हरदोई: पंजीयन निरस्त होने के बाद भी धड़ल्ले से चल रहा हस्पिटल
हरदोई। नगर में कुकुरमुत्तों की तरह उगे दर्जनों मानकविहीन व अवैध अस्पतालों, क्लीनिक, अवैध पैथोलॉजी व डायग्नोस्टिक सेंटरों पर झोलाछाप डाक्टरों/संचालकों की अंधेरगर्दी चरम सीमा पर पहुंच रही है। नगर में लखनऊ-हरदोई राजमार्ग, गौसगंज रोड, स्टेशन रोड, गाजू रोड, हथौड़ा व सुठेना रोड सहित आवासीय भवनों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में मानकों को ताक पर रखकर …
हरदोई। नगर में कुकुरमुत्तों की तरह उगे दर्जनों मानकविहीन व अवैध अस्पतालों, क्लीनिक, अवैध पैथोलॉजी व डायग्नोस्टिक सेंटरों पर झोलाछाप डाक्टरों/संचालकों की अंधेरगर्दी चरम सीमा पर पहुंच रही है। नगर में लखनऊ-हरदोई राजमार्ग, गौसगंज रोड, स्टेशन रोड, गाजू रोड, हथौड़ा व सुठेना रोड सहित आवासीय भवनों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में मानकों को ताक पर रखकर दर्जनों अवैध/गैर पंजीकृत/मानकविहीन अस्पताल, नर्सिंग होम, मैटरनिटी सेंटर, पैथोलॉजी/डायग्नोस्टिक लैब व झोलाझाप डॉक्टरों के क्लीनिक संचालित हैं। इन कथित अस्पतालों में ना तो कोई एमबीबीएस डॉक्टर मौजूद रहता है और ना ही जैव अपशिष्ट/प्रदूषण प्रबंधन की कोई ठोस व्यवस्था होती है।
इन फर्जी/अपंजीकृत अस्पतालों के संचालक मरीजों की गाढ़ी कमाई पर डाका डालते हुए उनकी जिंदगी से खिलवाड़ करने से भी नहीं चूकते हैं। मोटी रकम वसूलने की चाहत में इन अवैध अस्पतालों के संचालक मानकों को ताक पर रखकर सामान्य मरीजों को भी कई दिनों तक बेवजह एडमिट रखते हुए इलाज करते हैं जिससे क्षेत्र के कई लोग अपनी जान से हाथ धो चुके हैं। संचालकों द्वारा मरीजों से मनमानी वसूली और विरोध करने पर गुंडागर्दी पर उतारू रहने वाले इन फर्जी अस्पताल प्रबंधन की शिकायत करने पर स्वास्थ्य विभाग भी सिर्फ खानापूर्ति के लिए कार्यवाई करता है और कुछ दिनों बाद इन अस्पतालों का फिर वही धंधा शुरू हो जाता है। नगर में संचालित इन अवैध अस्पतालों के मकड़जाल में फंसकर आए दिन सैकड़ों मरीज आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे हैं।
ताजा मामला नगर पंचायत कछौना पतसेनी में लखनऊ-हरदोई राजमार्ग पर (पुराने पेट्रोल पंप के पास) स्थित एक निजी हॉस्पिटल का है जहा विगत दिनों उक्त अस्पताल की अत्यधिक शिकायतों के चलते मुख्य चिकित्साधिकारी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग व स्थानीय सीएचसी अधीक्षक ने टीम सहित सघन निरीक्षण किया था जिसमें अस्पताल के मानकविहीन, योग्य व पंजीकृत चिकित्सक/पैरामेडिकल स्टाफ के ना होने, कोविड डेस्क ना होने एवं काफी खामियां/अव्यवस्थाएं मिलने की दशा में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्यवाई करते हुए अनाधिकृत रूप से संचालित एन.बी.हॉस्पिटल का पंजीकरण निरस्त कर तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया था।
