इटावा: घरों में बाढ़ का डेरा, छतों पर फंसे ग्रामीण, सरकार से की ये बड़ी मांग
इटावा। चकरनगर क्षेत्र के लगभग तीन दर्जन गांव में सोमवार तक भीषण बाढ़ का पानी आधे से अधिक ग्रामीणों के घरों में भरा हुआ है। घरों में पानी भरने से ग्रामीण छह दिन से छतों पर लटके हुए हैं, जबकि पशु पानी में घुसकर जारा खा रहे है। बाढ़ के प्रकोप से कई लोगों के …
इटावा। चकरनगर क्षेत्र के लगभग तीन दर्जन गांव में सोमवार तक भीषण बाढ़ का पानी आधे से अधिक ग्रामीणों के घरों में भरा हुआ है। घरों में पानी भरने से ग्रामीण छह दिन से छतों पर लटके हुए हैं, जबकि पशु पानी में घुसकर जारा खा रहे है। बाढ़ के प्रकोप से कई लोगों के मकान धराशाई हो गए तो कहीं दीवार गिर कर क्षतिग्रस्त हो गए। पीड़ित ग्रामीण जनता ने भारी-भरकम हुए नुकसान के भरपाई की सरकार से मांग की।
चकरनगर क्षेत्र में प्रवाहित चंबल, यमुना व क्वारी नदी में आए बाढ़ के विशालकाय सैलाब ने क्षेत्र के आधा सैकड़ा गांव को पूरी तरह जलमग्न कर दिया था। क्षेत्र के ग्रामीण लगभग एक सप्ताह से छतों पर ही घिरे हुए हैं। रविवार रात्रि समय से एक बार फिर बाढ़ का जलस्तर घटना शुरू हुआ है। जिससे बाढ़ प्रभावित गांवों के 40 फीसदी मकानों से पानी निकल गया है, जबकि आधे से अधिक मकानों में पानी भरा हुआ है। यही नहीं गांव की गलियां आज भी पूरी तरह से जलमग्न है। उक्त गांव के पशुओं को आज भी पानी में घुसकर चारा दिया जा रहा है।
बताते चलें कि उक्त क्षेत्र में आधा सैकड़ा गांव भीषण बाढ़ की चपेट में थे और सभी गांव में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। जिसमें किसानों का हजारों टन गल्ला पानी में भीग गया और भूसा बह गया। यही नहीं कुछ किसानों के खेतों में जो फसल बोई गई थी, वह भी पूरे तरीके से नष्ट हो गयी। लेकिन समूचे क्षेत्र में सबसे अधिक गांव हरौली बहादुरपुर बाढ़ की चपेट में था। उक्त तलहटी का गांव भरेह किला से लेकर लगभग चार किमी दूर तक पानी से घिरा था। यही नहीं आसा-पास पहाड़ी क्षेत्र न होने से ग्रामीण न सिर्फ छतों पर ही लटके रहे, बल्कि शौंच के लिए भी परेशान हो गए।
