रायबरेली: NTPC में कोयले की कमी से ठप हो सकता है बिजली का उत्पादन

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Edited By Amrit Vichar
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रायबरेली। देश की कोयला आधारित बिजली परियोजनाओं में चल रहे कोयला संकट के बीच एनटीपीसी की ऊंचाहार परियोजना की दयनीय स्थिति हो गई है। जिसकी वजह से कुछ यूनिटों को बंद करने पर प्रबंधन विचार कर रहा है। ऐसे में बिजली संकट गहराने की संभावना है। पिछले कुछ महीनों से चल रही कोयले की समस्या …

रायबरेली। देश की कोयला आधारित बिजली परियोजनाओं में चल रहे कोयला संकट के बीच एनटीपीसी की ऊंचाहार परियोजना की दयनीय स्थिति हो गई है। जिसकी वजह से कुछ यूनिटों को बंद करने पर प्रबंधन विचार कर रहा है। ऐसे में बिजली संकट गहराने की संभावना है।

पिछले कुछ महीनों से चल रही कोयले की समस्या बढ़ती जा रही है। एनटीपीसी की ऊंचाहार परियोजना के पास एक दिन का भी कोयला भंडारण नहीं है। प्रतिदिन आ रही कोयले की रैंक पर एनटीपीसी की छह यूनिटों को आधे भार पर चलाया जा रहा है। ऊंचाहार परियोजना के पास इस समय बमुश्किल 18 हजार मीट्रिक टन कोयले का भंडारण है। जबकि सभी यूनिटों को पूरे भार पर चलाने के लिए प्रतिदिन करीब तीस हजार मीट्रिक टन कोयले की जरूरत है।

दूसरी ओर इस समय रोज तीन मालगाड़ी से कोयले की आपूर्ति आ रही है। जिसमें करीब दस हजार आठ सौ मीट्रिक टन कोयला आ रहा है। इस कोयले से यूनिटों को कम भार पर चलाया जा रहा है। यदि सभी यूनिटों को पूरे भार पर संचालित किया जाए तो प्रतिदिन करीब आठ मालगाड़ी कोयले की जरूरत पड़ेगी। इस प्रकार से कोयले के संकट के कारण अब यूनिटों को बन्द करने की स्थिति आ गई है।

यूनिटों के बंद करने पर विचार

एनटीपीसी परियोजना के सूत्रों का कहना है कि एक दो दिन के अंदर कुछ यूनिटों से उत्पादन बंद कर दिया जाएगा। उत्पादन बंद होने के कारण बड़ा बिजली संकट पैदा होने की संभावना है।

कोयला संकट का यह है कारण

भारत के घरेलू कोयला उत्पादन में भारी गिरावट आई है। इसकी कई वजह है। विगत अगस्त माह के शुरुआत से कोयला का उत्पादन प्रभावित होना शुरू हुआ है। इसके साथ ही बारिश और कोल इंडिया के आंतरिक वजहों से घरेलू कोयले का उत्पादन काफी कम हो गया है। जिसके चलते कोयला आधारित बिजली परियोजनाओं में कोयला की आपूर्ति आधे से कम कर दी गई है। दूसरी ओर विदेशी कोयले के दामों में भी भारी बढ़ोत्तरी हुई है। जिसके चलते कोयले का आयात भी घटा है। जिसका सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ा है।

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