बरेली: स्कूली बच्चों का टीकाकरण नहीं है जरूरी
बरेली, अमृत विचार। अभिभावक, शिक्षक समेत समस्त कर्मचारियों का टीकाकरण पूरा होने की स्थिति में बच्चों का टीकाकरण आवश्यक नहीं है। इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) ने गाइडलाइन जारी कर यह स्पष्ट किया है। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए आईएपी ने एडवाइजरी जारी की है। जारी गाइडलाइंस के मुताबिक कोरोना की …
बरेली, अमृत विचार। अभिभावक, शिक्षक समेत समस्त कर्मचारियों का टीकाकरण पूरा होने की स्थिति में बच्चों का टीकाकरण आवश्यक नहीं है। इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) ने गाइडलाइन जारी कर यह स्पष्ट किया है। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए आईएपी ने एडवाइजरी जारी की है। जारी गाइडलाइंस के मुताबिक कोरोना की तीसरी लहर में जरूरी नहीं यह बच्चों को ज्यादा प्रभावित करे।
रिपोर्ट के आधार पर स्पष्ट किया गया है कि अभी तक पहली और दूसरी लहर में गंभीर रूप से संक्रमित बच्चों को भी आईसीयू की जरूरत नहीं पड़ी थी। बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता काफी मजबूत होती है। हालांकि कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले बच्चे संक्रमित हो सकते हैं। ऐसे में स्कूली बच्चों में वैक्सीनेशन की आवश्यकता नहीं है।

आईएपी की जारी एडवाइजरी के अनुसार 2 से 5 साल तक के बच्चों को बकायदा मास्क पहनने का प्रशिक्षण और स्कूली बच्चों को पर्याप्त दूरी बना कर रहने के लिए भी जागरूक करना जरूरी है। इसके अलावा बेहद आवश्यक है कि हर 15 दिनों में स्कूलों की समीक्षा की जाए और आरटीपीसीआर जांच आदि को जारी रखना चाहिए। स्कूली बच्चों में कोविड की आशंका पर स्कूल भेजने से पहले शिक्षक सहित पूरे स्कूल स्टाफ का टीकाकरण हो।
इसके अलावा अभिभावकों का भी वैक्सीनेशन हो गया हो। वहीं ब्लड प्रेशर, शुगर और हृदय संबंधित गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों को पहले वैक्सीनेशन कराने की सलाह दी गई है। आईएपी की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को देखते हुए स्कूलों में पर्याप्त गाइडलाइन का पालन कराया जाए। वैक्सीनेशन की दर में तेजी और आरटीपीसीआर जांच के दौरान कोरोना संक्रमितों में कमी होने पर स्कूलों को खोलने के लिए कहा गया है।
आईएपी की रिपोर्ट के मुताबिक 2 से 5 साल तक के बच्चों में कोरोना संक्रमण की संभावना काफी कम है। बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता की कमी होने पर ही कोविड का असर हो सकता है। क्योंकि अभी तक कोविड संक्रमित बच्चों में एसिप्टोमेटिक लक्षण ही पाए गए हैं। – डा. अतुल अग्रवाल, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ
