बरेली: वन विभाग का लालच निगल गया मयूर वन की खूबसूरती
बरेली, अमृत विचार। 11 मई,1993 को जब शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर (अब एयरपोर्ट के सामने) डा. आरएन त्रिवेदी तत्कालीन मंडलायुक्त ने मयूर वन चेतना केंद्र का उद्घाटन किया तब शहर के साथ आसपास के लोगों के लिए यह केंद्र किसी अजूबा से कम नहीं था। इकलौता ऐसा पिकनिक केंद्र विकसित हुआ, जिसमें प्राकृतिक …
बरेली, अमृत विचार। 11 मई,1993 को जब शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर (अब एयरपोर्ट के सामने) डा. आरएन त्रिवेदी तत्कालीन मंडलायुक्त ने मयूर वन चेतना केंद्र का उद्घाटन किया तब शहर के साथ आसपास के लोगों के लिए यह केंद्र किसी अजूबा से कम नहीं था। इकलौता ऐसा पिकनिक केंद्र विकसित हुआ, जिसमें प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के साथ नौकायान, फाउंटेन, राज्य पक्षी सारस के साथ कई अन्य पक्षियों के दर्शन, नदी, नौकायान के पास बैठने के लिए झोपड़ीनुमा हट समेत तमाम ऐसी चीजें थीं, जिन्हें देखकर लोग खुद को प्रकृति के करीब समझते थे।
वीआईपी के ठहरने के लिए डाकबंगला की तरह आवास भी बनाया गया था तब यहां घूमने आने वालों के लिए टिकट की व्यवस्था नहीं थी। वन विभाग को धीरे-धीरे लालच आ गया कि क्यों न इसे ठेके पर उठाकर संचालित कराया जाए। इसके संचालन का झंझट खत्म होने के साथ उन्हें हर साल एकमुश्त रकम भी मिल जाएगी और जिम्मेदारी से पीछा भी छूट जाएगा। इसके बाद सालें गुजरती रहीं और ठेकेदार बदलते चले गए।
इसके साथ मयूर वन चेतना केंद्र की स्थिति खराब होती गयी। फाउंटेशन खराब होने के बाद फिर ठीक नहीं हुआ। नौकायान का संचालन भी बंद हो गया। बच्चों के लिए जो झूले लगे थे, वे उजाड़ दिए गए। पक्षियों और वन्यजीवों के बाड़े भी खाली हो गए। हर तरफ ऊंची-ऊंची झाड़ियां बढ़ती गयीं। वन विभाग के अधिकारियों की अनदेखी से प्राकृतिक सुंदरता की चमक बिखेरने वाला पिकनिक स्पॉट बर्बाद होने लगा। वर्तमान स्थिति पर बात करें तो इस पिकनिक स्पॉट में एक भी चीज ऐसी नहीं, जिसे देखने के लिए लोग जाएं।
टूटी सड़कें, ऊंची झाड़ियों के बीच यहां की हर तरफ की तस्वीर बेहद डरावनी दिख रही है। देखने से ऐसा लग रहा है कि यहां सालों से साफ-सफाई नहीं हुई है। वनाधिकारियों ने इस ओर जाकर नहीं देखा है। बताते हैं कि एक ठेकेदार ने इस केंद्र को 10 साल से अधिक समय पर ठेके पर चलाया।
इस वक्त मुड़िया, पिपरिया समेत कई गांवों के कई लोग मिलकर केंद्र को संचालित कर रहे हैं। ठेकेदारी में मुड़िया के प्रधान धर्मेंद्र कुमार का भी कुछ हिस्सा है इसलिए उनकी देखरेख ज्यादा रहती है। पिछले करीब पांच लाख रुपए में वन विभाग ने इसे ठेके पर उठाया था।
उजड़े मयूर वन केंद्र में बिना युगल के नहीं इंट्री, सौ रुपये है शुल्क
8 मार्च से एयरपोर्ट से दिल्ली-बरेली के लिए हवाई सेवा शुरू हो चुकी है लेकिन एयरपोर्ट के सामने मयूर वन चेतना केंद्र अपनी बर्बादी के आंसू बहा रहा है। इसके सौंदर्यीकरण के लिए वन विभाग कोई कार्ययोजना नहीं बना रहा है। वर्तमान में यहां सिंगल व्यक्ति को घूमने की इजाजत नहीं है। सिर्फ युगल या फिर फेमिली को ही घूमने की अनुमति है। युगल के घूमने का सौ रुपये चार्ज लिया जाता है। अभी यहां ठेकेदार के अधीन दो कर्मचारी तैनात हैं। एक गेट पर तैनात रहता है तो दूसरा कर्मचारी मयूर वन केंद्र के अंदर घूमता है।
1997 में टर्मिनल का पत्थर लगा तो हवाई सेवा शुरू हो गयी पर केंद्र उजड़ता चला गया
मयूर वन चेतना केंद्र के दो एरिया हैं। इनके बीच में नहर है लेकिन वह आजकल सूखी है। पीलीभीत रोड साइड की ओर मयूर वन चेतना केंद्र के ब्राह्य भाग का उद्घाटन 9 सितंबर 1994 में तत्कालीन वनमंत्री भगवती सिंह ने किया था। इसके बाद इसी परिसर में 23 अगस्त 1997 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने नागरिक उड्डयन टर्मिनल बरेली का शिलान्यास किया था। बसपा सुप्रीमो मायावती के नाम का पत्थर आज भी लगा हुआ है। टर्मिनल अब एयरपोर्ट में बदल गया और उड़ान भी शुरू हो गयी लेकिन मयूर वन चेतना केंद्र का जहां सौंदर्यीकरण होना चाहिए। इसका ठीक उलटा हुआ। यह उजड़ता चला गया और एयरपोर्ट अपने अस्तित्व में आ गया।
मयूर वन चेतना केंद्र का सौंदर्यीकरण कराने पर विचार चल रहा है। करीब 10 दिन पहले कंजरवेटर से केंद्र का सौंदर्यीकरण कराने पर बात हुई थी। अब जिस ठेकेदार को इसके संचालन की कमान सौंपी जाएगी। उसकी देखरेख का जिम्मा भी उसी को दिया जाएगा। निविदा में इसे शर्त में शामिल करेंगे, ताकि जो भी ठेकेदार रहे लेकिन केंद्र की सुंदरता बरकरार रहे। ललित कुमार वर्मा, मुख्य वन संरक्षक रुहेलखंड जोन
मयूर वन चेतना केंद्र की कोरोना काल से पहले साफ-सफाई हुई थी। अब नहीं हुई है। केंद्र की हालत तो ठीक नहीं है, इसलिए ठेके की रकम निकालना भी मुश्किल है। इसके सौंदर्यीकरण को लेकर कई बार अधिकारियों से बात हुई थी। धर्मेंद्र कुमार, प्रधान मुड़िया
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