सीतापुर: आखिर कब मिलेगा सलेमपुर को रास्ता, गांव तक नहीं पहुंच पाती एम्बुलेंस

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सीतापुर। विकास क्षेत्र कसमंडा में आजादी के इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी दो गांवों को जाने के लिए आज तक कोई सड़क नहीं है। इन गांवों के लोगों को आज भी अपना चौपहिया वाहन अपने गांव से बाहर ही खड़ा करना पड़ता है। घर तक वाहनों को ले जाने के लिए कोई सड़क …

सीतापुर। विकास क्षेत्र कसमंडा में आजादी के इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी दो गांवों को जाने के लिए आज तक कोई सड़क नहीं है। इन गांवों के लोगों को आज भी अपना चौपहिया वाहन अपने गांव से बाहर ही खड़ा करना पड़ता है। घर तक वाहनों को ले जाने के लिए कोई सड़क नहीं बनी है। इस गांव तक जाने के लिए कोई भी नक्शे पर रास्ता नहीं छोड़ा गया। चकबंदी के दौरान जबकि सलेमपुर राजस्व गांव है। गांव में लगभग 60 घर है और आबादी लगभग तीन सौ की होगी, रास्ते के लिए गांव के लोग शासन प्रशासन तक अपनी गुहार लगा चुके हैं, पर अभी तक सलेमपुर गांव को रास्ता नसीब नहीं हुआ है।

अजय कुमार बताते हैं कि हमें अपना वाहन अपने गांव के बाहर ही खड़ा करना पड़ता है। गांव तक पैदल ही जाते है। गांव में बरात भी पहुंचना मुश्किल है। सलेमपुर गांव के अमित कहते हैं किसी को परेशानी हो तो गांवों तक एम्बुलेंस भी नहीं पहुंच सकती और न ही फायर ब्रिगेड की गाड़ी। कोई हादसा हो जाए तो गांव तक कोई चौपहिया वाहन ही नहीं पहुंच सकता। गांव के विकास की पहली कड़ी ही सड़क होती है।

सरोज बताते है कि नयागांव वालों ने तो रास्ते के लिए लोकसभा चुनाव में वोट ही नहीं दिया था और मतदान का बहिष्कार कर दिया था। तब जाकर नयागांव को सड़क मिल पाई थी। पर पट्टी और सलेमपुर गांव के लोगों ने शासन प्रशासन से गुहार लगा ली पर अभी तक रास्ता नहीं मिला। ऐसे में जनप्रतिनिधि जनता के समस्याओं के प्रति जागरूकता कितनी है। महसूस किया जा सकता है। 74 साल बीतने के बाद भी इन गांवों को रास्ता नसीब नहीं हुआ है।

नेता हर चुनाव में वोट मांगने के लिए आते हैं। वादा करके जीत हासिल कर लेते हैं। फिर भूल जाते हैं। यही हाल पट्टी गांव का है। कस्बे से मात्र एक किलोमीटर दूरी पर बसा गांव भी आज तक रास्ते के लिए तरस रहा है। इस गांव में लगभग 25 परिवार रहते हैं। पट्टी गांव के अशोक शुक्ला कहते हैं कि सरकार द्वारा चलाई जा रही एम्बुलेंस भी गांव तक नहीं पहुंच पाती। गर्भवती महिलाओं को साइकिल या मोटरसाइकिल से अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। गांव तक रास्ता नहीं छोड़ा गया। यह कमी चकबंदी विभाग की है। उनकी गलती का खामियाजा हम लोगों को आखिर कब तक भुगतना पड़ेगा।

इस संबंध में जब क्षेत्रीय लेखपाल अविनाश मिश्र से बात की गई तो उन्होंने कहा कि सलेमपुर गांव के बीच में वन विभाग की जमीन आती है। इसी कारण वश रास्ता नहीं हैं। वन विभाग अपनी जमीन देदे तो रास्ता बन सकता है। वही हाल पट्टी गांव का भी है। यहां लोगों के नम्बरी खेत है। वह लोग रास्ते के लिए जमीन दे दें तो रास्ता बन सकता है। इस संबंध में जब क्षेत्रीय विधायक महेंद्र सिंह यादव से बात की गई। उन्होंने कहा कि इस संबंध में प्रयास जारी हैं। हर स्तर पर बात की जा रही है।जो भी अड़चनें हैं। वह दूर करा कर इन गांवो तक रास्ते का निर्माण कराया जाएगा।

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