यूपी: किस सियासी डगर पर चल पड़े भाजपा के गांधी, जानें वजह?
लखनऊ। भाजपा में फायरब्रांड नेता के रूप में शामिल हुए वरुण गांधी भले ही पीलीभीत से सांसद हों, लेकिन पार्टी में उनकी वह स्थिति नहीं है जो शुरूआती दौर में हुआ करती थी। ऐसे में गाहे-बगाहे वे केंद्र व राज्य सरकार की राय से अलग अपनी राय प्रकट कर देते हैं। अब जिस तरह उन्होंने …
लखनऊ। भाजपा में फायरब्रांड नेता के रूप में शामिल हुए वरुण गांधी भले ही पीलीभीत से सांसद हों, लेकिन पार्टी में उनकी वह स्थिति नहीं है जो शुरूआती दौर में हुआ करती थी। ऐसे में गाहे-बगाहे वे केंद्र व राज्य सरकार की राय से अलग अपनी राय प्रकट कर देते हैं। अब जिस तरह उन्होंने किसान आंदोलन का समर्थन किया है और लखीमपुर खीरी में बवाल के बाद अपने ट्वीटर एकाउंट के बायो से बीजेपी का नाम हटा दिया है। उससे लग रहा है कि भाजपा के गांधी कोई और ठौर तलाश रहे हैं।
वरुण गांधी अगर कोई नया राजनीतिक ठिकाना तलाश रहे हैं तो पहला नंबर कांग्रेस का ही आता है। कांग्रेस की अध्यक्षता भले ही सोनिया गांधी के हाथों में है, लेकिन राहुल और प्रियंका दोनों से वरुण गांधी के मधुर रिश्ते हैं। पीलीभीत में रहकर वरुण गांधी को किसान आंदोलन का असर भी साफ नजर आ रहा है। इसलिए जहां वे किसानों का समर्थन खुलकर कर रहे हैं, वहीं भाजपा से दूरी बनाते दिख रहे हैं। पिछले करीब डेढ़ माह में उन्होंने मुख्यमंत्री को तीन पत्र भेजे हैं। जिसमें किसान आंदोलन का समर्थन किया गया है। इन सभी पत्रों को वरुण गांधी ने ट्वीटर के माध्यम से बाकायदा सार्वजनिक भी किया है।
हालिया मामले में तो उन्होंने जिस तरह इस घटना को किसानों की हत्या करार देते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठाई है, वह काफी चौंकाने वाला रहा। क्योंकि उन्हें भली प्रकार पता है कि किसान भाजपा के केंद्रीय राज्य मंत्री के बेटे पर इस घटना का आरोप चस्पा कर रहे हैं। उधर, कांग्रेस को भी प्रदेश में मजबूत साथी की तलाश है। तेज-तर्रार वरुण गांधी की जरूरत कांग्रेस भी महसूस करती है। फिलहाल दोनों पक्षों ने अभी कुछ भी ऐसा जाहिर नहीं किया है, लेकिन आने वाले दिनों में गांधी परिवार अगर एकजुट हो जाए तो राजनीतिक विश्लेषकों काे बड़ा आश्चर्य न होगा।
