​यूपी: बेसिक शिक्षा परिषद में फर्जी नियुक्ति कराने वाले गैंग की बहुत गहरी हैं जड़ें

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Edited By Amrit Vichar
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लखनऊ। बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित प्राथमिक विद्यालयों में फर्जी शिक्षकों को तैनाती कराये जाने का खेल कोई नया नही है। हर बार निकली शिक्षक भर्ती में फर्जी तरह से नियुक्ति कराने वाले गैंग सक्रिय रहे हैं, विभाग में इनकी जड़े इतनी गहरी हैं कि जिसकी तह तक जाना आसान नहीं होता है। …

लखनऊ। बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित प्राथमिक विद्यालयों में फर्जी शिक्षकों को तैनाती कराये जाने का खेल कोई नया नही है। हर बार निकली शिक्षक भर्ती में फर्जी तरह से नियुक्ति कराने वाले गैंग सक्रिय रहे हैं, विभाग में इनकी जड़े इतनी गहरी हैं कि जिसकी तह तक जाना आसान नहीं होता है। यहां तक विभाग के उच्च अधिकारियों तक नहीं पता होता है कि उनके ही साथ काम करने वाले कर्मचारियों की भी मिलीभगत रहती है।

शुक्रवार को एसटीएफ ने जिस गिरोह का भंडाफोड़ किया, उसका सीधे संपर्क परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय से था। यहां तैनात लिपिक की भी भूमिका की जांच करायी जा रही है, हालांकि एसटीएफ की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने लिपिक का नाम भी लिया था। जिसके बाद शनिवार को दिन लखनऊ निदेशालय से लेकर प्रयागराज मुख्यालय तक इस बात की चर्चा होती रही कि अगर परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के लोग ही ऐसा काम करने लगे तब तो फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति रोक पाना संभव नहीं होगा।

तो प्रदर्शन कर रहे अभ्य​र्थी अपनी जगह सही!

मौजूदा सरकार में 69 हजार और 68 हजार शिक्षक भर्ती में लगातार दावा किया जाता है कि सारी भर्तियां साफ सुथरा हुई हैं। लेकिन शुक्रवार को आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जो खुलासा हुआ है उससे दोनो ही भर्तियों पर सवाल उठे हैं, बता दें कि भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायतों को लेकर पिछले 95 दिनों से लगातार धरना प्रदर्शन भी जारी है।

ढाई हजार शिक्षकों की जांच हवा हवाई

2020 में तत्कालीन अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार बेसिक की ओर से करीब ढाई हजार फर्जी शिक्षकों की जांच एसटीएफ को सौंपी गयी थी। वहीं सूत्रों का कहना है कि एसटीएफ को जांच के लिए पत्र भेजने का दावा तो किया गया था लेकिन वह पत्र आज तक पहुंचा है।

विश्वविद्यालयों से हो रही लापरवाही

वहीं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि बीएड व स्नातक में सार्टिफिकेट के सत्यापन में विश्वविद्यालयों का अहम रोल होता है, लेकिन सत्यापन भेजे जाने के बाद भी विश्वविद्यालयों की ओर से जल्दी—जल्दी जवाब नहीं दिया जाता है, ऐसे में सत्यापन प्रक्रिया पूरी कराने में बड़ी देरी हो रही है।

मुख्यमंत्री के आदेश का भी नहीं हुआ सही पालन

पिछले साल फर्जी शिक्षकों का मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक तरफ से शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों को की जांच के आदेश दिए थे। लेकिन शिक्षकों के अभिलेख की कॉपी तो जमा करायी गयी है लेकिन उन्हें संबंधित संस्थानों को नहीं भेजा गया है।

बर्खास्त शिक्षकों ने खाया नौ अरब रूपए

जिलों में फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी कर चुके शिक्षकों ने करोड़ों का बजट लेकर फरार हो गये। शिक्षको के बर्खास्तगी होने के बाद वेतन रिकवर करने में समस्याएं आ रही है। योगी सरकार ने 1700 से अधिक शिक्षकों को बर्खास्त किया, लेकिन इनके खाते में करीब 900 करोड़ रुपये गया है जिसकी वसूली विभाग के लिए गली की हड्डी बना हुआ है।

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