अच्छी खबर: अब दूसरे राज्य में वाहन ले जाने के लिए अलग से पंजीकरण की जरूरत नहीं
हल्द्वानी, अमृत विचार। एक राज्य से दूसरे राज्य में निजी वाहनों को ले जाने में अब कोई दिक्कत नहीं होगी। अभी तक एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने पर नौकरीपेशा वाले लोगों को उस राज्य के आरटीओ दफ्तर में पंजीकरण करवाना पड़ता था, लेकिन अब ये झंझट नहीं रहेगा। भारत सरकार द्वारा वाहन पंजीकरण …
हल्द्वानी, अमृत विचार। एक राज्य से दूसरे राज्य में निजी वाहनों को ले जाने में अब कोई दिक्कत नहीं होगी। अभी तक एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने पर नौकरीपेशा वाले लोगों को उस राज्य के आरटीओ दफ्तर में पंजीकरण करवाना पड़ता था, लेकिन अब ये झंझट नहीं रहेगा।
भारत सरकार द्वारा वाहन पंजीकरण के लिए राष्ट्रीय रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था कर दी गई है। अब वाहन धारक अपने वाहनों को ‘बीएच सीरीज’ का नंबर लगा सकेंगे। इस सीरीज के तहत रजिस्ट्रेशन कराने पर वाहन को अलग-अलग राज्यों में ले जाने पर पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर यह नंबर नहीं लिया गया है तो वाहन का पंजीकरण अन्य राज्य के आरटीओ दफ्तर में करवाना पड़ेगा। केंद्रीय सड़क परिवहन और महामार्ग मंत्रालय द्वारा इस बाबत नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।
कमर्शियल गाड़ियों को होगा बड़ा लाभ
इस नई व्यवस्था से कमर्शियल वाहन चालकों को बड़ी सुविधा होगी। जो अलग-अलग राज्यों के बीच व्यापार करते हैं। ‘बीएच सीरीज’ उन्हें देश व्यापारी मान्यता प्रदान करेगा। साथ ही ये व्यवस्था उन निजी वाहन चालकों के लिए भी कारगर साबित होगी जिन्हें दूसरे राज्य में या तो अपना वाहन शिफ्ट करते रहना होता या वे आना जाना लगातार करते रहते हैं। इस पंजीकरण के बाद वाहन को दूसरे राज्यों में जाकर पंजीकरण कराने की जरूरत खत्म हो जाएगी।
क्या है बीएच सीरीज ?
सरकार ने शुरुआत में ही साफ कर दिया है कि बीएच सीरीज पंजीकृत वाहन धारक की मर्जी और विकल्प पर निर्भर करेगा। इसका मतलब है कि ये अनिवार्य नहीं है कि इसे किया ही जाए। भारत सीरीज (बीएच सीरीज) पंजीकरण चिह्न का प्रारूप जो सरकार की ओर से पेश किया गया है वह ‘YY BH #### XX’ होगा। सरकार के मुताबिक ‘YY’ पहले पंजीकरण के वर्ष को दर्शाता है, जबकि ‘BH’ भारत श्रृंखला के लिए कोड होगा। इसी तरह, ‘####’ 0000 से 9999 तक एक रैंडम नंबर होंगे, और ‘XX’ अक्षर (AA से ZZ) के बीच होगा।
केंद्र सरकार की यह पहल बहुत अच्छी है। इससे बाहरी राज्यों से आने वाले व्यवसाइयों को इसका लाभ मिलेगा। साथ ही लोगों को आरटीओ के चक्कर भी नहीं लगाने पड़ेंगे।-नंद किशोर, आरटीओ प्रवर्तन
