बरेली: बायो डीजल पर राहत से जनता पर नहीं पड़ेगा कोई असर
बरेली, अमृत विचार। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से हर कोई परेशान है। इधर विधानसभा चुनाव नजदीक होने की वजह से पिछले कई दिनों से कयास लगाए जा रहे थे कि जीएसटी काउंसिल की बैठक में सरकार कुछ राहत देगी लेकिन लोगों को मायूसी ही हाथ लगी। जीएसटी काउंसिल ने साफ कर दिया कि पेट्रोल और …
बरेली, अमृत विचार। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से हर कोई परेशान है। इधर विधानसभा चुनाव नजदीक होने की वजह से पिछले कई दिनों से कयास लगाए जा रहे थे कि जीएसटी काउंसिल की बैठक में सरकार कुछ राहत देगी लेकिन लोगों को मायूसी ही हाथ लगी। जीएसटी काउंसिल ने साफ कर दिया कि पेट्रोल और डीजल जीएसटी के दायरे में नहीं लाए जाएंगे। बॉयो डीजल पर जीएसटी दर 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने की बात कही गई। बायो डीजल में जीएसटी कटौती का डीजल खरीदने वालों पर क्या असर होगा। इसको लेकर जब लोगों से बात की गई तो कुछेक को छोड़कर अधिकांश नाखुश दिखे।
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि बायो डीजल की जगह सरकार अगर पेट्रोल और डीजल को जीएसटी दायरे में लाती है तो काफी हद तक महंगाई पर लगाम लग सकती है। उद्यमियों ने एमएसई सेक्टर के लिहाज से इसे अपर्याप्त बताया। कहा कि सरकार को उद्योग क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों को ध्यान में रखना चाहिए था। बायो डीजल की खपत नाममात्र ही है। आम लोगों ने भी महंगाई पर नियंत्रण के लिए पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की बात कही।
बायो डीजल की उपयोगिता जरूरत के हिसाब से वैसे तो कई मायने में ठीक है। लेकिन एमएसएमई सेक्टर के लिहाज से देखा जाए तो इस पर टैक्स कम करने का कोई खास लाभ उद्यमियों को नहीं मिलने वाला है। जिन राज्यों में इसकी खपत है सिर्फ वहीं के लोग इसका फायदा उठा सकेंगे। – दिनेश गोयल, उद्यमी
पहले डीजल का उपयोग एमएसएमई सेक्टर में काफी होता है। उस समय बड़े-बड़े जनरेटर में बॉयो डीजल की जरूरत पड़ती थी। लेकिन, वर्तमान में बिजली व्यवस्था काफी हद तक ठीक होने की वजह से इसका उपयोग नहीं बचा है। सभी सरकारों के अपने-अपने हित जुड़े हैं इसलिए पेट्रोल-डीजल पर कोई राहत नहीं मिलने वाली है। – आशुतोष शर्मा, उद्यमी
जिले में बायो डीजल का कोई पंप नहीं है इसलिए इस पर टैक्स कम करने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में आना अति अवश्यक है। लेकिन प्रदेश की सरकारें सिर्फ अपना खजाना भरने में लगी हैं। जनता से इनका कोई सरोकार नहीं है। – शोभित सक्सेना, ट्रांसपोर्टर
पेट्रोल व डीजल पर टैक्स कम कर इसे तत्काल प्रभाव से जीएसटी के दायरे में सरकार को लाना चाहिए था। इस वक्त पेट्रोल व डीजल की बेस प्राइस भी कम है। लेकिन उस पर केंद्र व प्रदेश सरकार का टैक्स काफी ज्यादा है, जो जनता की जेबों पर सीधे तौर पर डाका डालने वाली बात है। – शुजा खान, कारोबारी
बायो डीजल पर टैक्स कम करने से किसी वर्ग को कोई फायदा नहीं होने वाला है। पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ी है। जीएसटी लागू करते समय कहा था कि एक देश एक टैक्स पूरे देश में होगा। मगर देश तो एक है पर टैक्स की दरें कई प्रकार की हैं इसलिए सरकार को पेट्रोल-डीजल जीएसटी के दायरे में लाना चाहिए। – रवि प्रकाश, उद्यमी
बॉयोडीजल पर पहले पांच फीसदी टैक्स था, जिसे बढ़ाकर 12 फीसदी कर दिया गया था। इसके बाद फिर से से टैक्स कम करने को लेकर लंबे समय से मांग की जा रही थी, जिसे सरकार ने मान लिया है। बॉयोडीजल पर टैक्स कम होने से फायदा यह होगा कि लोग टैक्स चोरी करने से बचेंगे। जनता को भी इसके कई फायदे होने वाले हैं। – दिनेश सोलंकी, संचालक, ग्रीन इनर्जी प्लांट
नगर निगम
- बोर्ड में प्रस्ताव पास, पांच सौ की जगह सौ रुपये लिए जाएंगे
- हर माह 100 रुपये का जुर्माने का प्रावधान भी किया समाप्त
