डबल मर्डर मामला: दोषमुक्त हुए अभियुक्तों के खिलाफ वारंट जारी, अधिवक्ता की दलीलों को कोर्ट ने माना
त्रिलोकपुर (बाराबंकी)। जिले के नगर कोतवाली के बड़ेल में चुनावी रंजिश को लेकर 11 साल पहले हुए बहुचर्चित डबल मर्डर मामला फिर से उभरा है। जहां चार साल पहले एडीजे कोर्ट ने सभी 9 आरोपियों को बरी कर दिया था। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अधिवक्ता की मजबूत दलीलों को मान लिया और …
त्रिलोकपुर (बाराबंकी)। जिले के नगर कोतवाली के बड़ेल में चुनावी रंजिश को लेकर 11 साल पहले हुए बहुचर्चित डबल मर्डर मामला फिर से उभरा है। जहां चार साल पहले एडीजे कोर्ट ने सभी 9 आरोपियों को बरी कर दिया था। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अधिवक्ता की मजबूत दलीलों को मान लिया और अभियुक्तों के खिलाफ वारंट जारी करने का आदेश दिया है। इस आदेश के बाद पीड़ित परिवार में इंसाफ की उम्मीद फिर से जगी है।
11 वर्ष पूर्व हुआ था डबल मर्डर…
बता दें कि 25 और 26 सितंबर 2010 की रात नगर कोतवाली के बड़ेल में पंचायत चुनाव में प्रधान और बीडीसी पद पर पर्चा वापसी को लेकर उठे तनाव के बाद ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर दो युवक विवेक मिश्रा 28 और जयवीर सिंह 23 की हत्या कर दी गई थी। मामले में मृतक के पिता राजेन्द्र मिश्रा ने 8 लोगों पर जिसमें, बलराम सिंह उर्फ दाऊ, राजेश प्रताप सिंह ‘राजू प्रधान’ पुष्पेंद्र सिंह, तरुण सिंह, मनोज सिंह बुन्देल, रघुवेन्द्र सिंह मिंटू, ज्ञानेंद्र सिंह पिंटू, चंद्रशेखर उर्फ गुड्डू, मोहन सिंह को नामजद मुकदमा दर्ज करवाया था।
इस मामले की पैरवी कर रहे हाईकोर्ट के सीनियर अधिवक्ता फारूक अय्यूब ने बताया कि 7 साल तक चली सुनवाई के बाद एडीजे (1) कोर्ट ने 25 अप्रैल 2017 को सभी 9 आरोपियों को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया था। इस फैसले से वादी राजेन्द्र मिश्रा हताश नहीं हुए और एडीजे कोर्ट के फैसले के खिलाफ पीड़ित वादी अपने वरिष्ठ एडवोकेट फारूक अय्यूब के जरिए हाईकोर्ट में अपील दायर कर दी।
कोर्ट ने अधिवक्ता की दलीलों को स्वीकारा…
आवेदक के उच्च न्यायालय अधिवक्ता फारूक अय्यूब ने बताया कि उन्होंने अपनी दलीलों को मजबूती से रखते हुए इस बात को हिट किया था कि यह दोहरे हत्याकांड का मामला है। आवेदक घटना का एकमात्र चश्मदीद गवाह है। आवेदक के बेटे (मृतक) को 8 गोलियां लगी थीं, जबकि उसके दोस्त, जो कि दूसरा मृतक है, को 5 गोली लगी थी। साथ ही वकील ने अपनी दलील में कहा कि एडीजे न्यायालय बाराबंकी ने अभिलेख पर साक्ष्य को गलत तरीके से पढ़ा है। तब हाईकोर्ट ने आर्डर देते हुए कहा है कि 28 सितंबर को सभी आरोपी संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित हो और संबंधित अदालत की संतुष्टि के लिए व्यक्तिगत बांड और जमानत प्रस्तुत करें। वहीं, मामले की अगली सुनवाई की तारीख 6 अक्टूबर 2021 को निर्धारित किया गया है।
