दो हादसों से फ्रेट कॉरिडोर की गुणवत्ता व तकनीक पर उठे सवाल

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संजय सिंह, अमृत विचार। एक महीने के भीतर हुए दो हादसों ने बहुप्रचारित डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की गुणवत्ता, तकनीक व सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी के साथ यह प्रश्न भी किया जाने लगा है कि इस संगठन को रेलवे से अलग रखा जाना कहां तक उचित है। पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के भाऊपुर-खुर्जा …

संजय सिंह, अमृत विचार। एक महीने के भीतर हुए दो हादसों ने बहुप्रचारित डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की गुणवत्ता, तकनीक व सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी के साथ यह प्रश्न भी किया जाने लगा है कि इस संगठन को रेलवे से अलग रखा जाना कहां तक उचित है।

पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के भाऊपुर-खुर्जा सेक्शन को चालू हुए अभी एक साल भी नहीं हुए हैं। लेकिन इतनी कम अवधि में ही इस पर दो दुर्घटनाएं एक महीने के भीतर हो गई हैं। पहला हादसा पिछले महीने 30 अगस्त को हुआ था। जबकि दूसरा अभी सोमवार 20 सितंबर को हुआ है। पहले हादसे में मालगाड़ी के डिब्बे पलटने से केवल माल व रेल संपत्तियों का नुकसान हुआ था।

कोई मौत नहीं हुई थी। लेकिन सोमवार को हर दूसरे हादसे में माल व रेल संपत्ति के नुकसान के साथ-साथ एक बच्चे की मौत हुई है जबकि दो लोग घायल भी हुए हैं। भारतीय रेल यातायात के इतिहास में संभवतः यह पहला मौका है जब किसी मालगाड़ी के पलटने से किसी आम आदमी की मौत हुई हो। वरना ऐसी स्थितियां केवल यात्री ट्रेन दुर्घटनाओं में देखने को मिलती हैं।

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कारपोरेशन ऑफ इंडिया (डीएफसीसीआइ) के महाप्रबंधक एवं मुख्य जनसंपर्क अधिकारी नीरज वर्मा ने हादसों को दुर्भाग्यपूर्ण बताए हुए कहा कि इनकी पुनरावृत्ति रोकने के लिए दोनों हादसों की गहराई से जांच कर कारणों का विश्लेषण किया जाएगा और तदनुसार सुधारात्मक उपाय किए जाएंगे। फिलहाल नवीनतम हादसे की मौके पर पड़ताल के लिए प्रबंध निदेशक रवींद्र कुमार जैन स्वयं घटनास्थल पर गए हुए हैं और अधिकारियों के साथ कारणों की छानबीन कर रहे हैं।

हादसे में मारे गए ग्रामीण बच्चे और दो घायलों को मुआवजे के बारे में उन्होंने कहा कि चूंकि दुर्घटना का संबंध मालगाड़ी से है, लिहाजा उन्हें अहेतुक सहायता देने पर विचार किया जा रहा है। जिसकी घोषणा शीघ्र ही की जाएगी। ये भुगतान रेल मंत्रालय द्वारा ऐसे मामलों में दी जाने वाली अहेतुक सहायता के अनुरूप होगा। इस विषय में पूछे जाने पर रेलवे बोर्ड के जिम्मेदार अधिकारी का कहना था कि रेलवे में मालगाड़ियों के हादसे बहुत कम होते हैं। उनसे मौत का कोई इतिहास भी नहीं है।

लिहाजा मालगाड़ी हादसों में मृतकों को मुआवजे का कोई नियम भी नहीं है। परंतु किसी की मौत होने पर रेलमंत्री मानवीय आधार पर अहेतुक सहायता का ऐलान कर सकते हैं। यह रकम मौके की नजाकत के अनुसार कुछ भी हो सकती है। परंतु आम तौर पर मृतक के परिजनों को 1 से 4 लाख रुपये तक का, गंभीर रूप से घायल को 50 हजार रुपये का और साधारण रूप से चोटिल को 25 हजार रुपये के एक्स-ग्रेशिया भुगतान की परंपरा रही है। उम्मीद है फ्रेट कॉरिडोर हादसे में डीएफसीसीआइ प्रबंधन इसी को ध्यान में रखकर अहेतुक सहायता का ऐलान करेगा।

फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण करते वक्त अधिकारियों ने इसकी सुरक्षा को लेकर बड़े बड़े दावे किए थे। उनका कहना था कि इसका ट्रैक, सिग्नल प्रणाली और ओवरहेड इलेक्ट्रिक तंत्र रेलवे के मुकाबले काफी उन्नत है। साथ ही ऑटोमैटिक ट्रैक लेइंग मशीनों के जरिये से बिछाए जाने से इसकी लाइने एकदम समतल और एलाइनमेंट पूर्णतया त्रुटिरहित है। वैगनों का डिजाइन भी अलग है। लेकिन लगता है उद्घाटन की जल्दबाजी में कुछ कमियां रह गई हैं।

ट्रैक के लिए भरी गई मिट्टी और गिट्टी का आधार शायद पूरी तरह बैठ नहीं पाया है और भारी बारिश के दबाव में धंस रहा है। अथवा फिर वैगनों के डिजाइन में ही कोई त्रुटि है। क्योंकि अगस्त के हादसे में माल के रूप में लदी स्टील की भारी प्लेटों के अचानक खिसकने और इस कारण वैगन के डगमगाने को वजह माना गया था। जबकि इस बार ट्रेन में चूना पत्थर लदा होने पर भी बड़ा डिरेलमेंट हुआ है। डीएफसीसीआइएल प्रबंधन के समक्ष स्वयं ही इसका पता लगाने की चुनौती है। क्योंकि फ्रेट कॉरिडोर के हादसों की जांच रेलवे संरक्षा आयोग के दायरे में नहीं आती।

भारी मालगाड़ियों के लिए पृथक ट्रैक उपलब्ध कराने के मकसद से देश में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं। पूर्वी कॉरिडोर का निर्माण जापान, जबकि पश्चिमी कॉरिडोर का निर्माण विश्व बैंक की मदद से हो रहा है। पूर्वी कॉरिडोर के 351 किलोमीटर लंबे भाऊपुर-खुर्जा सेक्शन को पिछले साल 29 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यातायात के लिए खोला था। तबसे इस पर 100 किलोमीटर की रफ्तार से 25 टन वजनी वैगनों वाली मालगाड़ियों का नियमित रूप से आवागमन हो रहा है।

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