आम के बाद अब ईरान के लोगों के बीच मशहूर होगा लखनऊ का केला, जानिए…

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Edited By Amrit Vichar
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लखनऊ। विदेश में अब लखनऊ का आम ही नहीं, केला भी खाया जाएगा। गुरुवार को उत्तर प्रदेश से केले की पहली खेप ईरान के लिए रवाना की गई। मलिहाबाद स्थित मैंगो पैक हाउस से यह खेप निर्यात के लिए भेजी गई है। करीब 40 फुट के दो रेफर कंटेनर में कुल 40 मीट्रिक टन केले …

लखनऊ। विदेश में अब लखनऊ का आम ही नहीं, केला भी खाया जाएगा। गुरुवार को उत्तर प्रदेश से केले की पहली खेप ईरान के लिए रवाना की गई। मलिहाबाद स्थित मैंगो पैक हाउस से यह खेप निर्यात के लिए भेजी गई है। करीब 40 फुट के दो रेफर कंटेनर में कुल 40 मीट्रिक टन केले को ईरानी बाजार में प्रयोग के आधार पर भेजा गया है। ऐसा पहली बार होगा कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार उत्तर प्रदेश में उगाए गए केले की मिठास का स्वाद चखेगा।

ईरान के लिए मैसर्स- देसाई एग्रो फूड्स ने खेप रवाना की है जो समुद्री मार्ग से भेजी जाएगी। राज्य में कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एपीडा वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय प्रयास कर रहा है। सूबे में कुल 3078.73 हजार मीट्रिक टन केले का उत्पादन हो रहा है।

लखीमपुर, महाराजगंज, कुशीनगर, प्रयागराज, कौशाम्बी आदि जिलों में अंतरराष्ट्रीय बाजार के निर्यात योग्य केले उगाने की अत्यधिक क्षमता है। गुरुवार को अपर मुख्य सचिव कृषि विपणन की अध्यक्षता में एपीडा के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। लखीमपुर, बरेली और लखनऊ के किसान भी इस ऐतिहासिक पल का हिस्सा बने। एपीडा के एजीएम परियोजना सीबी सिंह ने बताया कि विदेश भेजने के लिए उत्पाद सीधे पलिया कलां (लखीमपुर) के किसानों से खरीदा गया था। वहां से इसे लखनऊ लाया गया और लखनऊ स्थित मैंगो पैकहाउस में पैक किया गया।

उन्होंने बताया कि केला दुनिया के सबसे लोकप्रिय फलों में से एक है। यह उत्पादन के मामले में गेहूं, चावल और मक्का के बाद चौथी सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसल हैं। इसकी खपत भी काफी अधिक है। इसे न केवल खाया जाता है, बल्कि जूस, सॉस और विभिन्न व्यंजन बनाने में भी उपयोग किया जाता है। भारत वैश्विक केले के उत्पादन का 30% उत्पादन करता है।

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