अलीगढ़: एक दिवसीय दौरे पर PM मोदी, राजा महेंद्र प्रताप सिंह यूनिवर्सिटी की रखी आधारशिला

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Edited By Amrit Vichar
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अलीगढ़। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को अलीगढ़ पहुंचे हैं। यहां पीएम ने अलीगढ़ में राजा महेंद्र प्रताप सिंह स्टेट यूनिवर्सिटी की आधारशिला रखी। इस दौरान पीएम ने यहां पर यूनिवर्सिटी के मॉडल का जायजा लिया। साथ ही कॉरिडोर को लेकर दी गई जानकारियों को देखा। अलीगढ़ में बनने वाली ये यूनिवर्सिटी 92 एकड़ में फैली …

अलीगढ़। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को अलीगढ़ पहुंचे हैं। यहां पीएम ने अलीगढ़ में राजा महेंद्र प्रताप सिंह स्टेट यूनिवर्सिटी की आधारशिला रखी। इस दौरान पीएम ने यहां पर यूनिवर्सिटी के मॉडल का जायजा लिया। साथ ही कॉरिडोर को लेकर दी गई जानकारियों को देखा। अलीगढ़ में बनने वाली ये यूनिवर्सिटी 92 एकड़ में फैली होगी, जबकि 395 कॉलेज इसके अंतर्गत आएंगे।

वहीं, डिफेंस कॉरिडोर का ऐलान खुद पीएम मोदी ने 2018 में किया था। अलीगढ़ के डिफेंस कॉरिडोर में 19 कंपनियां निवेश करेंगी, जिसमें करीब 1300 करोड़ का निवेश होगा। पीएम मोदी ने भी इस मौके पर सभी का अभिनंदन किया। इस दौरान यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, यूपी सीएम योगी भी मौजूद रहे। अलीगढ़ में पीएम मोदी ने कहा कि आज का दिन पश्चिमी यूपी के लिए बहुत बड़ा दिन है। हमारा संस्कार है कि जब कोई शुभ कार्य हो तो हमें अपने बड़े याद आते हैं।

मैं आज धरती के महान सपूत स्व. कल्याण सिंह जी की अनुपस्थिति महसूस कर रहा हूं। आज कल्याण सिंह हमारे साथ तो यूनिवर्सिटी और डिफेंस कॉरिडोर देखकर बहुत खुश होते। पीएम मोदी ने कहा कि यह देश का दुर्भाग्य रहा कि राष्ट्रनायकों-राष्ट्रनायिकाओं की तपस्या से देश की अगली पीढ़ियों से परिचित ही नहीं कराया गया। 20वीं सदी की उन गलतियों को 21वीं सदी का भारत सुधार रहा है।
बता दें कि राजा महेंद्र प्रताप विश्वविद्यालय अलीगढ़ की कोल तहसील के लोढ़ा और मूसेपुर करीम जरौली गांव की 92 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में बनाया जाएगा। जिसे अलीगढ़ मंडल के 395 महाविद्यालयों को इससे संबंद्ध किया जाएगा।

कौन थे राजा महेंद्र प्रताप सिंह…

देश के दो बड़े विश्वविद्यालयों के ‘नींव की ईंट’ की तुलना करें तो अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, दोनों की स्थापना में क्षेत्रीय राजाओं ने भूमि दान की थी।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के संस्थापक सर सैय्यद अहमद खान ने भूमि दान देने वाले राजा महेंद्र प्रताप सिंह को भुला दिया। जबकि पंडित मदन मोहन मालवीय ने काशी नरेश के योगदान को सदैव सिर-माथे पर रखा।

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