पीलीभीत: गजरौला में गोकशी, खेत में मिले गोवंशीय पशुओं के अवशेष
पीलीभीत, अमृत विचार। गोकशी को लेकर पुलिस के निष्क्रिय पड़ते ही गौ मांस तस्कर सक्रिय हो गए। गजरौला थाना क्षेत्र में असम हाईवे से सटे गन्ने के खेत को स्लाटर हाउस की तर्ज पर इस्तेमाल किया। एक ही रात में तस्करों ने पांच गोवंशीय पशुओं की हत्या की और मांस तस्करी को ले गए। दूसरे …
पीलीभीत, अमृत विचार। गोकशी को लेकर पुलिस के निष्क्रिय पड़ते ही गौ मांस तस्कर सक्रिय हो गए। गजरौला थाना क्षेत्र में असम हाईवे से सटे गन्ने के खेत को स्लाटर हाउस की तर्ज पर इस्तेमाल किया। एक ही रात में तस्करों ने पांच गोवंशीय पशुओं की हत्या की और मांस तस्करी को ले गए। दूसरे दिन ग्रामीण खेत की तरफ पहुंचे तो अवशेष पड़े मिले। इसकी सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने मौका मुआयना कर जानकारी जुटाई।
पशु चिकित्सक से अवशेष का परीक्षण कराने के बाद दफन करा दिया गया। अभी कोई सुराग नहीं मिल सका है। अज्ञात पर एफआईआर दर्ज कर पुलिस पुराने तस्करों की छानबीन में जुट गई है। उधर, ग्रामीणों ने गोकशी की घटना पर नाराजगी जताई। जल्द घटना का खुलासा करके तस्करों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
जनपद में तस्कर लंबे समय से सक्रिय हैं। नेपाल और उत्तराखंड से सटा जिला होने पर तस्करी बड़े पैमाने पर होती है। पूरनपुर, माधोटांडा, शेरपुर कलां, बरखेड़ा, जहानाबाद, कोतवाली सदर, बिलसंडा क्षेत्र के कई गांवों में तस्कर वारदात करते रहे हैं। गजरौला में भी तस्कर कई बार खेतों में आवारा पशुओं की हत्या कर मांस लग्जरी कारों में लादकर तस्करी का धंधा फैला रहे हैं। अभी कुछ दिन पहले ही बरखेड़ा क्षेत्र में गोकशी का मामला सामने आया था। इसके बाद गजरौला क्षेत्र को तस्करों ने निशाने पर लिया है। असम हाईवे पर तकिया मोड़ के पास गोवंशीय पशुओं को खेत में ले जाकर हत्या की गई।उसके बाद मांस ले गए।
बृहस्पतिवार शाम को ग्रामीण खेतों की तरफ पहुंचे तो वहां गोवंशीय पशुओं के अवशेष पड़े मिले। ये देख गोकशी का शोर मच गया। काफी लोग जमा हो गए। घटना को लेकर नाराजगी जताई गई। इसकी सूचना मिलने पर इंस्पेक्टर इंद्र सिंह पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे और जानकारी जुटाई। पशु चिकित्सक को बुलाकर अवशेष का परीक्षण कराया गया और गड़्ढा खुदवाकर एक स्थान पर दफन करा दिया। काफी सुरागरसी के बाद भी कोई खास क्लू तस्करों से जुड़ा नहीं मिला। अवशेष करीब चार से पांच पशुओं के बताए गए।
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर गई थी। आसपास के लोगों से भी जानकारी जुटाई गई है। अज्ञात पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। खुलासे पर काम किया जा रहा है। क्षेत्र में सक्रिय रहे पुराने तस्करों के बारे में भी छानबीन करा रहे हैं। – इंद्र सिंह, इंस्पेक्टर गजरौला
निचले स्तर पर सांठगांठ और सफेदपोशों के संरक्षण से पनप रहा धंधा
