मुरादाबाद: रुद्रपुर की आशा का खेत में दबा मिला शव, सनसनी
मुरादाबाद, अमृत विचार। छजलैट थानाक्षेत्र में सात अक्टूबर को गन्ने के खेत में दबे मिले महिला के शव की शिनाख्त हो गई है। मृतका रुद्रपुर निवासी आशा थी। उसके बेटे और बेटी ने रविवार को थाने पहुंचकर फोटो के आधार पर मृतका की पहचान अपनी मां के रूप में की। इसके बाद उन्होंने पोस्टमार्टम हाउस …
मुरादाबाद, अमृत विचार। छजलैट थानाक्षेत्र में सात अक्टूबर को गन्ने के खेत में दबे मिले महिला के शव की शिनाख्त हो गई है। मृतका रुद्रपुर निवासी आशा थी। उसके बेटे और बेटी ने रविवार को थाने पहुंचकर फोटो के आधार पर मृतका की पहचान अपनी मां के रूप में की। इसके बाद उन्होंने पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर मृतका के कपड़ों और अन्य चीजों से भी शिनाख्त की। एसओ रामप्रताप ने बताया कि शव परिजनों को सौंप दिया गया है। घटना की जांच की जा रही है।
थानाक्षेत्र के कुचावली गांव निवासी ललित पुत्र रतन सिंह के गन्ने के खेत में करीब 30 वर्षीय महिला का शव गड्ढे में दबा मिला था। शव करीब सात हफ्ते पुराना था। उससे दुर्गंध उठ रही थी। काफी प्रयास के बाद भी शव की शिनाख्त नहीं हो सकी थी। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव मोर्चरी में रखवा दिया था। महिला की हत्या गर्दन में सामने से गोली मारकर की गई थी। गोली उसकी गर्दन के आरपार हो गई थी। शव का पोस्टमार्टम तीन डाक्टरों के पैनल ने किया था। पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए भी शव की शिनाख्त कराने का प्रयास किया था। इसके अलावा पंफलेट भी बंटवाए गए थे।
रविवार की सुबह अमरजीत नामक युवक छजलैट थाने पहुंचा। उसने थानाध्यक्ष रामप्रताप को बताया कि उसकी मां गायब है। मृतका के फोटो देख एसओ ने उसकी पहचान अपनी मां आशा के रूप में की। युवक ने बताया कि उसकी मां आशा की शादी छजलैट थानाक्षेत्र के गांव शुक्ला की मंढैया निवासी गजराज के साथ हुई थी। करीब 17 साल पूर्व आशा देवी का अपने पति से अलगाव हो गया था।
इसके बाद उसने रामपुर के गोट निवासी राजेंद्र जाटव के साथ दूसरी शादी कर ली थी। तीन बच्चों को लेकर वह राजेंद्र के साथ चली गई थी। वहां भी आशा के दो बच्चे पैदा हुए। राजेंद्र अपनी पत्नी आशा देवी और पांचों बच्चों के साथ उत्तराखंड के रुद्रपुर में रहता है। वह मजदूरी करता है। अमरजीत ने बताया कि उसकी मां आशा देवी 29 सितंबर को घर से निकली थीं। इसके बाद वापस नहीं लौटी। उसका अपने पहले पति के घर भी आना जाना था। बच्चे भी आते-जाते थे। गजराज के पिता की मौत होने पर भी आशा पहले पति के घर आई थी।
