नैनीताल: रोडवेज कर्मचारियों को वेतन ना मिलने के मामले पर हाईकोर्ट सख्त
नैनीताल, अमृत विचार। उत्तराखंड में रोडवेज कर्मचारियों को 6 माह से वेतन न देने के मामले पर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए सरकार को एक बार फिर से जवाब कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए हैं। वहीं कोर्ट ने सुनवाई के दौरान केंद्रीय परिवहन सचिव को निर्देश …
नैनीताल, अमृत विचार। उत्तराखंड में रोडवेज कर्मचारियों को 6 माह से वेतन न देने के मामले पर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए सरकार को एक बार फिर से जवाब कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए हैं।
वहीं कोर्ट ने सुनवाई के दौरान केंद्रीय परिवहन सचिव को निर्देश दिए हैं कि जल्द से जल्द उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के परिवहन सचिवों के बीच बैठक करवाकर परिसंपत्ति बंटवारे पर फैसला लें, वहीं कोर्ट ने आज मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि जब दो देशों के प्रधानमंत्रियों की बैठक होती है उसमें विदेश सचिवों की भूमिका अहम होती है, लेकिन उत्तराखंड में हाई कोर्ट गंभीर मामले पर आदेश दे रहा है, जिसके बावजूद भी आज तक दोनों राज्यों के बीच बैठक नहीं हुई।
हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र और दोनों राज्यों में एक ही पार्टी की सरकार है ऐसे में परिसंपत्ति बंटवारे पर समस्या नहीं आनी चाहिए। उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारियों को लंबे समय से वेतन ना मिलने व उत्तराखंड निर्माण के 20 साल बाद भी अब तक परिसंपत्ति बटवारा ना होने पर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए केंद्रीय परिवहन सचिव को निर्देश दिए हैं कि जल्द से जल्द उत्तर प्रदेश परिवहन निगम समेत उत्तराखंड परिवहन निगम की बैठक कराएं जिससे उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की परिसंपत्तियों का बंटवारा हो सके।
बुधवार को सुनवाई के दौरान उत्तराखंड परिवहन सचिव के द्वारा कोर्ट को बताया गया कि राज्य सरकार के द्वारा 34 करोड़ रुपए रोडवेज निगम के खाते में डाल दिया गया है, जिससे कर्मचारियों को वेतन दिया जाएगा। बता दें कि उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारी संघ ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि सरकार उनके खिलाफ एस्मा लगाने जा रही है, जो नियम विरुद्ध है। सरकार कर्मचारियों को हड़ताल करने पर मजबूर करती आई है।
सरकार व परिवहन निगम न तो संविदा कर्मचारियों को नियमित कर रही है, न उनको नियमित वेतन दिया जा रहा है, उनको पिछले चार साल से ओवरटाइम भी नहीं दिया जा रहा है, रिटायर कर्मचारियों के देयकों भुगतान नहीं किया गया। यूनियन का सरकार व निगम के साथ कई बार मांगों को लेकर समझौता हो चुका है, उसके बाद भी सरकार एस्मा लगाने को तैयार है। साथ ही याचिका में कहा है कि सरकार ने निगम को 45 करोड़ रुपया बकाया देना है।
वहीं उत्तर प्रदेश परिवहन निगम द्वारा भी निगम को 700 सौ करोड़ रुपया देना है और ना तो राज्य सरकार निगम को उनका 45 करोड़ पर दे रही है ना ही राज्य सरकार उत्तर प्रदेश से 700 करोड़ रुपए मांग रही है, जिस वजह से निगम ना तो नई बसे खरीद पा रही है और ना ही बस में यात्रियों की सुविधाओं के लिए सीसीटीवी समेत अन्य सुविधाएं दे पा रही है।
