बरेली: होटल, घर, मैदान और छतों पर सजे जुए की फड़
संजय शर्मा, अमृत विचार। किसी की जान जाती है तो जाए, किसी का घर बर्वाद होता है तो हो जाए लेकिन पुलिस को जब तक उसका हिस्सा पहुंचता रहता है उसकी आंखें बंद रहती हैं। जैसे ही महीना बंद हो जाता है, वैसे ही पुलिस जुआरियों को पकड़कर जेल भेज देती है। शहर का ऐसा …
संजय शर्मा, अमृत विचार। किसी की जान जाती है तो जाए, किसी का घर बर्वाद होता है तो हो जाए लेकिन पुलिस को जब तक उसका हिस्सा पहुंचता रहता है उसकी आंखें बंद रहती हैं। जैसे ही महीना बंद हो जाता है, वैसे ही पुलिस जुआरियों को पकड़कर जेल भेज देती है। शहर का ऐसा कोई थाना क्षेत्र नहीं है जहां जुए की नाल उनके नाम से न उठती हो। रोज के दो हजार रुपये से लेकर 12 हजार रुपये तक पुलिस को पहुंचाए जाते हैं।
हाफिजगंज के लभेड़ा के पास स्थित एक धार्मिक स्थल से कुछ दूरी पर सुबह से ही जुए की महफिल सज जाती है। यहां पर बेखौफ जुआरी दांव पर दांव लगाते हैं। उन्हें पुलिस का कोई डर नहीं सताता। वहां जुआ कराने वाले रोज के 30 हजार रुपये उठाते हैं। इनमें से रोज 12 हजार का चढ़ावा पुलिस को पहुंचाया जाता है। कोहाड़ापीर के पास एक मकान में 30 से 40 लाख रुपये का जुआ रोज होता है। यहां पर भी पुलिस को अनदेखी के लिए मोटा पैसा दिया जाता है।
बिहारीपुर के करोलान में भी एक घर में रोज जुए का फड़ लगता है। इस मकान मालिक की पुलिस से अच्छी सेटिंग है। इसलिए इसके यहां भी दबिश नहीं पड़ती। श्यामगंज के घी मंडी के पास एक घर में जुआ होता है यहां पर शहर के अच्छे व्यापारी मोटा जुआ खेलते हैं। कुमार टाकीज के पास बने जानवरों के अस्पताल के पास घर में जुआ होता है। कुतुबखाना चौकी को इस जुए की जानकारी है लेकिन यह भी नहीं पकड़ा जाता।
कैंट के परसौना और पदारथपुर में घरों में जुआ कराया जाता है। रिठौरा में खेत में जुआ होता है। किला के एक होटल में जुआ होता है। यहां कभी पुलिस की दबिश नहीं पड़ती। बारादरी के आजाद इंटर कॉलेज के पास में एक घर में जुआ होता है। सेंट्रल जेल के क्वार्टर में मोटा जुआ खेला जाता है।
इसके साथ ही मनिहारों में गली के पास एक घर में रामपुर और मुरादाबाद से तक लोग जुआ खेलने आते हैं। यहां जुआ खेलने आने वालों में रामपुर के एक बड़ा कर्मचारी भी है। इन सब जगहों से पुलिस को मोटा पैसा पहुंचता है। इसके अलावा जिन और लोगों को अपराध पर रोकथाम के लिए लगाया गया है उन लोगों का भी हिस्सा बंध गया है।
एसएसपी रोहित सिंह सजवाण ने बताया कि जुए में यदि पुलिस की भूमिका की जांच कराई जाएगी। यदि किसी दरोगा, सिपाही और इंस्पेक्टर की भूमिका इसमें पाई जाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
रेल कर्मी को शानू मौर्य ने मारी थी गोली
पीली मिट्टी के मैदान में हत्या की कहानी पहले ही लिख चुकी थी। इसके लिए तीन लोग पूरी तरह से तैयार थे। जैसे ही शानू मौर्य ने अपना शिकार देखा तो उस पर तमंचा तानकर गोली चला दी लेकिन वह तो बच गया और गोली धर्मेंद्र के सिर में लग गई और उसकी मौत हो गई। इसके बाद तीनों आरोपी मैदान से भाग गए। पुलिस अब तीनों की तलाश में दबिश दे रही है।
नवादा जोगियान के रहने वाले रेलकर्मी धर्मेंद्र और शानू के बीच में कोई विवाद नहीं था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक शानू का अशफाक नाम के युवक से विवाद था। इसी बात को लेकर शानू ने अशफाक की हत्या की साजिश रच ली थी। रविवार की शाम जब उसे पता चला कि अशफाक वहां है तो वह अपने दो अन्य साथियों के साथ मौके पर पहुंच गया। उसने अशफाक को देखकर उस पर तमंचा तान दिया और गोली चला दी, लेकिन अशफाक बच गया और गोली अशफाक के पीछे खड़े धर्मेंद्र के लग गई। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने चश्मदीदों से बातचीत की है। उसके बाद से फरार शानू और उसके साथी की तलाश की जा रही है।
अब तक की जांच में पता चला है कि आरोपी मारने किसी और को आए थे और गोली किसी और को लग गई। आरोपियों की तलाश की जा रही है। जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। -रोहित सिंह सजवाण, एसएसपी
