आशंका के बीच खुले स्कूल

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Edited By Amrit Vichar
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कोरोना के चलते उत्तर प्रदेश में पिछले सात महीने से बंद प्राइमरी स्कूल बुधवार को खुल गए। सुबह-सुबह बच्चे हंसते-खिलखिलाते पहुंचे। स्कूलों को सजाया गया और शिक्षकों ने बच्चों का उल्लासपूर्ण ढंग से स्वागत किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बच्चों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने शिक्षकों से पठन-पाठन के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा पर भी पूरा …

कोरोना के चलते उत्तर प्रदेश में पिछले सात महीने से बंद प्राइमरी स्कूल बुधवार को खुल गए। सुबह-सुबह बच्चे हंसते-खिलखिलाते पहुंचे। स्कूलों को सजाया गया और शिक्षकों ने बच्चों का उल्लासपूर्ण ढंग से स्वागत किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बच्चों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने शिक्षकों से पठन-पाठन के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा पर भी पूरा ध्यान देने को कहा।

बहरहाल सरकार स्कूलों में कोरोना से बच्चों को सुरक्षित रखने के सभी उपाय करने की बात कह रही है फिर भी बड़ी संख्या में अभिभावकों ने पहले दिन बच्चों को नहीं भेजा। कोरोना की तीसरी लहर की सूचनाओं के बीच वे बच्चों की सुरक्षा को लेकर आशंकित हैं। ऐसी आशंकाएं निर्मूल भी नहीं हैं।

कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच आगरा में चार सितंबर और फिरोजाबाद में छह सितंबर तक एक से आठवीं तक के स्कूल बंद कर दिए गए। फिरोजाबाद में डेंगू और वायरल बुखार का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है जिसमें कई बच्चों की मौत हो चुकी है। राज्यों की बात करें तो हिमाचल प्रदेश ने एक सितंबर से प्राथमिक स्कूल खोलने का निर्णय टाल दिया। अन्य कई राज्य भी पसोपेश में हैं। पंजाब, बिहार, झारखण्ड समेत कई राज्यों में स्कूल खुलने के बाद बच्चों में कोरोना के मामले बढ़े हैं।

बच्चों को स्कूल भेजने से लेकर उनमें कोरोना के खतरे को लेकर अलग-अलग विशेषज्ञों और एजेंसियों की तरफ से इतनी बातें कही जा चुकी हैं कि अभिभावक भी समझ नहीं पा रहे किसे सही मानें और किसे गलत। हालांकि एक बात पर सभी एकराय हैं कि शिक्षा के मामले में बच्चे काफी पिछड़ गए हैं।

बहरहाल स्कूल खुल चुके हैं तो सरकार, प्रशासन, स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों में निरंतर संवाद और संपर्क रहना बेहद जरूरी है। ताकि बच्चों की सुरक्षा पर सामूहिक प्रयास किए जाते रहें। अभिभावक अपनी शंकाएं जाहिर कर सकें और स्कूल प्रबंधन की ओर से उनका निदान होता रहे। छोटे बच्चों के स्कूल में रहने के समय में भी कटौती की जा सकती है। स्कूल बंद होने से बहुत-से बच्चे बहुत-सी चीजें भूल चुके होंगे, क्योंकि हमारी बेसिक लर्निंग लेवल में पहले भी दिक्कतें थीं।

ऐसे में अभी सिर्फ इस बात पर ध्यान दिया जाए कि क्या पढ़ाना है और कैसे पढ़ाना है। पढ़ाई का जो नुकसान हुआ है, उसके लिए निराश होने की जरूरत नहीं हैं। बच्चे हैं, थोड़ा ध्यान देने से वे फिर से पुरानी लय में आ जायेंगे।