बरेली: काउंसलिंग कर बच्चों का भविष्य संवार रहीं शिक्षिका

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बरेली, अमृत विचार। बच्चे देश का भविष्य हैं लेकिन उनकी प्रतिभा को निखारना भी जरूरी है। इस बात को समझने वाली कांधरपुर स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका शबीना परवीन बखूबी इस दिशा में समर्पित होकर बच्चों की जिंदगी में शिक्षा का रंग भरने में लगी हुई हैं। शुरूआती दिनों से ही बच्चों को शिक्षित …

बरेली, अमृत विचार। बच्चे देश का भविष्य हैं लेकिन उनकी प्रतिभा को निखारना भी जरूरी है। इस बात को समझने वाली कांधरपुर स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका शबीना परवीन बखूबी इस दिशा में समर्पित होकर बच्चों की जिंदगी में शिक्षा का रंग भरने में लगी हुई हैं। शुरूआती दिनों से ही बच्चों को शिक्षित करने के काम में लगी रहने वाली शिक्षिका के समर्पण भाव और अनेक रचनात्मक तरीकों से शिक्षण कार्य कराने के लिए वह राष्ट्रपति पुरस्कार सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित हो चुकी हैं। अंग्रेजी पैटर्न पर आधारित स्कूल में शिक्षण व्यवस्था को देख अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए अभिभावकों का तांता लगा रहता है।

कोरोना काल में ग्रुप के जरिए दी बच्चों को शिक्षा
प्रधानाध्यापिका शबीना ने बताया की कोरोना काल में स्कूलों के बंद होने पर बच्चों को पढ़ाने के लिए अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों को व्हाटस्अप ग्रुप के माध्यम से रोजाना शिक्षण कार्य पूरा कराती रहीं। बच्चों की सुविधा को देखते हुए उन्होंने कक्षा 6 से 8 तक के लिए कई ग्रुप का संचालन किया। बल्कि इन ग्रुपों पर वर्तमान के दिनों में भी जो बच्चे स्कूल नही पहुंच पा रहे हैं उनके लिए शिक्षण सामग्री दी जा रही है।

सिर्फ दो साल में 350 के पार पहुंची छात्र संख्या
स्कूल में शिक्षकों के समर्पण भाव के कारण अब क्षेत्र के ही नहीं बल्कि आस पास के गांव के लोग भी इस विद्यालय में अपने बच्चों का दाखिला कराने के लिए उत्सुक हैं। विद्यालय में फिलहाल 360 से भी ज्यादा बच्चे पढ़ रहे हैं, जबकि वर्ष 2019 तक सिर्फ 234 बच्चे ही स्कूल में पढ़ते थे। विद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया जारी है और रोजाना 25-30 अभिभावक बच्चों का प्रवेश कराने के लिए पहुंच रहे हैं।

काउंसलिंग के जरिए बच्चों को कर रहीं जागरूक
पढ़ाई के प्रति बच्चों में रूचि पैदा करने के लिए स्कूल में उनकी काउंसलिंग की जाती है। खास तौर से जो बच्चे किसी कारण से पढ़ना नहीं चाहते, उनमें खेल या उनके पसंदीदा तरीकों से शिक्षा दी जाती है। बताया कि कई बच्चे जो घर में या अपने सहयोगियों के बीच उपेक्षित रहते हैं, ऐसे कई बच्चों की काउंसलिंग कर शिक्षा की व्यवस्था भी स्कूल में बनाई गई है।

बच्चों को पढ़ाने और लीक से हट के कुछ करने की इच्छा शुरू से ही रही है। मेरा घर, मेरा विद्यालय की धारणा के साथ बच्चों को पढ़ाया जाता है। इस कार्य को सभी शिक्षक सहयोगियों के सहयोग से ही संभव करने का प्रयास किया जा रहा है। -शबीना परवीन, प्रधानाध्यापिका, पू़र्व माध्यमिक विद्यालय, कांधरपुर

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