लखीमपुर खीरी: जांच में यूपीएसएस के जिला प्रबंधक व केंद्र प्रभारी दोषी, डीएम ने की विभागीय कार्यवाही की संस्तुति

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

लखीमपुर खीरी, अमृत विचार। शहर की राजापुर मंडी में 27 मई को गेहूं क्रय संस्था यूपीएसएस के गेहूं क्रय केंद्र पर संभागीय खाद्य नियंत्रक लखनऊ और एसडीएम के निरीक्षण में गेहूं बरामदगी के मामले में एसडीएम सदर की अध्यक्षता में गठित 04 सदस्यीय जाॅच कमेटी की आख्या में दो अधिकारियों के दोषी पाए जाने पर …

लखीमपुर खीरी, अमृत विचार। शहर की राजापुर मंडी में 27 मई को गेहूं क्रय संस्था यूपीएसएस के गेहूं क्रय केंद्र पर संभागीय खाद्य नियंत्रक लखनऊ और एसडीएम के निरीक्षण में गेहूं बरामदगी के मामले में एसडीएम सदर की अध्यक्षता में गठित 04 सदस्यीय जाॅच कमेटी की आख्या में दो अधिकारियों के दोषी पाए जाने पर डीएम डॉ अरविंद कुमार चैरसिया ने विभागीय कार्यवाई कराने की सहमति जताई है। वही जांच कमेटी की आख्या अपूर्ण होने पर कुछ आवश्यक बिंदुओं को जांच आख्या में सम्मिलित कर जांच आख्या एक सप्ताह के भीतर मांगी है, जिससे प्रक्रियागत कृषकों के पक्ष में नीलामीशुदा गेहूं की धनराशि अवमुक्त करने का वह निर्णय ले सके।

डीएम ने एडीएम अरूण कुमार सिंह से कहा है कि जाॅच कमेटी ने आख्या दी है जिसमें गेहूॅ क्रय केन्द्र प्रभारी प्रदीप कुमार द्विवेदी व जिला प्रबन्धक, यूपीएसएस वेद प्रकाश निगम समान रूप से दोषी पाए गए है। उन्होंने दोनो अधिकारियों के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही किये जाने के लिए साक्ष्य संबंधित अभिलेख तीन दिन के अन्दर प्रस्तुत करने को कहा है। डीएम ने एडीएम को निर्देशित किया कि अभिरक्षा में रखा गेहूॅ खराब न हो इसलिए इसकी नीलामी के लिए तत्काल एक टीम का गठन करें और उसकी देखरेख एंव पर्यवेक्षण में एक सप्ताह के अन्दर गेहूॅ की नीलामी कराकर उससे प्राप्त धनराशि नजारत के रजिस्टर-4 में सुरक्षित रखें।

बता दें कि 27 मई को संभागीय खाद्य नियंत्रक संतोष कुमार और एसडीएम सदर अरूण कुमार सिंह ने मंडी समिति राजापुर के चबूतरा नंबर छह पर और पास में खड़े दो ट्रकों में लोड सरकारी पीपी बोरों में भरा 1820.50 क्विंटल गेहूं पकड़ा था। इसी चबूतरे पर यूपीएसएस और मंडी समिति के क्रय केंद्र भी संचालित थे, जिनके केंद्र प्रभारियों ने बरामद गेहूं के बारे में अनभिज्ञता जताई थी।

एसडीएम सदर डॉ. अरुण कुमार सिंह के निर्देश पर यूपीएसएस के जिला प्रबंधक ने केंद्र प्रभारी और अधिकारियों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे युवक के खिलाफ सदर कोतवाली में सरकारी धन के गबन आदि आरोपों में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एसडीएम सदर की अध्यक्षता में चल रही जांच में यूपीएसएस के जिला प्रबंधक वेदप्रकाश निगम व केंद्र प्रभारी प्रदीप कुमार त्रिवेदी दोषी पाए गए है। जिनके खिलाफ डीएम डाॅ अरंिवद कुमार चैरसिया ने विभागीय कार्यवाई की संतुस्ति जताई है।

इस खुलासे से एक बात स्पष्ट हो गई कि ई-पॉप मशीनों के इस्तेमाल से गेहूं खरीद में पारदर्शिता लाने का दावा खोखला साबित हुआ है। अनाज माफिया और क्रय केंद्र प्रभारियों की मिलीभगत से मशीन को चकमा देने का तोड़ निकाल लिया गया है, जिसकी मदद से माफिया बिचैलियों के माध्यम से सस्ते में गेहूं खरीदकर सरकारी गोदामों में सप्लाई भेज रहे थे।

इन बिंदुओं पर डीएम ने मांगी जांच कमेटी से रिपोर्ट
डीएम डॉ. अरविंद कुमार चैरसिया ने बताया कि एसडीएम सदर की अध्यक्षता में गठित जाॅच कमेटी द्वारा प्रस्तुत आख्या में कुछ आवश्यक बिन्दुओं को सम्मिलित नहीं किया गया है जिनको शामिल करने के लिए कहा गया है। कि जिस दिनांक को गेहूॅ सीज किया गया था, उस दिनांक में दावा किये गये 31 कृषकों के गेहूॅ बिक्री हेतु किये गये आनलाइन रजिस्ट्रेशन की क्या स्थिति थी? क्या इन समस्त 31 कृषकों द्वारा बिक्री हेतु यूपीएसएस के संबंधित क्रय केन्द्र पर गेहूॅ लाने से पूर्व बिक्री हेतु निर्धारित रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूर्ण कर ली गयी थी तथा कृषकों के पास क्रय केन्द्र पर इन कृषकों के रजिस्ट्रेशन से सम्बन्धित दस्तावेज उपलब्ध थे? क्या इन 31 कृषकों द्वारा इससे पूर्व भी किसी सरकारी गेहूॅ क्रय केन्द्र पर अपना गेहूॅ विक्रय किया गया था?

दावा किये जाने वाले कृषकों की कुल कितनी भू-धारिता है? विभिन्न एजेंसियों एवं इन कृषकों के मोबाइल नम्बर आधार कार्ड के माध्यम से जाॅच सत्यापन कर लिया जाये कि यूपीएसएस के इस आरोपित क्रय केन्द्र से पूर्व इन कृषकों द्वारा और किन क्रय एजेंसियों के जरिये अपना गेहूॅ विक्रीत किया जा चुका है। इसकी संकलित सूचना जाॅच आख्या के साथ प्रस्तुत की जाये। क्रय केन्द्र पर सम्भागीय खाद्य नियंत्रक द्वारा किये गये औचक निरीक्षण के समय ही किसी भी कृषक द्वारा गेहूॅ के स्वामित्व के सम्बन्ध में अपना दावा प्रस्तुत क्यों नहीं किया गया?

इस बिन्दु के सम्बन्ध में कोई भी स्पष्टीकरण जाॅच आख्या में अंकित नहीं पाया गया है। इस वजह से गेंहू की नीलामी में समस्या उत्पन्न होगी। अभिरक्षा में रखे कुल गेहूॅ की मात्रा का दावाकर्ता कृषकों द्वारा अपने शपथपत्रों में उल्लिखित गेहूॅ की कुल मात्रा से मिलान करते हुए यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उपलब्ध गेहूॅ (सीज किये गये) एवं दावा की गयी मात्रा में साम्य है अथवा नहीं? साथ ही कृषकों के दावों के सम्बन्ध में साक्ष्य-समर्थित सत्यापन अवश्य अभिलिखित कर लें ताकि उनके दावे की प्रामाणिकता के साथ पुष्टि हो सके।

डीएम ने एसडीएम-सदर को निर्देशित किया कि सभी बिन्दुओं को जाॅच कमेटी की आख्या में समाहित करते हुए सुस्पष्ट जाॅच आख्या प्रत्येक दशा में एक सप्ताह के अन्दर प्रस्तुत करें ताकि प्रक्रियागत् नियमों का पालन करते हुए कृषकों के पक्ष में नीलामशुदा गेहूॅ की धनराशि अवमुक्त किये जाने निर्णय लिया जा सके।

संबंधित समाचार