सीतापुर: सकरन स्वास्थ्य केंद्र में न डॉक्टर, न सुविधाएं, झोलाछाप के सहारे मरीज

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Edited By Amrit Vichar
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सीतापुर। कस्बे में बना स्वास्थ्य केंद्र लोगों इलाज करने के बजाय खुद बीमार है। यहां न ही पूरा स्टाफ है और न ही स्वास्थ्य की जरूरी सुविधाएं ही हैं। तैनाती होने के बाद भी डाक्टर नहीं आते। प्रसव आदि के लिए महिलाओं को दूसरी सीएचसी जाना पड़ता है। क्षेत्रीय लोगों ने कई बार इस स्वास्थ्य …

सीतापुर। कस्बे में बना स्वास्थ्य केंद्र लोगों इलाज करने के बजाय खुद बीमार है। यहां न ही पूरा स्टाफ है और न ही स्वास्थ्य की जरूरी सुविधाएं ही हैं। तैनाती होने के बाद भी डाक्टर नहीं आते। प्रसव आदि के लिए महिलाओं को दूसरी सीएचसी जाना पड़ता है। क्षेत्रीय लोगों ने कई बार इस स्वास्थ्य केंद्र की सुविधाएं दुरुस्त कराने की मांग की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। जनपद मुख्यालय से 55 किमी दूरी पर स्थित सकरन में स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के चलते क्षेत्र की करीब एक लाख से अधिक आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

जिसके चलते यहां झोलाछाप चिकित्सकों की पौबारा है। सकरन में कहने को तो प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बना है, लेकिन यहां पर स्टाफ़ की कमी के कारण इलाके के लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सूत्र बताते हैं कि इस केन्द्र पर महिला डाक्टर आनम फारूकी, आयुर्वेद चिकित्सक भंडेल, फार्मासिस्ट सिद्दीकी व एएनएम स्वाती पटेल की तैनाती है। लेकिन यहां की चिकित्सक आनम फारूकी विगत एक वर्ष से केन्द्र पर न आकर सीएचसी सांडा में बैठती हैं।

जिसके चलते क्षेत्रीय लोगों को साधारण बीमारियों के इलाज के लिये क्षेत्र के झोलाछाप डाक्टरों की शरण में जाना पडता है। करीब दस साल पूर्व इस केन्द्र पर गर्भवती महिलाओं के प्रसव हो जाते थे, पर अब महिला चिकित्सकों, संसाधनों व दवाइयों के अभाव में गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिये 15 किमी दूर सांडा, 25 किमी दूर लहरपुर या 20 किमी दूर तम्बौर आदि सीएचसी पर जाना पडता है।

स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाएं भी चौपट

इस स्वास्थ्य केन्द्र पर न तो चिकित्सक आते है और न ही पर्याप्त मात्र में दवाएं हैं, इससे भी खात बात यह है कि कस्बे के बाहर बने इस केन्द्र में बाउंड्रीवाल तक नहीं है। जिससे जंगली जानवर व आवारा पशुओं का जमावडा लगा रहता है। केन्द्र में स्वच्छ पेयजल के लिये लगायी गयी टंकी देखरेख के अभाव में विगत कई वर्षों से बंद पड़ी है। जिससे यहां आने वाले मरीज व मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों को पीने के लिये पानी की भी दिक्कत है। लोगों को बाहर लगे हैंडपम्प से पीने का पानी लाना पड़ता है।

इन गांवों के लोगों को हो रही दिक्कत

इस बदहाल प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में पर्याप्त मात्रा में स्टाप व दवाइयों की उपलब्धता न होने की वजह से क्षेत्र के सकरन, तारपारा, उमराखुर्द, उमरकला, प्यारापुर, काजीपुर, सोहरिया, सुमरावां, कल्ली, मिश्रपुर, लालूपुरवा, गयादीनपुरवा, गुलरबोझा, मुंशीपुरवा, लखुआबेहड, गदियाना मिदनिया, दुगाना दुगनिया, चीतपुर, अम्बाई, बाधेपुरवा, मदनापुर आदि गांव के लोगों को दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। क्षेत्रीय लोगों व सदस्य जिला पंचायत हरगोविंद यादव ने मामले को लेकर एक शिकायती पत्र मुख्य चिकित्सा अधिकारी को देकर केन्द्र पर डाक्टरों की तैनाती व दवाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

मेडिकल कराने में भी हो रही दिक्कत

इस स्वास्थ्य केंद्र पर समुचित सुविधाएं न होने से मरीजों को ही नहीं, लड़ाई-झगड़ा करने वालों के मेडिकल कराने में भी दिक्कत होती है। किसी विवाद के बाद यदि मजरूब का मेडिकल कराना होता था तो उसका मेडिकल हो जाता था, लेकिन इस दौरान मेडिकल नहीं हो पा रहा है। जिसके चलते स्थानीय लोगों के अलावा पुलिस को भी दिक्कत हो रही है। चिकित्सीय परीक्षण के लिये 15 किमी दूर सांडा ले जाया जाता है।

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