बरेली: आठ साल से सरकारी महकमा दबाए हैं मनरेगा मजदूरों का पैसा

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बरेली, अमृत विचार। कोरोना काल में परेशान मजदूरों को ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के तहत रोजगार मुहैया कराने के लिए शासन व जिला प्रशासन तमाम कोशिशें कर रहा है। संबंधित विभाग भी पंजीकृत जॉब कार्डधारकों को काम मुहैया करा रहा है, लेकिन मनरेगा से कराए गए कामों के भुगतान को लेकर अफसर बिल्कुल गंभीर नहीं …

बरेली, अमृत विचार। कोरोना काल में परेशान मजदूरों को ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के तहत रोजगार मुहैया कराने के लिए शासन व जिला प्रशासन तमाम कोशिशें कर रहा है। संबंधित विभाग भी पंजीकृत जॉब कार्डधारकों को काम मुहैया करा रहा है, लेकिन मनरेगा से कराए गए कामों के भुगतान को लेकर अफसर बिल्कुल गंभीर नहीं हैं।

विभागीय आंकड़ों में तमाम सरकारी महकमे ऐसे भी हैं, जो करीब आठ साल से मनरेगा मजदूरों का मेहनताना दबाए बैठे हैं। जांच पड़ताल में कुल 993 बैंक खाते ऐसे सामने आए, जिनमें गड़बड़ी के चलते उनको भुगतान नहीं मिल सका। मेहनताना देने में सबसे ज्यादा गड़बड़ी वन विभाग एवं लघु सिंचाई विभाग की ओर से बरती गई।

जिले में करीब सात साल पहले मनरेगा योजना शुरू की गई थी। मकसद था ग्रामीणों का गांव से पलायन रोकना। मनरेगा से कराए कामों के लिए केंद्र सरकार पैसा देती है। नियमों के मुताबिक मस्टर रोल तैयार होने के बाद श्रमिकों के लिंक खाते में सीधे मजदूरी भेज दी जाती है, लेकिन कई विभागों ने मस्टर रोल तैयार कराने के साथ ही उनको लिंक कराने में भी जमकर लापरवाही बरती।

श्रमिकों के बैंक खाते लिंक नहीं कराए गए। इस वजह से खातों में ट्रांजेक्शन नहीं हुआ। तमाम बैंक खाते अमान्य कर दिए गए। उधर सरकारी महकमों ने ट्रांजेक्शन न होने के बाद भी मजदूरों के खाते लिंक कराने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और उनकी मजदूरी का पूरा पैसा वापस भेज दिया गया।

यह सिलसिला वर्ष 2013-2014 से चल रहा है। पिछले दिनों यह मामला शासन तक पहुंच गया। जब जांच शुरू हुई, तब खुलासा होने पर जिले में कुल 933 बैंक खातों में गड़बड़ी पाई गई। वर्ष 2013-14 में कुल 91 मामलों में मजदूरों तक उनका मेहनताना नहीं पहुंचा। इसी तरह 2014-15 में 83, 2015-16 में 161, 2016-17 में 113, 2017-18 में आठ, 2018-19 में 22, 2019-20 में तीन, 2020-21 में 146 और 2021-22 में अब तक 366 मजदूरों को पैसा नहीं मिल सका। सबसे अधिक गड़बड़ी वन विभाग, पीडब्लूडी एवं ग्राम पंचायतों की सामने आई है। जिन खातों में गड़बड़ी के चलते मजदूरों को पैसा नहीं मिला। अब ऐसे मामलों की पड़ताल शुरू कराई गई है। हालांकि इसके लिए जिम्मेदार कौन है, यह तय नहीं हो पा रहा है।

फैक्ट फाइल

  • जिले में कुल ग्राम पंचायतें 1193
  • मनरेगा में पंजीकृत मजदूर 461666
  • कुल जॉबकार्ड धारक 313980
  • सक्रिय जॉबकार्ड धारक 208066
  • वर्तमान में काम रहे मजदूर करीब पचास हजार

ब्लॉकवार रद्द ट्राजेक्शन का ब्योरा
(वर्ष 2013-2021 तक)

  • आलमपुर जाफराबाद- 274
  • फतेहगंज पूर्वी- 243
  • मीरगंज- 144
  • नवाबगंज- 109
  • रिछा- 63
  • बहेड़ी- 50
  • भदपुरा- 32
  • भोजीपुरा- 26
  • बिथरीचैनपुर- 18
  • क्यारा- 13
  • मझगवां- 13
  • शेरगढ़- 08
  • कुल-993

सीडीओ चंद्र मोहन गर्ग ने बताया कि कई बार खातों की डिटेल में गड़बड़ी की वजह से पैसा नहीं पहुंचा है। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में मनरेगा मजदूरों के खाते में पैसा नहीं पहुंचा, इसकी जानकारी नहीं है। प्रकरण की जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।

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