मुरादाबाद: 16 साल से फरार चल रहा इनामी हत्यारोपी गिरफ्तार, 12 हजार का था इनाम
मुरादाबाद,अमृत विचार। मैनाठेर पुलिस ने 16 साल से फरार चल रहे हत्यारोपी 12 हजार के इनामी को गिरफ्तार किया है। आरोपी गुलाम मोहम्मद के नाम से बिहार में रहकर खेती कर रहा था। एसएसपी पवन कुमार ने इनामी बदमाश को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम को 25 हजार रुपये के पुरुस्कार का एलान किया है। …
मुरादाबाद,अमृत विचार। मैनाठेर पुलिस ने 16 साल से फरार चल रहे हत्यारोपी 12 हजार के इनामी को गिरफ्तार किया है। आरोपी गुलाम मोहम्मद के नाम से बिहार में रहकर खेती कर रहा था। एसएसपी पवन कुमार ने इनामी बदमाश को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम को 25 हजार रुपये के पुरुस्कार का एलान किया है।
एसपी देहात विद्यासागर मिश्र ने बताया कि 11-12 जुलाई 2005 की रात मैनाठेर के गांव महमूदपुर माफी निवासी ख्यालीराम के घर गांव का ही दानशाह दो-तीन साथियों के साथ घुस गया था। बदमाशों ने ख्यालीराम और उसके बेटों पर फायरिंग कर दी थी। गोली लगने से ख्यालीराम, दयाराम व ताराचंद घायल हो गए थे। बाद में ताराचंद की मौत हो गई थी।
विवेचना में थानाक्षेत्र के गांव ललवारा निवासी दूल्हाजान, गांव अल्लापुर भीकन निवासी कल्लू उर्फ कलुआ व रामपुर के गांव भोट निवासी अजमेरी के नाम प्रकाश में आए थे। दानशाह के खिलाफ 18 दिसंबर 2005 को कोर्ट में आरोप पत्र प्रेषित किया गया था। अजमेरी काशीपुर में मारा गया था और कल्लू अदालत में हाजिर हो गया था। फरार चल रहे दूल्हाजान पर ढाई हजार रुपये का इनाम घोषित किया।
चार अक्टूबर 2016 को पुलिस उपमहानिदेशक ने उस पर 12 हजार रुपये का पुरस्कार घोषित कर दिया। मैनाठेर पुलिस को सूचना मिली कि दूल्हाजान बिहार के कटिहार जिले में रोहिंग्या बस्ती में रह रहा है। चार अगस्त को पुलिस टीम वहां पहुंची और मुखबिर का सहारा लिया।
दो दिन तक रेकी के बाद पुलिस ने कटिहार के कोड़ा थानाक्षेत्र के ग्राम हरीशपुर में झुग्गी में रह रहे आरोपी को दबोच लिया। आरोपी ने बताया कि वह बिहार में गुलाम मोहम्मद के नाम से रह रहा था। 2005 में चोरी में वह 19 महीने तक मुरादबाद की जेल में रहा था। इसके बाद महमूदपुर माफी में हत्या कर दी। जेल जाने के डर से बिहार भाग गया। कटिहार में उसने दो निकाह कर लिए। दोनों पत्नियों से आठ बच्चे हैं।
इस तरह से आया पुलिस की गिरफ्त में
दूल्हाजान की तलाश में पुलिस को एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ा। वह पशु तस्कर भी था। इसी के चलते उसका बिहार आना-जाना था। पुलिस ने इसी दिशा में काम किया। उसके पुराने संपर्क खंगाले गए। पुराने मिलने वालों की लिस्ट बनाई गई। बिहार में रहने वाले पशु तस्करों से उसके संबंधों का पता लगाया गया। सुराग मिला तो पुलिस ने वहीं डेरा डाल दिया। चार दिन तक रेकी की। तब कहीं जाकर दूल्हाजान पुलिस के हत्थे लग सका।
