लखनऊ: उत्पीड़न के विरोध में बिजली अभियंता में आक्रोश, करेंगे कार्य बहिष्कार

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लखनऊ। पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की कथित उत्पीड़नात्मक कार्रवाई के विरोध में बिजली अभियंताओं का प्रदेशव्यापी आन्दोलन जारी रहा। अभियंता छह अक्टूबर से एक घंटे का कार्य बहिष्कार करेंगे। बिजली अभियंताओं के ध्यानाकर्षण आन्दोलन के क्रम में अभियंताओं ने दिन भर काली पट्टी बांधकर विरोध जताया और शाम पांच बजे सभी जनपद मुख्यालयों, परियोजनाओं सहित राजधानी …

लखनऊ। पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की कथित उत्पीड़नात्मक कार्रवाई के विरोध में बिजली अभियंताओं का प्रदेशव्यापी आन्दोलन जारी रहा। अभियंता छह अक्टूबर से एक घंटे का कार्य बहिष्कार करेंगे। बिजली अभियंताओं के ध्यानाकर्षण आन्दोलन के क्रम में अभियंताओं ने दिन भर काली पट्टी बांधकर विरोध जताया और शाम पांच बजे सभी जनपद मुख्यालयों, परियोजनाओं सहित राजधानी लखनऊ में शक्ति भवन पर विरोध सभायें की।

राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के अध्यक्ष वीपी सिंह ने कहा कि वर्ष 2000 में राज्य विद्युत परिषद के विघटन के समय कॉरपोरेशन का घाटा 77 करोड़ था जो बीते 20 वर्षों में ऊर्जा निगमों के कुप्रबंधन से घाटा बढ़कर वर्तमान में 95 हजार करोड़ से अधिक हो गया है। इससे यह स्पष्ट है कि विघटन एक विफल प्रयोग रहा है अतः सभी ऊर्जा निगमों का एकीकरण कर यूपीएसईबी लिमिटेड का गठन किया जाये।

अभियंता संघ के महासचिव प्रभात सिंह ने बताया कि सभी बिजली अभियंता बेहतर उपभोक्ता सेवा प्रदान करने, राजस्व वसूली बढ़ाने, लाइन लॉस कम कर आत्मनिर्भर ऊर्जा निगम बनाने व मुख्यमंत्री के ‘हरदम बिजली सबको बिजली’ देने के संकल्प को मूर्त रूप देने में चौबीस घंटे जी-जान से जुटे हुए हैं जिसके अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। पर खेद का विषय है कि कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा अभियंताओं को पदोन्नति से वंचित किये जाने के क्रम में पदोन्नति नियमों में रातों-रात प्रतिगामी परिवर्तन कर दिये गये हैं जिन्हें आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।

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