हल्द्वानी: भाजपा कार्यकर्ताओं में भीतरखाने पनप रहा आक्रोश

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हल्द्वानी, अमृत विचार। भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं में जिला कार्यकारिणी की कार्यप्रणाली को लेकर भीतरखाने आक्रोश पनप रहा है। कार्यकर्ताओं का आक्रोश पहले दबी जुबान में सामने आता था। लेकिन पिछले दिन मंडल पदाधिकारी के इस्तीफे के बाद यह आक्रोश खुलकर सामने आ चुका है। इस्तीफा देने वाले मंडल पदाधिकारियों की तरह ही तमाम कार्यकर्ता …

हल्द्वानी, अमृत विचार। भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं में जिला कार्यकारिणी की कार्यप्रणाली को लेकर भीतरखाने आक्रोश पनप रहा है। कार्यकर्ताओं का आक्रोश पहले दबी जुबान में सामने आता था। लेकिन पिछले दिन मंडल पदाधिकारी के इस्तीफे के बाद यह आक्रोश खुलकर सामने आ चुका है।

इस्तीफा देने वाले मंडल पदाधिकारियों की तरह ही तमाम कार्यकर्ता खुद को पार्टी में उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। हालांकि वे अभी खुलकर इसका विरोध करने का साहस नहीं जुटा पा रहे थे। लेकिन अब कुछ पदाधिकारियों के खुलकर आक्रोश जताने से अन्य कार्यकर्ताओं को भी विरोध का सबल मिल गया है।

सत्ताधारी भाजपा की जिला कार्यकारिणी के प्रति कार्यकर्ताओं में चुनाव से पहले उपजा आक्रोश काफी समय से अंदरखाने चल रहे वर्चस्व के संघर्ष का परिणाम है। मंडल पदाधिकारी इस्तीफा देने के साथ ही खुलकर इसके खिलाफ आवाज उठा चुके हैं। ऐसा नहीं है कि इससे पहले पार्टी के भीतर सबकुछ ठीक-ठाक चल रहा था। समय-समय पर पार्टी के जमीन से जुड़े कार्यकर्ता कुछ पदाधिकारियों की कार्यप्रणाली और अपनी उपेक्षा को लेकर दबी जुबान में आवाज उठाते आ रहे हैं। जमीनी कार्यकर्ता अपनी पार्टी की सरकार के सत्ता में होने के बावजूद खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

तमाम जमीनी कार्यकर्ताओं की न तो पार्टी स्तर पर पूछ हो रही है और न ही सत्ता में उनको सम्मान मिल रहा है। खुद प्रदेश नेतृत्व और सरकार के मंत्री कार्यकर्ताओं की उपेक्षा पर नाराजगी जता चुके हैं। यही कारण है कि निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष और काबीना मंत्री बंशीधर भगत भी सार्वजनिक मंचों पर सरकार के अधिकारियों से लेकर पार्टी के पदाधिकारियों को जमीनी कार्यकर्ताओं को सम्मान देने का संदेश देना पड़ा था।

तब कार्यकर्ताओं ने सरकार के अधिकारियों के साथ ही पार्टी के पदाधिकारियों पर उपेक्षा का आरोप लगाया था।
अब मंडल पदाधिकारियों के जिले के कुछ पदाधिकारियों की कार्यप्रणाली के विरोध में खुलकर सामने आने से भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। माना जा रहा है कि इस्तीफा देने वाले पदाधिकारियों के प्रकरण से पार्टी के भीतर अन्य जमीनी कार्यकर्ताओं के भीतर दबे आक्रोश की चिंगारी को हवा मिल सकती है। अपनी उपेक्षा का आरोप लगाने वाले कार्यकर्ताओं को इससे अपनी आवाज खुलकर उठाने का सबल मिल सकता है।

चुनाव से पहले नाराजगी बन सकती है नुकसान का सबब
अगले साल राज्य में विधान सभा चुनाव होने हैं। इससे ठीक पहले कार्यकर्ताओं की नाराजगी पार्टी के लिए नुकसान का सबब बन सकती है। अपनी उपेक्षा से नाराज कार्यकर्ता उदासीन हुए तो चुनावी समीकरण भी गड़बड़ा सकते हैं। इस प्रकरण के बाद प्रदेश नेतृत्व के बीच बैचेनी भी बढ़ गई है। पार्टी इस प्रकरण के सामने आने के बाद डैमेज कंट्रोल में जुटी है। हालांकि अभी यह भविष्य के गर्भ में है कि अन्य कार्यकर्ताओं की नाराजगी भी खुलकर सामने आएगी, या फिर अतीत की तरह विरोध के स्वर दबे रह जाएंगे।
गौरव

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