शहर की बीस हजार की आबादी प्यासी, अधिकारी बेपरवाह
हल्द्वानी, अमृत विचार। शहर की बीस हजार की आबादी प्यासी है। उनके घरों में पानी नहीं पहुंच रहा है। लेकिन अधिकारी बेपरवाह बने हुए हैं। जनता की कोई सुनने वाला भी नहीं है। उस क्षेत्र के जेई फोन नहीं उठा रहे हैं और अधिशासी अभियंता को इसकी जानकारी तक नहीं है। दमुवाढूंगा से बिठोरिया तक …
हल्द्वानी, अमृत विचार। शहर की बीस हजार की आबादी प्यासी है। उनके घरों में पानी नहीं पहुंच रहा है। लेकिन अधिकारी बेपरवाह बने हुए हैं। जनता की कोई सुनने वाला भी नहीं है। उस क्षेत्र के जेई फोन नहीं उठा रहे हैं और अधिशासी अभियंता को इसकी जानकारी तक नहीं है।
दमुवाढूंगा से बिठोरिया तक की आबादी करीब बीस हजार बताई जाती है। यहां के तमाम घरों में जलसंस्थान से कनेक्शन है। गौला का पानी इनके घरों में आता है। लेकिन पिछले पांच दिन से जल संकट गहरा रहा है। घरों में पानी न आने से उन्हें भटकना पड़ रहा है। टैंकर की सहूलियत भी लोगों को नहीं मिल पा रही है।
लोगों का कहना है कि न ही अधिकारी सुन रहे हैं और न ही सुध ले रहे हैं। यहां तक की उनसे संपर्क भी नहीं हो पा रहा है। इस मामले में जब समस्या का कारण जानने के लिए जेई धीरज मेहता को कॉल किया गया तो उन्होंने फोन ही रिसीव नहीं किया। अधिशासी अभियंता संजय श्रीवास्तव से इस बारे में पूछा तो उन्होंने इसकी जानकारी ही न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया।
जर्जर लाइन का बुरा हाल, जड़ ने रोका छह सौ घरों का पानी
शहर में बिछी पेयजल लाइनों का बुरा हाल है। जर्जर हो चुकी ये लाइनें कभी भी धोखा दे जाती हैं। इसी तरह का हाल बिठोरिया की मुख्य लाइन में देखा गया। यहां एक जड़ के घुसने से लाइन चोक हो गई। उसके बाद करीब तीन हजार घरों की सप्लाई रुक गई। पानी न आने से परेशान लोगों ने जलसंस्थान के अधिकारियों को जगाया। लेकिन समस्या खोजने में इस विभाग की टीम के भी पसीने छूट गए। पांच दिन बाद जाकर इस समस्या का कारण पता चला। पेयजल लाइन में जड़ घुसने की वजह से यह संकट पैदा हो गया था। जिसे निकालने के बाद रविवार देर शाम पानी की सप्लाई चालू हो सकी।
जल संस्थान के जेई पंकज उपाध्याय ने बताया कि पाइपलाइन में जड़ के चले जाने और पानी की वजह से उसके फूलने से लाइन चोक हो गई थी। बिठोरिया में गोविंद पुरम के सामने संतोषी माता मंदिर के पास लाइन के अंदर फंसी जड़ को बाहर निकाला गया। इस लाइन से तिलक नगर, फेज वन, फेज टू, फेज थ्री, सरस्वती विहार, विकास नगर फेज वन क्षेत्र आते हैं, यहां करीब साढ़े पांच सौ से छह सौ घरों के कनेक्शन है। शाम को जड़ निकालने के बाद पानी चालू कर दिया गया है।
पहले घुस गए थे पत्थर, गहरा गया था संकट
जर्जर लाइन और जिम्मेदारों की लापरवाह को इस बात से भी समझा जा सकता है कि चार महीने पहले चंबल पुल के पास गैस पाइप लाइन डालने के बाद मुख्य पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी। लापरवाही करते हुए इस लाइन को ही तोड़ दिया गया था। इस वजह से कंकड़ पत्थर घुस गए थे। इस वजह से कई दिनों तक लोगों को समस्या हुई थी। लोगों को लगता है कि अभी भी कंकड़ लाइनों में हो सकते हैं, जिस वजह से कई क्षेत्रों में पानी धीमा आता है।
