वाराणसी: लोलार्क छठ पर कोरोना का ग्रहण, कुंड में स्नान पर लगी रोक
वाराणसी। देश की सांस्कृतिक राजधानी काशी के ऐतिहासिक लोलार्क कुंड मेले पर कोरोना का ग्रहण लग गया है। मंदिर प्रबंधन से बातचीत के बाद जिला प्रशासन ने लोलार्क छठ पर होने वाले स्नान और मेले पर रोक लगा दी है। बता दें कि हर साल लोकर्क छठ पर संतान प्राप्ति की कामना लिए लाखों दंपति …
वाराणसी। देश की सांस्कृतिक राजधानी काशी के ऐतिहासिक लोलार्क कुंड मेले पर कोरोना का ग्रहण लग गया है। मंदिर प्रबंधन से बातचीत के बाद जिला प्रशासन ने लोलार्क छठ पर होने वाले स्नान और मेले पर रोक लगा दी है।
बता दें कि हर साल लोकर्क छठ पर संतान प्राप्ति की कामना लिए लाखों दंपति लोकर्क कुंड आते हैं और यहां स्नान करते हैं।
प्रधान पुजारी रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि लोलार्क छठ पर होने वाले लाखों की भीड़ को देखते हुए पिछले साल की तरह इस साल भी मेले का आयोजन रद्द किया गया है। क्योंकि भीड़ को इस संकट के दौर के बीच इस कुंड में स्नान करा पाना मुश्किल है।
ये है मान्यता
मंदिर के प्रधान पुजारी रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि ये स्थान भगवान सूर्य का तपोस्थली है। यहां भगवान सूर्य के रथ का पहिया गिरा था, जिससे कुंड का निर्माण हुआ है। फिर भगवान सूर्य ने हजारों वर्ष तपस्या कर यहां शिवलिंग की स्थापना की, जो भी दंपति इस कुंड में स्नान कर भगवान शंकर का अभिषेक करता है उसे संतान की प्राप्ति होती है।
स्नान के बाद फल करते है दान
वहीं के रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि कुंड में स्नान के बाद दंपति इस कुंड में फल दान कर भगवान सूर्य से संतान प्राप्ति की कामना करती है। स्नान के बाद दम्पति जो भी फल कुंड में दान करती है, आजीवन उस फल का सेवन नहीं करती।
