रायबरेली: मगरमच्छ की मौत के बाद ग्रामीणों पर आई आफत, 22 के खिलाफ केस दर्ज
रायबरेली। दस दिन से लगातार मगरमच्छ के कारण ग्रामीण दहशत में रहे। वहीं मगरमच्छ को पकड़ने की गुहार लगाई गई लेकिन वन विभाग सोता रहा, जब मगरमच्छ घर में घुस गया तो खुद के बचाव को लेकर ग्रामीणों ने उसे पीट-पीटकर अधमरा कर दिया। जिससे बुधवार को उसकी मौत हो गई। मगरमच्छ की मौत के …
रायबरेली। दस दिन से लगातार मगरमच्छ के कारण ग्रामीण दहशत में रहे। वहीं मगरमच्छ को पकड़ने की गुहार लगाई गई लेकिन वन विभाग सोता रहा, जब मगरमच्छ घर में घुस गया तो खुद के बचाव को लेकर ग्रामीणों ने उसे पीट-पीटकर अधमरा कर दिया। जिससे बुधवार को उसकी मौत हो गई। मगरमच्छ की मौत के बाद खुद की अनदेखी को छिपाने के लिए वन विभाग ने 22 ग्रामीणों पर गैर जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज कर अपना कालर साफ कर लिया है। इस कार्रवाई से ग्रामीणों में रोष है।
बताते चले की मंगलवार की देर रात नहर से निकल मगरमच्छ ने पूरे जुड़ई मजरे चंदापुर गांव के रामसजीवन के घर पडीया क़ो निशाना बना दिया, कोलाहल सुन जगने पर घर मालिक ने मगरमच्छ क़ो अपने सामने पाया। जिस पर शोर मचाने पर मगरमच्छ धान के खेत में घुस गया। इस बीच कही सुनवाई ना होने एवं जान पर बन आई देख ग्रामीणों ने मगरमच्छ को अधमरा कर वनविभाग को सुपुर्द कर दिया। जिसकी बुधवार को लखनऊ ले जाते समय मौत हो गयी।
मौत से हरकत में आए वनविभाग ने अपनी निद्रा तोड़ वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम क़ी धारा 9/51 के तहत (गैर जमानती) ग्रामीणों पर मुकदमा दर्ज कर दिया। जिसकी विवेचना एसीएफ पद रिक्त होने पर डीएफओ सुरेश चंद्र पाण्डेय द्वारा क़ी जा रही। सवाल तो इस बात का हैं क़ी यदि इतनी ही तत्परता विभागीय अधिकारी पकड़ने में दिखाते तो भय के साए तले जी रहे ग्रामीणों क़ो मगरमच्छ क़ो मारने क़ी नौबत ही ना आती।
मामले में आक्रोशित ग्रामीणों का कहना हैं की नोडल अधिकारी, सीडीओ, एसडीएम सहित वन विभाग के सभी अधिकारियों को डीह रजबहे में मगरमच्छ होने क़ी जानकारी दी गयी लेकिन वन विभाग द्वारा कोई कदम नहीं उठाया गया। वन विभाग की इस कार्यवाही को अपनी लापरवाही छुपा, तोहमत ग्रामीणों के सिर मढ़ने के नजरिए से देखा जा रही, जिसकी क्षेत्र में कड़ी आलोचना हो रही। फिलहाल वनविभाग की इस कार्यवाही को लेकर लोगो में उबाल नजर आ रहा है।
