रायबरेली: घर में घुसा मगरमच्छ, ग्रामीणों ने पकड़कर किया अधमरा…
रायबरेली। कोतवाली क्षेत्र के डीह रजबहा से लगे चंदापुर क्षेत्र के गांवों में पिछले 10 दिनों से दहशत का पर्याय बना मगरमच्छ देर रात भोजन की तलाश में रजबहा से लगे एक घर में घुस गया। इससे पूरे गांव में हड़कंप मच गया। कुत्ते की भौंकने की आवाज सुनकर जागे गृहस्वामी ने शोरगुल मचाया। यह …
रायबरेली। कोतवाली क्षेत्र के डीह रजबहा से लगे चंदापुर क्षेत्र के गांवों में पिछले 10 दिनों से दहशत का पर्याय बना मगरमच्छ देर रात भोजन की तलाश में रजबहा से लगे एक घर में घुस गया। इससे पूरे गांव में हड़कंप मच गया। कुत्ते की भौंकने की आवाज सुनकर जागे गृहस्वामी ने शोरगुल मचाया। यह सुनकर धान के खेत की तरफ भागे मगरमच्छ को ग्रामीणों ने रस्सी के सहारे पकड़ा और पीटकर अधमरा कर दिया। ग्रामीणों की सूचना पर बुधवार की सुबह मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम मगरमच्छ को अधमरी हालत में साथ लेकर गई है।
बताते चलें कि क्षेत्र के डीह रजबहा में चंदापुर क्षेत्र के गांवों के आस-पास पिछले 10 दिनों से मगरमच्छ लगातार देखा जा रहा है। जिसकी सूचना ग्रामीणों ने वन विभाग सहित उच्चाधिकारियों को भी दी। चार दिन पूर्व मगरमच्छ ने आलिमगंज मजरे ज्यौना गांव के पास नहर की पटरी से एक सूकर को भी अपना निवाला बनाया था। जिसकी शिकायत ग्रामीणों ने चंदापुर भ्रमण के दौरान जिले की नोडल अधिकारी कंचन वर्मा और सीडीओ ईशा प्रिया से भी की लेकिन मगरमच्छ को पकड़ने का किसी भी तरह का प्रयास नहीं किया गया।
मंगलवार को रजबहा में पानी कम होने और भूख से परेशान मगरमच्छ ने पूरे जुड़ई मजरे चंदापुर गांव में रामसजीवन यादव के घर में घुस गया। खूंटे से बंधी छोटी पड़िया को मगरमच्छ निशाना बनाने जा रहा था। तभी कुत्ते की भौंकने की आवाज से राम सजीवन की नींद खुल गई और सामने विशालकाय मगरमच्छ को देखते ही उनके होश उड़ गए। उन्होंने शोरगुल मचाना शुरू कर दिया।
शोरगुल सुनकर मगरमच्छ बगल में लगे धान के खेत की तरफ भागा तब तक इकट्ठा हुए ग्रामीणों ने लाठियों से मगरमच्छ को पीटना शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने रस्सी के फंदे के सहारे मगरमच्छ को पकड़ने में कामयाबी पाई। तब तक ग्रामीणों की पिटाई से मगरमच्छ अधमरा हो गया था। ग्रामीणों की सूचना पर बुधवार की सुबह मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम मगरमच्छ को अधमरी अवस्था में ले गई। ग्रामीणों ने रजबहा में और भी मगरमच्छ होने की शंका जाहिर की है। ऐसे में रजबहा में पानी न होने से भोजन की तलाश में मगरमच्छ गांवों का रुख कर सकते हैं जिससे बड़ी अनहोनी की संभावना भी बनी हुई है।
