सीतापुर: प्रशासन की सक्रियता से टला दो पक्षों का विवाद, जानें क्या है मामला?

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सीतापुर। तीर्थ स्थित प्रसिद्ध स्वामी नारदानन्द आश्रम में उस समय तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गयी, जब आश्रम के मुख्य द्वार पर अपना नाम लिखवाने के लिये गद्दी के दावेदार स्वामी उपेन्द्रानन्द सरस्वती व देवेन्द्रानन्द सरस्वती के समर्थकों में विवाद हो गया। विवाद बढ़ने पर थाना नैमिषारण्य कोतवाल विनोद मिश्रा ने पुलिस बल के साथ …

सीतापुर। तीर्थ स्थित प्रसिद्ध स्वामी नारदानन्द आश्रम में उस समय तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गयी, जब आश्रम के मुख्य द्वार पर अपना नाम लिखवाने के लिये गद्दी के दावेदार स्वामी उपेन्द्रानन्द सरस्वती व देवेन्द्रानन्द सरस्वती के समर्थकों में विवाद हो गया। विवाद बढ़ने पर थाना नैमिषारण्य कोतवाल विनोद मिश्रा ने पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच कर उपजिलाधिकारी मिश्रिख के स्वयं आने तक किसी पक्ष को गेट पर कुछ भी लिखने से रोक दिया। देर शाम उपजिलाधिकारी मिश्रिख गिरीश झा ने आश्रम पहुंचकर दोनो पक्षों की बात सुनी और आश्रम की भूमि, भवनों के प्रपत्रों का अवलोकन किया। जिसके बाद मुख्य द्वार पर किसी भी दावेदार का नाम न लिखकर आश्रम के संस्थापक स्वामी नारदानन्द सरस्वती का ही नाम लिखा जाय।

क्या कहता है दोनों पक्ष
वहीं दूसरे पक्ष की तरफ से गोविंद शुक्ला का कहना है कि काफी समय से गेट का रंग रोहन नहीं हुआ था। इसीलिए कार्य सुरु किया गया था। यदि भूमिस्थल का विवाद था तो पुताई के समय ही कार्य को रोक लगा दिया गया होता और मेरे द्वारा न तो कुछ घटाया जाएगा न बढ़ाया जाएगा।

पूर्व काल जो लिखा था वही लिखाया जा रहा था। जिसका उनके समक्ष साक्ष्य है। जब स्वामी विद्या चैतन्य से उनकी राय जानी तो उन्होंने बताया कि आगामी गुरुपूजन का कार्यक्रम शांति पूर्ण ढंग से सम्पन्न हो, इसके लिए पूर्व में प्रवेश द्वार जो लिखा था, अगर उसे ही पुनः लिखवाया जाता है तो उन्हें कोई आपत्ति नही होगी।

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