रामपुर: नहीं निकले ताजियों के जुलूस, चप्पे-चप्पे पर तैनात रही पुलिस

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रामपुर, अमृत विचार। 10वीं मोहर्रम को जिलेभर में कोविड-19 के चलते ताजियों के जुलूस नहीं निकले। अलबत्ता, चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात रही कर्बला तक ताजिए नहीं पहुंच पाए। आगापुर स्थित कर्बला के सभी गेटों पर ताले लटके रहे। अजादारों में इमामबाड़ों में रहकर बीबी फातिमा को उनके लाल हजरत इमाम हुसैन का पुरसा दिया। 10 …

रामपुर, अमृत विचार। 10वीं मोहर्रम को जिलेभर में कोविड-19 के चलते ताजियों के जुलूस नहीं निकले। अलबत्ता, चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात रही कर्बला तक ताजिए नहीं पहुंच पाए। आगापुर स्थित कर्बला के सभी गेटों पर ताले लटके रहे। अजादारों में इमामबाड़ों में रहकर बीबी फातिमा को उनके लाल हजरत इमाम हुसैन का पुरसा दिया।

10 मोहर्रम को हजरत इमाम हुसैन को कर्बला के मैदान में यजीद की फौज में शामिल शिम्र ने हजरत इमाम हुसैन का सिर काटकर उन्हें शहीद कर दिया। इससे पहले हजरत इमाम हुसैन के छह महीने के अली असगर के गले पर हुरमुला ने त्रिफला तीर चलाकर शहीद कर दिया। हजरत इमाम हुसैन के जवान बेटे अली अकबर, भाई हजरत अब्बास समेत 72 साथियों को शहीद किया गया।

10 मोहर्रम को पूरे दिन हजरत इमाम हुसैन कर्बला से खेमों तक शहीदों की लाशें लाते रहे। इसके बाद अली का लाल कर्बला के मैदान में पहुंचा और यजीदी फौज कूफे की दीवारों से टकराने लगी। अल्लाह की तरफ से वही बस हुसैन बस। इसके बाद यजीदी फौज ने हजरत इमाम हुसैन को चारों तरफ से घेर कर तीरों की बारिश कर दी।

इमाम हुसैन के जिस्म पर इतने तीर पेवस्त हो गए कि जब वह घोड़े से गिरे तो वह जमीन तक नहीं पहुंचे और तीरों पर ही रुक गए। इसके बाद शिम्र ने नवासा ए रसूल हजरत इमाम हुसैन के सिर को उनके तन से जुदा कर दिया। इमाम हुसैन का गम अपने-अपने तौर तरीकों से पूरी दुनिया में मनाय जाता है। 10 दिन तक ताजिएदारी होने के बाद ताजियों को कर्बला में सुपुर्द ए खाक कर दिया जाता है। लेकिन, इस बार कोरोना के कारण ताजियों के जुलूस नहीं निकले।

रोजे आशूर को शहर के अधिकतर बाजार रहे बंद
रामपुर। रोजे आशूर यानि 10 मोहर्रम को कोई काम नहीं किया जाता है इसके अलावा राष्ट्रीय अवकाश रहता है। 10 मोहर्रम को शहर के अधिकतर बाजार बंद रहे और लोगों ने हजरत इमाम हुसैन के गम में कारोबार बंद रखा।

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