बरेली: ऑनलाइन बिक रहा गर्दनें काटने वाला मांझा

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। शहर के कई लोगों की गर्दनें लहूलुहान कर चुके चाइनीज मांझे पर पुलिस ने सख्ती शुरू की तो स्थानीय दुकानदारों ने अपनी दुकानों पर तो इसे रखना बंद कर दिया लेकिन ई कॉमर्स साइटों पर खुले रूप से मांझा बिक रहा है। पतंगबाज साइटों से होम डिलीवरी करा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय ई …

बरेली, अमृत विचार। शहर के कई लोगों की गर्दनें लहूलुहान कर चुके चाइनीज मांझे पर पुलिस ने सख्ती शुरू की तो स्थानीय दुकानदारों ने अपनी दुकानों पर तो इसे रखना बंद कर दिया लेकिन ई कॉमर्स साइटों पर खुले रूप से मांझा बिक रहा है। पतंगबाज साइटों से होम डिलीवरी करा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय ई कॉमर्स साइटों पर शिकंजा कसना स्थानीय पुलिस के बस में भी नहीं है।

शहर में चाइनीज मांझे से हादसों के बाद पुलिस ने बड़े पैमाने पर चाइनीज मांझे की ब्रिकी और खरीद करने वालों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। पुलिस ड्रोन कैमरे की मदद से मांझा बेचने और पतंग उड़ाने वालों पर नजर रख रही है। पुलिस की जबर्दस्त सख्ती के बाद शहर के व्यापारियों ने चाइनीज मांझे की ब्रिकी बंद कर दी है लेकिन पतंग उड़ाने के शौकीन नहीं मान रहे हैं। वे ई कॉमर्स साइटों पर चाइनीज मांझा सर्च कर होम डिलीवरी करा रहे हैं।

लाउडस्पीकर के जरिये लोगों को किया गया जागरूक
पुलिस लाउडस्पीकर के जरिये लोगों को चाइनीज मांझे के दुष्प्रभाव, इसके इस्तेमाल व बेचने पर होनी वाली कार्रवाई को लेकर लोगों को जागरूक कर रही है। बारादरी के जगतपुर, सैलानी, जोगी नवादा, मीरा की पैठ व शाहदाना और किला कोतवाली इलाकों में पुलिस लगातार अभियान चला रही है।

ऐसे बनता है चाइनीज मांझा
चाइनीज मांझा नायलान से बनता है। इसमें शीशा, जिरकोनियम ऑक्साइड, एल्युमीनियम ऑक्साइड और मैदा आदि मिलाया जाता है। नायलान के प्रयोग से यह मांझा आसानी से नहीं टूटता। बारिश में भी मजबूत रहता है। इससे सामान्य मांझे वाली पतंग भी आसानी से कट जाती है। इस मांझे को पतंगबाज ज्यादा पसंद करते हैं। यह मांझा गर्दन ही नहीं काटता, बल्कि धातु युक्त होने से बिजली की लाइन के संपर्क में आने से इसमें करंट भी आ जाता है। वहीं स्वदेशी मांझा सूत से बनाया जाता है।

संकट के दौर से गुजर रहे स्वदेशी मांझे के कारीगर
लगभग दो सौ साल पुराना बरेली का मांझा कारोबार वर्तमान में अपने वजूद के लिए जद्दोजहद कर रहा है। कभी बदहाली के दिनों में भी यह कारोबार हर महीने करोड़ों का टर्नओवर देता था, लेकिन अब हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि महीने में एक करोड़ रुपये का आंकड़ा भी पार करना मुश्किल है। वजह साफ है कि चाइनीज माल ने बरेली के मांझे की चमक फीकी कर दी है। लिहाजा मांझे को धार देने वाले मांझा कारीगरों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

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