बरेली: फाइलेरिया- भदपुरा व दलेलनगर ब्लॉक अतिसंवेदनशील घोषित
शिवांग पांडेय, अमृत विचार, बरेली। मलेरिया के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में फाइलेरिया भी बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने 15 ब्लॉकों में से सात ब्लॉकों को फाइलेरिया के दृष्टिगत संवेदनशील माना है। इनमें से भदपुरा व दलेलनगर ब्लॉक को बढ़ते मामलों के चलते अति संवेदनशील घोषित किया गया है। दोनों ब्लॉकों में 17-17 फाइलेरिया …
शिवांग पांडेय, अमृत विचार, बरेली। मलेरिया के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में फाइलेरिया भी बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने 15 ब्लॉकों में से सात ब्लॉकों को फाइलेरिया के दृष्टिगत संवेदनशील माना है। इनमें से भदपुरा व दलेलनगर ब्लॉक को बढ़ते मामलों के चलते अति संवेदनशील घोषित किया गया है। दोनों ब्लॉकों में 17-17 फाइलेरिया से ग्रसित मरीज मिले हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से दोनों ब्लॉकों के गांवों में फाइलेरिया के रोकथाम के लिए नाइट ब्लड सर्वे अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें रात के समय खून के नमूनों की जांच की जा रही है। जांच के दौरान पुष्टि होने पर चिह्नित गांवों में फाइलेरिया के मरीजों का पंजीकरण कर उन्हें शासन के निर्देशानुसार इलाज दिया जा रहा है।
सात ब्लॉक के 100 से अधिक गांव संवेदनशील
सात ब्लॉकों को मरीजों की संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने संवेदनशील माना है। इनमें से भदपुरा व दलेलनगर में 17-17, मीरगंज में 14, फतेहगंज पश्चिमी में 9, भुता में 12, फरीदपुर में 10, बिथरी चैनपुर में 11 मरीज फाइलेरिया के मिले हैं। ऐसे में फाइलेरिया अभियान के तहत इन चिह्नित क्षेत्रों में विशेष निगरानी की जा रही है। जिले में सर्वे के तहत कुल चार हजार ग्रामीणों की जांच की जाएगी।
अब तक कुल 139 मरीज फाइलेरिया से ग्रसित
जिला मलेरिया अधिकारी डा. देशराज सिंह ने बताया कि जिले में 139 मरीज फाइलेरिया के मरीज खोजे जा चुके हैं, जिसमें 129 रोगी ऐसे हैं जिनके पैरों में सूजन है, जबकि 4 मरीजों के हाथों में फाइलेरिया के चलते सूजन आ गई है। छह मरीजों में फाइलेरियल हाइड्रोसिल की शिकायत है। बताया कि फाइलेरिया के मरीजों का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के तहत निशुल्क ऑपरेशन कराया जाता है। जिला अस्पताल में चार मरीजों के सूजे हुए हाथ, जबकि फाइलेरियल हाइड्रोसिल से जूझ रहे आठ लोगों का ऑपरेशन विशेषज्ञ सर्जनों ने किया है।
ये होते हैं फाइलेरिया के लक्षण
जिला अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन डा. एमपी सिंह ने बताया कि फाइलेरिया के कोई लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते हैं। हालांकि बुखार, बदन में खुजली और पुरुषों के जननांग और उसके आस-पास दर्द व सूजन की समस्या होती है। पैरों और हाथों में सूजन, हाइड्रोसिल (अंडकोषों की सूजन) भी फाइलेरिया के लक्षण हैं। इस बीमारी में हाथ और पैरों में हाथी के पांव जैसी सूजन आ जाती है, इसलिए इस बीमारी को हाथीपांव भी कहा जाता है। वैसे फाइलेरिया का संक्रमण बचपन में ही आ जाता है, लेकिन कई सालों तक इसके लक्षण नजर नहीं आते। फाइलेरिया न सिर्फ व्यक्ति को दिव्यांग बना देती है, बल्कि इससे मरीज की मानसिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।
ऐसे करें बचाव
- फाइलेरिया चूंकि मच्छर के काटने से फैलता है, इसलिए बेहतर है कि मच्छरों से बचाव किया जाए। घर के आस-पास व अंदर साफ-सफाई रखें।
- पानी जमा न होने दें और समय-समय पर कीटनाशक का छिड़काव करें। फुल आस्तीन के कपड़े पहनकर रहें।
- सोते वक्त हाथों और पैरों पर व अन्य खुले भागों पर सरसों या नीम का तेल लगाएं।
- हाथ या पैर में कही चोट लगी हो या घाव हो तो उसे साफ रखें। साबुन से धोएं और फिर पानी सुखाकर दवा लगाएं।
बीते सालों के आंकड़ों पर एक नजर
वर्ष पैर में सूजन हाइड्रोसिल हाथ में सूजन कुल मरीज
- 2017-18 110 6 8 114
- 2018-19 116 6 7 129
- 2019-20 121 14 4 139
- 2020-21 121 7 4 132
- 2021-22 129 6 4 139
(उपरोक्त आंकड़े स्वास्थ्य विभाग की ओर से लिए गए हैं)
जिले में फाइलेरिया के खिलाफ नाइट ब्लड सर्वे का अभियान चलाया जा रहा है। जिसके तहत गांवों में नाइट सर्वे किया जा रहा है। लोगों का सैंपल लेकर उनकी जांच की जा रही है। रोगियों को दवा वितरित की जा रही है। -डीआर सिंह, जिला मलेरिया अधिकारी
