रामपुर: आगापुर स्थित कर्बला में निकला चुपताजिया
रामपुर, अमृत विचार। रबी उल अव्वल को चुपताजिए का जुलूस शहर के मोहल्ला लाल कबर स्थित इमाबाड़ा मोहम्मद जफर बेग से निकलकर कोठी खासबाग पहुंचा। इसके बाद आगापुर स्थित कर्बला में पूरे दिन मजलिस मातम का सिलसिला चलता रहा। शहर के मोहल्ला लाल कबर स्थित इमामबाड़े से कुछ दूर जूलूस चला। इसके बाद ताजिए को …
रामपुर, अमृत विचार। रबी उल अव्वल को चुपताजिए का जुलूस शहर के मोहल्ला लाल कबर स्थित इमाबाड़ा मोहम्मद जफर बेग से निकलकर कोठी खासबाग पहुंचा। इसके बाद आगापुर स्थित कर्बला में पूरे दिन मजलिस मातम का सिलसिला चलता रहा। शहर के मोहल्ला लाल कबर स्थित इमामबाड़े से कुछ दूर जूलूस चला।
इसके बाद ताजिए को वाहन द्वारा कोठी खासबाग ले जाया गया। कोठी खासबाग से ताजिया कर्बला पहुंचा। कर्बला में चुपताजिए के आगे अली अब्बास ने यह सवारी पढ़ी-वह जिसने तीन दिन पानी न पाया-जिगर पे जिसने फल बरछी का खाया। सवारी है उसी कड़ियल जवां की-सवारी है शहे कोनो मकां की।इसके बाद असलम महमूद ने यह सवारी पढ़ी।
अली अब्बास ने यह नोहा पढ़ा-खुदा हाफिज है रुख्सत की घड़ी है एै कर्बला वाला-सलाम है आखिरी एै कर्बला वालो। इसके बाद मौलाना अली मोहम्मद नकवी ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन ने अपनी और अपने जां निसारों की शहादत देकर पूरी इंसानियत को बचाया है। इमाम हुसैन ने यजीद की बैयत कुबूल नहीं की और कर्बला के मैदान में भरे कुनबे को अल्लाह की राह में लुटा दिया।
यजीद के लश्कर ने तीन दिन के प्यासे छह महीने के अली असगर को भी त्रिफला तीर मारकर शहीद कर दिया। उन्होंने मौलाना मोहम्मद अली जौहर का शेर पढ़ते हुए कहा कि कत्ले हुसैन अस्ल में मरगे यजीद है-इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद। अंजुमनों ने पक्की कर्बला में नोहख्वानी और मातम किया। इस मौके पर आदिल हसनैन, वसीम मियां, मुज्तबा अली बेग, मेहंदी मियां, जुहैर अब्बास, राशिद बेग, नई मियां, हसन मियां, शाने हैदर, इरफान जैदी आदि मौजूद रहे।
