मथुरा: पुरोहित महासभा ने की देवस्थानम बोर्ड भंग करने की मांग, दिया ये बड़ा हवाला
मथुरा। अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा ने उत्तराखंड सरकार से देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग की है। महासभा के अध्यक्ष के अध्यक्ष महेश पाठक सोमवार को कहा कि उन्होने मुख्यमंत्री पुष्कर धामी को पत्र भेजकर उत्तराखण्ड सरकार द्वारा बनाए गए देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध …
मथुरा। अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा ने उत्तराखंड सरकार से देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग की है। महासभा के अध्यक्ष के अध्यक्ष महेश पाठक सोमवार को कहा कि उन्होने मुख्यमंत्री पुष्कर धामी को पत्र भेजकर उत्तराखण्ड सरकार द्वारा बनाए गए देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि वे बोर्ड को भंग करने पर विचार करें क्योंकि देवस्थानम बोर्ड में जिन 51 मन्दिरों एवं चार धाम को शामिल किया गया है, उन पर लाखों लोगों की सीधी या अप्रत्यक्ष रूप से जीविका प्रभावित होती है।
उन्होंने कहा कि जन कल्याणकारी सरकार का काम लोगों को रोजगार मुहैया कराना होता है जबकि देवस्थानम बोर्ड के गठन से सरकार ने अनजाने में ही पंडों, पुरोहितों तथा अन्य के रोजगार को छीनने का काम किया है। उन्होंने पत्र में पूर्व मुख्यमंत्री तीर्थ सिंह रावत के उस बयान का जिक्र किया है जिसमें उन्होंने बोर्ड के गठन पर पुनर्विचार करने का आश्वासन दिया था लेकिन पर्यटन मंत्री सतपाल महराज ने इस मामले में किसी प्रकार का विचार या बदलाव न करने की घोषणा कर उन लाखों लोगों के कटे पर नमक छिड़कने का काम किया है जिनकी आजीविका प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से देवस्थानम बोर्ड के गठन से प्रभावित होती है।
श्री पाठक ने कहा कि जब किसी की रोजी रोटी छीनी जाएगी और उसके परंपरागत अधिकारों को छीना जाएगा तो उससे शांत बैठने की अपेक्षा नही की जा सकती है जैसा कि प्रभावित लोगों द्वारा 23 जुलाई से पुनः आंदोलन शुरू करने की घोषणा से स्पष्ट है। उन्होंने तीर्थ पुरोहित समाज श्री केदारनाथ के अध्यक्ष विनोद प्रसाद शुक्ला के उस पत्र की प्रतिलिपि भी पत्रकारों को उपलब्ध कराई है जिसमें कहा गया है कि उत्तराखण्ड सरकार द्वारा देवस्थानम बोर्ड का गठन आदि शंकराचार्य द्वारा प्रतिपादित उस भावना के प्रतिकूल है जिसका निर्वहन चार धाम एवं 51 मन्दिरों के तीर्थ पुरोहित अभी तक करते चले आ रहे हैं।
पत्र में कहा गया है कि सरकार ने बोर्ड का गठन भंग न करके चारो धामों के तीर्थ पुरोहितों को क्रमिक अनशन करने पर भी मजबूर कर दिया है। महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कहना है कि आवश्यकता बोर्ड के गठन की न होकर मन्दिरों एवं चारो धामों की व्यवस्था में सुधार करने की है तथा महासभा सरकार को इस मामले में पूरा सहयोग करने को तैयार है।अगर मन्दिरों और चार धाम की व्यवस्था में सुधार होगा तो निश्चय ही उत्तराखण्ड में पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा तथा रोजगार के नये अवसर स्रजित होंगे और बेरोजगारी की समस्या कुछ हद तक हल होगी।