जनपद में गोकशी के धंधेबाजों की बात करें तो फेहरिस्त काफी लंबी है। गोकशी से जुड़े छोटे-बड़े सभी मिलाकर करीब डेढ़ हजार से अधिक तस्कर पुलिस रिकार्ड में दर्ज हैं। बरेली, शाहजहांपुर के तस्कर भी बीते समय में सक्रिय रहे हैं। भाजपा सरकार बनने के बाद इस धंधे पर सख्ती की गई।इसका असर भी पड़ा। मगर, निचले स्तर पर पुलिस की सांठगांठ कर कुछ सफेदपोशों के संरक्षण देने से ये तस्करों को बल मिलता गया।
दो साल पहले ताबड़तोड़ घटनाएं हुई तो तत्कालीन एसपी बालेंदु भूषण सिंह को खुद कमान संभालनी पड़ी थी। उस वक्त बरखेड़ा क्षेत्र के गांव तस्करों के निशाने पर थे।यहां एक दिन एसपी खुद कार्रवाई को पहुंच गए और गहनता से पड़ताल की गई तो पुलिस की मिलीभगत के कयास सही साबित हुए। जिरोनिया पुलिस चौकी का स्टाफ तस्करों से सांठगांठ में लिप्त मिला। दरोगा और तीन सिपाहियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया। तस्करों पर रासुका की कार्रवाई की गई।
हालांकि उसके बाद तस्करों से मिलीभगत की एक शिकायत एसपी की भी शासन स्तर पर करा दी गई थी। एसपी मनोज कुमार सोनकर के समय में भी तस्करी के मामले में लापरवाही और सांठगांठ के आरोप लगने पर कई पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई। कई इंस्पेक्टरों को थानाध्यक्ष की कुर्सी गंवानी पड़ गई थी। कुछ ढील पड़ी तो दोबारा तस्कर घटना करने लगे।इस पर जब गैंगेस्टर एक्ट, संपत्ति कुर्क, रासुका के तहत शिकंजा कसा तो मामले कम हो गए थे। मगर, अब दोबारा इस तरह की घटना का होना, कहीं न कहीं तस्करों की दस्तक की ओर इशारा करता है।
रुकावट डालने पर जान लेने से भी पीछे नहीं गोमांस तस्कर
पुलिस हो या फिर आम नागरिक। गोमांस तस्करों के रास्ते में जिसने भी रूकावट डालने का प्रयास किया, उस पर हमला कर जान लेने से भी तस्कर पीछे नहीं हटे। बिलसंडा क्षेत्र के एक गांव में दो साल पहले आवारा पशु को पीटकर हत्या के इरादे से तस्कर वाहन में लाद रहे थे। एक ग्रामीण की शोर पर आंख खुल गई।
उसने जब रोकने का प्रयास किया तो तस्करों ने गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था। इस मामले में जब पुलिस ने खुलासा किया तो शाहजहांपुर के तस्कर पकड़े गए थे। इससे पहले पशुओं से लदे ट्रक काे पकड़ने के लिए निकली सिटी पुलिस कंट्रोल के पुलिसकर्मियों के चार पहिया वाहन को भी ट्रक से टक्कर मार दी थी।
इसमें दो सिपाहियों की मौत हो गई थी, जबकि होमगार्ड गंभीर रूप से घायल हुआ था। बीते साल भी छतरी चौराहा पर बरेली के तस्करों को रोकने का प्रयास करने पर पुलिस से मुठभेड़ हुई थी।उसके अलावा कई बार तस्कर पुलिस टीम पर फायरिंग भी कर चुके हैं।
एक बार तो गोकशी को बता दिया था बाघ हमला
गोकशी की घटनाओं को दबाने में भी पुलिस का कोई जवाब नहीं है। गोकशी की घटना होने पर कार्रवाई का डर मातहतों को रहता है। चूंकि शासन इस दिशा में खासा सख्त है। इसकी एक बानगी पिछले साल देखने को मिली थी। बिलसंडा के एक गांव में जब खेत में गोवंशीय पशु के अवशेष मिले। पास में ही पानी की खाली बोलत भी पड़ी थी। उस वक्त ग्रामीण गोकशी का शोर मचा रहे थे। हिंदू संगठनों की ओर से कार्रवाई की मांग की जा रही थी। मगर, तत्काल बिलसंडा इंस्पेक्टर ने इसे बाघ का हमला करार दे दिया था। जब उनसे ये पूछा गया कि पानी की बोतल भी शेर लेकर आया था..तो काफी फजीहत झेलनी पड़ी थी।
