बरेली: अब व्यापारी बिना बिल नहीं बेच सकेंगे कीटनाशक, वरना होगा लाइसेंस निरस्त
बरेली, अमृत विचार। नकली कीटनाशक बेचकर किसानों की खून पसीने की कमाई हड़पने का खेल व्यापारी नहीं कर सकेंगे। इस पर रोक लगाने के लिए व्यापारियों को शासन के निर्देश पर कीटनाशनक की ब्रिकी के दौरान किसानों को कैशमेमो (रसीद) अनिवार्य रूप से देना होगा। इसमें कीटनाशी का नाम, बैच नंबर, निर्माण तारीख, अवसान तिथि …
बरेली, अमृत विचार। नकली कीटनाशक बेचकर किसानों की खून पसीने की कमाई हड़पने का खेल व्यापारी नहीं कर सकेंगे। इस पर रोक लगाने के लिए व्यापारियों को शासन के निर्देश पर कीटनाशनक की ब्रिकी के दौरान किसानों को कैशमेमो (रसीद) अनिवार्य रूप से देना होगा। इसमें कीटनाशी का नाम, बैच नंबर, निर्माण तारीख, अवसान तिथि एवं विक्रय मूल्य अंकित करना होगा। ऐसा नहीं करने वाले व्यापारी के खिलाफ कीटनाशी अधिनियम 1968 एवं नियमावली 1971 के तहत कार्रवाई करते हुए लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
जिले की बात करें तो एक हजार के करीब कीटनाशी लाइसेंसधारक व्यापारी हैं। जो करीब छह लाख किसानों को कीटनाशक दवाओं की बिक्री करते हैं। जिला कृषि अधिकारी अर्चना प्रकाश ने बताया कि जनपद में कुछ कीटनाशी व्यापारियों द्वारा नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। उनके इस कृत्य से किसानों को अमानक रसायन बेचे जाने की आशंका रहती है। जिससे फसलों की क्षति होने पर किसानों को मुआवजा भी नहीं मिल पाता। इसलिए जो व्यापारी नियमों का उल्लंघन करते पाया जाएगा, उसके खिलाफ कीटनाशी अधिनियम के तहत कार्रवाई कर दी जाएगी। इसके लिए संबंधित व्यापारी स्वंय जिम्मेदार होंगे।
उधारी के फेर में किसानों को नहीं मिलता बिल
कीटनाशक बेचने वाले दुकानदार उधारी के फेर में किसानों को बिल नहीं देते है। बताया जाता है बड़ी संख्या में किसान आर्थिक तंगी व कुछ अन्य कारणों की वजह से दुकानों से उधार में कीटनाशी खरीदते हैं। इस दौरान उनको बिल की आवश्यक्ता तो होती है, लेकिन उधारी के चक्कर में उनको बिल नहीं दिया जाता। ऐसे में कई बार फसल खराब होने पर किसान खुद को ठगा महसूस करते हुए चाहकर भी कोई कार्रवाई नहीं कर पाते।
