
लोधी समाज का असर सीधे 25 जिलों की 70-80 विधानसभा सीटों पर रहता है। यही वजह है कि जब कल्याण सिंह भाजपा से नाराज हुए थे तब उमा भारती और धर्मपाल सिंह जैसे लोधी नेताओं को पार्टी ने आगे बढ़ाने की कोशिश की थी। लेकिन तब पार्टी को बहुत ज्यादा कामयाबी नहीं मिली थी। कल्याण सिंह को भी ओबीसी का चेहरा माना जाता रहा है। खासतौर से वह ओबीसी से जुड़ी लोधी बिरादरी से आते हैं। इसी समाज के बीएल बर्मा को केंद्र में मंत्री भी बनाया गया है।
उत्तर प्रदेश में आबादी के हिसाब से लोध वोट बैंक लगभग 8 प्रतिशत है , जो यादव समाज के बाद दूसरे नंबर पर है। अभी 15 विधायक इस बिरादरी के हैं जो अलग-अलग पार्टियों में हैं। पश्चिमी यूपी में एटा, इटावा, कासगंज, बुलंदशहर, आगरा, फर्रुखाबाद, बदायूं, हाथरस, मुरादाबाद, अमरोहा, बरेली समेत लगभग 25 जिलों की 70 से 80 विधानसभा सीटों पर इस बिरादरी के लोगों का वजूद है और वो अहम भूमिका निभाते हैं। यूपी में बुंदेलखंड की लगभग सभी विधानसभा सीटों पर इनका अच्छा खासा प्रभाव है।
