लखीमपुर-खीरी: कभी था बौद्धिक गतिविधियों का केंद्र, अब बदहाली का शिकार है जिला पुस्तकालय
अमृतविचार, लखीमपुर-खीरी। जिले में कभी बौद्धिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में पहचान बनाने वाला जिला पुस्तकालय उपेक्षा के चलते बदहाली का शिकार हो गया। यहां हजारों किताबें धूल फांक रही है। अब यहां विद्यार्थियों और पाठकों का जमावड़ा नहीं लगता। स्टाफ के अभाव में सामने का पार्क अब झाड़ झंकाड़ में बदल गया। नौकरी …
अमृतविचार, लखीमपुर-खीरी। जिले में कभी बौद्धिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में पहचान बनाने वाला जिला पुस्तकालय उपेक्षा के चलते बदहाली का शिकार हो गया। यहां हजारों किताबें धूल फांक रही है। अब यहां विद्यार्थियों और पाठकों का जमावड़ा नहीं लगता। स्टाफ के अभाव में सामने का पार्क अब झाड़ झंकाड़ में बदल गया। नौकरी आदि की तैयारी करने वाले सैकड़ें विद्यार्थी अब निराश है। पीने के पानी का सिस्टम भी पिछले करीब छह महीने से खराब है। लोगों को फिर से इसके दिन बहुरने की उम्मीद है।
शहर का राजकीय जिला पुस्तकालय जहां जिले के बौद्धिक केंद्र के रूप मे अपनी पहचान बनाए था। यहां करीब 40 हजार से अधिक किताबों का संग्रह है और करीब 2200 रजिस्टर्ड पाठक थे। जो समय-समय पर यहां से अपनी पसंद की पुस्कतें ले जाते थे और पढ़ने के बाद उन्हें वापस कर जाते थे। इसके अलावा तमाम ऐसे पाठक भी थे जो यहीं घंटो तक बैठकर अपनी मर्जी की किताबें पढ़ते थे। करीब दो वर्ष पूर्व तत्कालीन पुस्तकालय अध्यक्ष संजय साह के समय यहां विभिन्न विषयों पर बौद्धिक चर्चाओं और विचार गोष्ठियों के आयोजन किए जाते थे। उनमें शहर के तमाम बुद्धिजीवी पहुंचकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विषयों पर चर्चा करते थे।
इसका सीधा असर उन विद्यार्थियों की मानसिकता पर पड़ता था जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते थे। इतना ही नहीं कई बार यहां प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष शिविरों के आयोजन किए गए लेकिन समय के साथ संजय साह का स्थानांतरण हो गया। इसके बाद मनोज कुमार पांडे इसका संचालन उसी तरह से करते रहे लेकिन उनका भी अटैचमंेट राजकीय इंटर कालेज में हो गया।
इसके बाद यहां कोई स्टाफ नहीं बचा औपचारिकता के लिए उन्हें कुछ समय के लिए यहां से जोड़ा गया लेकिन बदहाली के चलते यह व्यवस्था भी सुचारू नहीं रह पाई। अब यहां स्वीपर भी नहीं है। लाइब्रेरी की सफाई करने वाला कोई नहीं है। सामने पार्क भी देखरेख के अभाव में झाड़ झंकाड़ में तब्दील हो गया। अब महीनों पुस्तकालय में झाड़ू नहीं लग पाता।
शासन के आदेश के बावजूद नहीं मिला होमगार्ड
जिला पुस्तकाल में सुरक्षा के लिए शासन ने एक होमगार्ड के लिए आदेश किए थे लेकिन यहां होमगार्ड भी नहीं रखा गया। यदि होमगार्ड होता तो वही गेट खोल देता और थोड़ी बहुत देखभाल भी कर लेता लेकिन इसके लिए भी प्रयास नहीं किए गए।
22 विस्तार पटल थे सभी बंद
लोगों को पुस्तकों से जोड़ने के लिए जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 22 विस्तार पटल की स्थापना की गई थी। गांवों में इससे पाठक भी जुड़ने लगे थे। इसमें आउट सोर्सिंग से स्टाफ की तैनाती की गई थी लेकिन जुलाई 2017 के बाद से उनका रिनीवल भी नहीं हो पाया। तभी से सभी विस्तार पटल बंद हैं। यहां भी किताबें धूल फांक रही है।
स्टाफ के बारे में बताया गया है शासन को
स्टाफ के बारे में शासन को बराबर बताया जाता है। व्यवस्था चलती रहे इसके लिए मनोजकुुमार पांडे को यहां जोड़ा गया है लाइब्रेरी खुलती है। स्वीपर आदि की व्यवस्था कराई जाएगी। प्रयास किया जाएगा कि लाइब्रेरी की बेहतर सुविधाएं लोगों को मिलें। -डा. ओपी त्रिपाठी, डीआईओएस
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