बरेली: हरियाली ट्रांसलोकेट कर देंगे तो कंकरीट के जंगल में कैसे सांस लेंगे शहरवासी

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बरेली, अमृत विचार। डोहरा रोड की तर्ज पर अब लालफाटक से बदायूं रोड पर सड़क किनारे लगे पेड़ों को ट्रांसलोकेट करने की तैयारी है। इससे पहले रेलवे ओवरब्रिज निर्माण के आड़े आ रहे पेड़ों को भी ट्रांसलोकेट किया गया था। मगर अब सवाल यह खड़ा हो रहा कि जहां भी विकास कार्य होगा वहां पेड़ों …

बरेली, अमृत विचार। डोहरा रोड की तर्ज पर अब लालफाटक से बदायूं रोड पर सड़क किनारे लगे पेड़ों को ट्रांसलोकेट करने की तैयारी है। इससे पहले रेलवे ओवरब्रिज निर्माण के आड़े आ रहे पेड़ों को भी ट्रांसलोकेट किया गया था। मगर अब सवाल यह खड़ा हो रहा कि जहां भी विकास कार्य होगा वहां पेड़ों को ट्रांसलोकेट कर शहर के आसपास मौजूद हरियाली को खत्म कर दिया जाएगा। इस तरह कंकरीट के जंगल में इंसान सांस कैसे लेगा इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं। दूसरी तरफ जिन पेड़ों को ट्रांसलोकेट किया जा रहा है उनके जीवित रहने की रहने की संभावना कितने फीसद है यह भी कोई बताने को तैयार नहीं।

बीते दिनों लोक निर्माण विभाग और वन विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त सर्वे किया था। जिसके बाद वन विभाग ने सड़क के किनारे लगे पेड़ों की गणना शुरू की। डोहरा रोड की तर्ज पर यहां भी भारी संख्या में पेड़ों को ट्रांसलोकेट किए जाने की तैयारी है। बदायूं से स्टेट हाईवे तक करीब साढ़े चार किलोमीटर लंबी सड़क के दोनों तरफ काफी संख्या में पेड़ लगे हुए हैं जिनकी संख्या 1200 के आस-पास बताई जा रही है।

सड़क को करीब 26 करोड़ की लागत से फोरलेन बनाया जाना है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सड़क किनारे मौजूद एक हजार से अधिक पेड़ों में करीब 700 पेड़ों को ट्रांसलोकेट किया जा सकता है। इसके अलावा जिन पेड़ों को ट्रांसलोकेट नहीं किया जा सकता उनको काटा जाएगा। इन पेड़ों को कहां ट्रांसलोकेट किया जाएगा इसको लेकर भी अभी स्थिति साफ नहीं है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लोकनिर्माण विभाग द्वारा पेड़ों को ट्रांसलोकेट कराने के लिए जगह उपलब्ध कराई जाएगी।

अधिकारी कहते हैं कि मंझा में अब जगह कम है, लिहाजा वहां अधिक संख्या में पेड़ों को ट्रांसलोकेट करना मुमकिन नहीं होगा। केवल इस रोड पर ही नहीं शहर में कई ऐसी सड़कें हैं जिनका चौड़ीकरण होना प्रस्तावित है। इन सड़कों के किनारों पर पेड़ मौजूद हैं। लोगों को ठंडी छांव देने वाले पेड़ों शहर से हटाकर भले ही दूसरी जगह ट्रांसलोकेट किया जा रहा है, ऐसे में शहर में खुली हवा में सांस लेना कितना मुश्किल होगा समझा जा सकता है।

पेड़ों में फूटी नई कंची, कई पेड़ों को हरियाली का इंतजार
डोहरा रोड से करीब 652 पेड़ों को ग्राम्य वन मंझा में ट्रांसलोकेट किया गया था। वन विभाग का दावा है कि इनमें से करीब 400 पेड़ों में नई कंची आ चुकी है। मगर क्यारा ब्लाक के मंझा ग्राम्य वन में चक रोड किनारे लगे अधिकतर पेड़ सूखने की स्थिति में हैं। जिसकी बड़ी वजह भूमि का रेतीला होना बताया जा रहा है।

वन विभाग को बजट भी लोकनिर्माण विभाग द्वारा ही उपलब्ध कराया जाएगा। एक अनुमानित आंकड़े के मुताबिक प्रति पेड़ को ट्रांसलोकेट करने में 3000 से 3500 हजार रुपये का खर्चा आता है। डोहरा रोड बीडीए के रामगंगा आवासीय योजना को जाने वाली सड़क के चौड़ीकरण के आड़े आ रहे 652 से अधिक छोटे-बड़े पेड़ों को ट्रांसलोकेट किया गया था जिसमें करीब 10 लाख का बजट वन विभाग को मिला था। बाद में विभाग द्वारा छह लाख के अतिरिक्त बजट की मांग की गई थी। वन विभाग और दिल्ली की एक कंपनी ने मिलकर इन पेड़ों को ट्रांसलोकेट किया था।

लालफाटक से बदायूं रोड के पेड़ों को ट्रांसलोकेट किया जाना है। लोकनिर्माण द्वारा इसका बजट और ट्रांसलोकेट कराई जाने वाला जगह उपबल्ध कराई जाएगी। फिलहाल बजट और जगह को लेकर दोनों विभागों के अधिकारियों की बातचीत चल रही है। -वैभव चौधरी, सदर वन रेंजर

संबंधित समाचार