बाराबंकी: प्रसूता की मौत के बाद निजी अस्पताल ने किया रेफर, पत्नी की मौत से आहत पति ने…

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Edited By Amrit Vichar
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बाराबंकी। नगर कोतवाली क्षेत्र में गर्भवती महिला कि मौत के बाद शव को रैफर किये जाने का मामला प्रकाश में आया है। निजी अस्पतालों की बढ़ती तादात एक बड़ी मंडी का रूप ले चुकी हैं। गली-मोहल्लों तक फैले निजी अस्पतालों में सभी प्रकार के रोगों का इलाज किये जाने का गोरखधंधा तेजी से फल-फूल रहा …

बाराबंकी। नगर कोतवाली क्षेत्र में गर्भवती महिला कि मौत के बाद शव को रैफर किये जाने का मामला प्रकाश में आया है। निजी अस्पतालों की बढ़ती तादात एक बड़ी मंडी का रूप ले चुकी हैं। गली-मोहल्लों तक फैले निजी अस्पतालों में सभी प्रकार के रोगों का इलाज किये जाने का गोरखधंधा तेजी से फल-फूल रहा है। वहीं इन अस्पतालों में बेहतर इलाज के नाम पर मोटी फीस लिये जाने के बावजूद मरीज की जान से खिलवाड़ का सिलसिला जारी है। इसी तरह से शर्तिया इलाज का झांसा देकर भर्ती की गयी गर्भवती महिला की डिलेवरी से पहले मौत हो जाने की उसके पति के शिकायत पर जांच शुरू हो गयी है।

जानकारी के अनुसार कोतवाली बदोसराय क्षेत्र के ग्राम मदारपुर निवासी विकास शर्मा की नौ माह की गर्भवती पत्नी रीता (21) को बीती रात 1 बजे नगर कोतवाली क्षेत्र के पैसार स्थित आसरा अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां नार्मल डिलेवरी का वादा करके सबसे पहले उससे 60 हज़ार रूपये नगद जमा कराये गये। विकास ने बताया कि सुबह 4 बजे उसे बताया गया कि उसकी पत्नी रीता को खून की कमी है बता कर 20 हज़ार रूपये और जमा करा कर खून लाने भेज दिया। साढ़े पांच बजे ज़ब वह खून लेकर लौटा तो उसकी पत्नी का शव सौंपते हुऐ क्वीन मैरी अस्पताल लखनऊ ले जाने की सलाह देकर शव को आसरा अस्पताल के लोगों ने बाहर रखवा दिया।

परिजन इस हरकत से सकते में आ गये कि शव को कैसे रेफर किया जा सकता है, और उनका अस्पताल में मौजूद लोगों से विवाद हो गया। लेकिन अस्पताल की तरफ से 112 को फोन करके बुला लिये जाने पर पुलिस भी साथ पहुंची। जिसके बाद विकास ने परिजनों के साथ जिलाधिकारी डॉ. आदर्श सिंह और पुलिस अधीक्षक यमुना प्रसाद को लिखित शिकायत करते हुऐ मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी आसरा अस्पताल में गयी जच्चा-बच्चा की जान को इलाज़ में लापरवाही और गलत इलाज़ की वजह जिक्र किया है। मृतका के पति का यह भी आरोप है कि रीता का हीमोग्लोबिन का प्रतिशत नौ से अधिक था।

कैमरे से देख कर चिकित्सक दे रहा था स्टॉफ को इलाज़ के निर्देश

पत्नी रीता और दुनिया को देखने से पहले ही काल का ग्रास बन गये बच्चे की मौत का आसरा अस्पताल के स्टॉफ पर ठीकरा फोड़ते हुऐ विकास ने बताया कि उसकी पत्नी रीता के इलाज़ के दौरान उसकी मां मंजू, पिता रामसरन, रीता की मौसी और उसके मामा समेत अन्य रिश्तेदार भी मौजूद थे। सभी के सामने ही रीता का नर्स बतायी जाने वाली दो युवतियाँ और एक महिला सफाईकर्मी ग्लूकोस चढ़ा कर इलाज़ कर रही थी। जिनको केबिन में बैठा एक चिकित्सक जैसा व्यक्ति कैमरे में देख कर उपचार के दिशा-निर्देश जारी कर था। उसी के कहने पर ही रीता को चढ़ रहे ग्लूकोस में दिये गये इंजेक्शन के बाद ही उसकी पत्नी की मौत हो गयी। इस बात को मौजूद सभी परिजनों ने देखा भी है।

जाँच के लिये तीन सदस्यीय टीम गठित- सीएमओ

एक महिला ग्यानकॉलेजिस्ट के साथ तीन सदस्ययीय टीम गठित कि जा रही है। यह टीम पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे जाँच करेगी। यह कहते हुऐ जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी रामजी वर्मा ने बताया कि सूचना मिलते ही डिप्टी सीएमओ के साथ निरीक्षकों को आसरा अस्पताल भेज कर मौत पूरे प्रकरण की पड़ताल शुरू कर दी गयी है।

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