बरेली: आवास लाभार्थियों की सूची में हेराफेरी, कई साल से भटक रहे पात्र

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बरेली, अमृत विचार।  प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनाने के लिए बड़ी तादाद में गरीब लाभार्थियों की चार से पांच सालों से जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) के चक्कर काटते चप्पलें घिस गई हैं, लेकिन उनके खाते में आवास की रकम नहीं आई है। लाभार्थियों के आरोप हैं कि पात्र होने के बावजूद गुपचुप …

बरेली, अमृत विचार।  प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनाने के लिए बड़ी तादाद में गरीब लाभार्थियों की चार से पांच सालों से जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) के चक्कर काटते चप्पलें घिस गई हैं, लेकिन उनके खाते में आवास की रकम नहीं आई है। लाभार्थियों के आरोप हैं कि पात्र होने के बावजूद गुपचुप तरीके से उनके नाम सूची से काट दिए गए हैं, जबकि डूडा के तमाम स्टाफ और सर्वेयरों की मिलीभगत से सूची में दूसरे लोगों के नाम शामिल करने के साथ उन्हें लाभान्वित कर दिया गया है। ऐसे में डूडा ने लाभार्थियों की जो सूची तैयार की है, उस पर भी सवालियां निशान लग रहे हैं। जबकि विभागीय अधिकारी आवास बनवाने के लिए मदद को भटक रहे गरीबों से सीधे मुंह बात करने को भी तैयार नहीं हो रहे हैं।

शहरी गरीब लाभार्थियों का अपने आवास का सपना पूरा हो सके, इसके लिए इस योजना के तहत उन्हें किस्तों के तौर पर आवास की 2.5 लाख रुपए की धनराशि आवंटित होती है। इसका सर्वे कराने से लेकर शासन को सूची भेजने तक की जिम्मेदारी डूडा के अधिकारियों की है लेकिन बड़ी संख्या में लाभार्थी दूर-दराज से आकर डूडा कार्यालय पहुंच रहे हैं लेकिन उनकी समस्या का निस्तारण करना तो दूर उनकी सही से सुनवाई भी नहीं हो रही है।

कई लाभार्थियों की शिकायत है कि उन्होंने चार-पांच साल पहले डूडा कार्यालय में फार्म जमा किए थे। कई बार सर्वे हुए और दफ्तर में कागज भी जमा कराए गए लेकिन उनके खाते में आज तक आर्थिक मदद के तौर पर रकम नहीं आई है। जबकि बाद में फार्म जमा करने वाले बड़ी संख्या में लोगों के खाते में कई किस्तों की रकम भी पहुंच गई है। इसे देखते हुए लाभार्थियों की शिकायत है कि डूडा के तमाम कर्मचारी और सर्वेयरों की सांठगांठ से लाभार्थियों की लिस्ट में जमकर हेराफेरी हो रही है। इसकी कोई जांच भी नहीं की जा रही है। इस संबंध में जब डूडा के परियोजना निदेशक शैलेंद्र भूषण से बात करने की कोशिश की गई तो उनका फोन नहीं उठा। इस संबंध में डूडा अधिकारी से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

मलखान, मीरगंज ने बताया कि करीब दो साल पहले मकान बनवाने के लिए फार्म जमा किया था, उनका फार्म सोमवती के नाम से जमा है। अब तक न जाने कितनी बार मीरगंज से यहां आ चुके हैं। किराए में काफी पैसा बर्बाद हो गया लेकिन पता चला है कि उनका नाम सूची से काट दिया गया है।

विजेंद्र, बदायूं रोड ने बताया कि मकान बनवाने के लिए कई बार सर्वे हो चुका है। डूडा कार्यालय में लंबी लाइन लगाने के बाद कई बार कागज दे चुके हैं लेकिन कई साल से चक्कर काटने के बावजूद कोई मदद अब तक नहीं मिल सकी है।

फिरंगीलाल, जगतपुर ने बताया कि मकान के लिए डूडा कार्यालय के चक्कर लगाते करीब तीन साल हो गए हैं। उनके बाद वालों ने फार्म जमा किए, उन्हें मदद मिल रही हैं लेकिन उनकी कोई सुनवाई ही नहीं हो रही।

लालू, नेकपुर ने बताया कि डूडा कार्यालय में कोई सुनने वाला नहीं। कोई सही से यह भी नहीं बताता है कि उनका नाम सूची में है या नहीं। हर बार आओ और निराश होकर वापस चले जाओ। बस यही बस चल रहा है।

कुसुम बताया कि आवास सूची में मेरा नाम है नहीं, यह पता ही नहीं चलता। जब आओ तो खिड़की पर लंबी लाइन में लगने के बाद यही बता दिया जाता है कि अभी पैसा नहीं आया, बाद में पता करना। यह सुनते करीब तीन साल हो गए हैं।

ममता ने बताया कि डूडा कार्यालय के दो साल से चक्कर काट रही हूं लेकिन घर बनाने के लिए एक भी किस्त नहीं मिली। कई बार सर्वे हो चुका है लेकिन कुछ पता नहीं चल रहा है कि मकान का पैसा कब आएगा।

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