रायबरेली: शरद पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में डुबकी
रायबरेली। शरद पूर्णिमा के अवसर पर सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने डलमऊ और ऊंचाहार के गोकना घाट स्थित गंगा नदी में स्नान किया। वहीं मंदिरों में पूजा अर्चना कर तीर्थ पुरोहितों को दान भी दिया। अश्विन महिने की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा या जागृति पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस अवसर पर बुधवार को …
रायबरेली। शरद पूर्णिमा के अवसर पर सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने डलमऊ और ऊंचाहार के गोकना घाट स्थित गंगा नदी में स्नान किया। वहीं मंदिरों में पूजा अर्चना कर तीर्थ पुरोहितों को दान भी दिया।
अश्विन महिने की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा या जागृति पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस अवसर पर बुधवार को श्रद्धालुओं ने डलमऊ और ऊंचाहार के गोकना घाट स्थित गंगा नदी में स्नान किया। पूर्णिमा के वजह से राजघाट, वीआईपी घाट, रानी शिवाला घाट, पक्का घाट, संकट मोचन घाट, पथवारी देवी घाट, दीन शाह गौरा घाट, महावीरन घाट, बड़ा मत घाट पर काफी भीड़ देखने को मिली। स्नान के समय तीर्थ पुरोहित श्रद्धालुओं को कोरोना महामारी को देखते हुए शारीरिक दूरी बनाए रखने व मास्क लगाने के लिए जागरूक करते रहे।
पौराणिक मान्यता के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी व भगवान विष्णु पृथ्वी पर विचरण करते हैं। वहीं धार्मिक मान्यता के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन ही सागर मंथन से मां लक्ष्मी उत्पन्न हुई थी।
16 कलाओं से युक्त है चंद्रमा
डलमऊ बड़ा मठ के महामंडलेश्वर स्वामी देवेंद्रानंद गिरि ने शरद पूर्णिमा के अवसर पर बताया कि इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से युक्त होता है। साथ ही पूर्णिमा के दिन अमृत वर्षा भी होती है। इस लिए शरद पूर्णिमा के दिन खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे रखना चाहिए। उसके बाद खीर को खाने से शरीर निरोगी होता है। स्नान-ध्यान और दान का इस दिन विशेष महत्व होता है।
