पीलीभीत: लेप्टोस्पायरोसिस ने दी दस्तक, एक साथ पांच केस मिले
पीलीभीत, अमृत विचार। अभी तराई के इस इलाके को डेंगू और मलेरिया से निजात भी नहीं मिल पाई थी कि इसी बीच नई तरह की बीमारी लेप्टोस्पासरोसिस नामक बीमारी ने दस्तक दे दी। इस बीमारी ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। डेंगू की जांच के लिए लखनऊ भेजे गए पांच मरीजों के सेंपल …
पीलीभीत, अमृत विचार। अभी तराई के इस इलाके को डेंगू और मलेरिया से निजात भी नहीं मिल पाई थी कि इसी बीच नई तरह की बीमारी लेप्टोस्पासरोसिस नामक बीमारी ने दस्तक दे दी। इस बीमारी ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। डेंगू की जांच के लिए लखनऊ भेजे गए पांच मरीजों के सेंपल की आई रिपोर्ट में लेप्टोस्पायरोसिस नामक बीमारी की पुष्टि हुई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने चिंता जताई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक अलग तरह की बीमारी है, जो चूहे के वैक्टीरिया से फैलती है। बीमारी की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पशुपालन और कृषि विभाग को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम लार्वा नाशक दवा का भी छिड़काव करने में जुट गई है, ताकि साफ-सफाई कराई जा रही है।
बारिश का मौसम बीतते ही तराई इलाके में बीमारियों का दायरा बढ़ने लगा है। आए दिन नई बीमारियों के मरीज सामने आने लगे हैं। बीते महीने से वायरल के मरीज मिल रहे थे। उसके बाद डेंगू और स्क्रब टाइफस जैसी गंभीर बीमारियों के मरीज सामने आए। वर्तमान में डेंगू के 14 और मलेरिया के 38 केस हैं। इसके अलावा स्क्रब टाइफस के भी 14 केस सामने आ चुके हैं। तमाम मरीजों की तो बुखार से मौत भी हो चुकी है। बढ़ती बीमारियों से आम लोग सहमे हुए हैं।
बीते 12 अक्टूबर को 47 डेंगू के संदिग्ध मरीजों के सैंपल लेकर जांच के लिए लखनऊ भेजे गए थे। शुक्रवार देर रात आई जांच रिपोट में शहर से सटे चंदोई गांव में दो, बीसलपुर रोड स्थित गांव पौटाकलां और बीसलपुर के मोहल्ला दुबे और न्यूरिया से एक-एक मरीज लेप्टोस्पायरोसिस नामक बीमारी से ग्रसित पाया गया। जांच रिपोर्ट में इस बीमारी की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। मलेरिया और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मरीजों के गांव भेजकर मरीजों की छानबीन करने के साथ ही उनका स्वास्थ्य चेकअप भी किया। स्वास्थ्य विभाग ने हालांकि इन मरीजों के स्वस्थ होने का दावा किया है। चंदोई गांव में मिला मरीज कई दिनों से बुखार से ग्रसित है।
क्या है लेप्टोस्पायरोसिस नामक बीमारी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक लेप्टोस्पायरोसिस लेप्टोस्पायर नामक जीवाणुओं से उत्पन्न होता है, जो संक्रमित जानवरों के मूत्र में पाया जाता है। यह संक्रमण जानवरों से होते हुए मनुष्य तक फैल सकता है। सहायक मलेरिया अधिकारी राजीव मौर्या ने बताया कि यह बीमारी चूहे, गिलहरी, भैंस, घोड़े, भेड़, बकरी, कुत्ते से फैलती है। इस बीमारी में आमतौर पर 100.4 से 104 डिग्री के बीच बुखार होता है। इसके अलावा मरीज में सिरदर्द, ठंड लगन और कंजक्टिवाइटिस की शिकायत रहती है।
समय से उपचार कराए मरीज
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक इस बीमारी में समय से उपचार न कराने पर मरीज की हालत गंभीर भी हो सकती है। इसमें बहरापन, सांस लेने में परेशानी से लेकर दिमागी बुखार तक की समस्या हो सकती है। अब तक इस बीमारी के जो पांच मरीज मिले, वह पूरी तरह से स्वस्थ्य हैं। उन्हें निगरानी में रखा गया है।
क्या है इस बीमारी के लक्षण
- अचानक तेज बुखार आना
- अचानक सिरदर्द और ठंड लगना
- उल्टी होना
- मांसपेशियों और पीठ के निचले हिस्से में दर्द होना
- आंखों में जलन और लाल होना
ये हो सकती है समस्या
- दिमागी बुखार
- बहरापन
- सांस लेने में तकलीफ
क्या हैं बीमारी से बचाव के तरीके
जूते दस्ताने और चश्मे को साफ करके पहनें
- त्वचा के घावों को ढककर रखें।
- पुल, तालाबों, नादियों के पास जाने से बचें।
- दूषित पानी में जाने या तैराकी करने से बचें।
- गंदे पानी से स्नान न करें।
- घावों को धोएं और नियमित सफाई करें।
- बीमार या मृत जानवरों को छूने से बचें।
- स्वच्छ पानी का इस्तेमाल करें।
एपीडेमियोलॉजिस्ट डॉ. महविश सिद्दीक ने बताया कि पांच मरीजों में लेप्टोस्पायरोसिस की पुष्टि हुई है। इन मरीजों का चेकअप कराया गया है। फिलहाल तो मरीज स्वस्थ्य है। उनकी निगरानी कराई जा रही है। मलेरिया टीम को गांवों में जाकर दवा का छिड़काव करने को कहा गया है।
पांच मरीज मिले है। मरीजों काे ट्रेस करके उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है। उनके घर और गांव में दवा का छिड़काव कराया गया है। -राजीव मौर्या, सहायक मलेरिया अधिकारी