लेकिन आज कई दिन बीतने के बाद में उक्त फर्जी अस्पताल का संचालन जारी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पताल को बंद करने का आदेश दिए जाने के बाद भी संचालक मुख्तार द्वारा धड़ल्ले से पूर्व की भांति अस्पताल को रोजाना खोलकर मरीजों की जिंदगी से जमकर खिलवाड़ किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में उक्त हॉस्पिटल में गैरपंजीकृत चिकित्सकों व अप्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ द्वारा मरीजों का ईलाज होने की दशा में सीएचसी अधीक्षक की संस्तुति पर सीएमओ ने एन.बी.हॉस्पिटल का पंजीकरण निरस्त करते हुए बंद करने का आदेश जारी किया था।
एन.बी.हॉस्पिटल में अवैध रूप से ईशान मेडिकल स्टोर का भी संचालन किया जा रहा है। वहीं एन.बी.हॉस्पिटल के ठीक सामने भी एक बिल्डिंग में गोपनीय तरीके से एक फर्जी अस्पताल का भी संचालन हो रहा है। जिसका ना तो कहीं पंजीकरण है और ना ही अन्य किसी प्रकार की प्राथमिकताएं पूरी की गई हैं। बताते चलें कि कछौना के एन.बी.हॉस्पिटल का विवादों से पुराना नाता रहा है।इस अस्पताल में बेहतरीन ईलाज व जांचों के नाम पर मरीजों व उनके परिजनों को जमकर लूटा जाता है।
विरोध करने पर अस्पताल के संचालक व स्टाफ गुंडागर्दी पर उतारू हो जाता है।वहीं अस्पताल के निदेशक डॉक्टर मुख्तार के द्वारा क्षेत्र के दर्जनों युवक/युवतियों से नर्सिंग/पैरामेडिकल कोर्स कराने/ट्रेनिंग देने के नाम पर जमकर अवैध वसूली भी की गई है।कछौना में मरीजों की आज तक सबसे ज्यादा रिकॉर्ड मौतें भी एन.बी.हॉस्पिटल में ही हुई हैं।एक तरह से इसे अस्पताल ना कहकर ‘मौत का अड्डा’ भी कहा जा सकता है।आए दिन अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ लगातार मिल रही शिकायतों, अनियमितताओं तथा मरीज़ों से मनमानी वसूली पर ही संज्ञान लेते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी ने बड़ी कार्यवाई करते हुए इस अस्पताल का पंजीकरण निरस्त कर बंद करने का आदेश जारी किया था।
एन.बी.हॉस्पिटल का पंजीकरण निरस्त होने के बाद भी बदस्तूर जारी अवैध संचालन के संदर्भ में जब कछौना सीएचसी अधीक्षक किसलय बाजपेयी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि पंजीकरण निरस्त होने के बाद भी एन.बी. हॉस्पिटल का संचालन होना पूर्ण रूप से अवैध व नियमविरुद्ध है।हमारी जांच रिपोर्ट के आधार पर व क्लीनिकल एक्ट के प्रावधानों के मुताबिक अस्पताल में दर्शाई गई बेड क्षमता, चिकित्सकों की उपलब्धता व संसाधन नहीं थे, ऐसे में भारी अनियमितताएं पाए जाने पर सीएमओ ने इस अस्पताल का पंजीकरण निरस्त कर दिया था, इसके बाद भी यदि हॉस्पिटल का अवैध संचालन हो रहा है तो दोषी अस्पताल संचालक व स्टाफ पर त्वरित वैधानिक कार्यवाई जाएगी।वहीं मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर सूर्यमणि त्रिपाठी ने बताया कि पंजीयन निरस्त होने के बाद अस्पताल का संचालन होना आदेशों का खुला उल्लंघन है।इस संबंध में कछौना सीएचसी अधीक्षक को निर्देशित करते हुए संचालकों के विरुद्ध कठोर कार्यवाई कराई जाएगी।
