मुरादाबाद : चौखट पर लुट गई गाढ़ी कमाई, किसानों पर टूटा दुख का पहाड़
आशुतोष मिश्र, मुरादाबाद, अमृत विचार। साहूकार से कर्ज लेकर धान की फसल लगाई थी। फसल लहलहाई तो उम्मीदें भी परवान चढ़ीं। लेकिन, अनाज के एक-एक दाने की मोहताजगी दिख रही है। पूरी फसल पानी में बह रही है। लगता है परिवार के सदस्यों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। सच तो यह कि गाढ़ी …
आशुतोष मिश्र, मुरादाबाद, अमृत विचार। साहूकार से कर्ज लेकर धान की फसल लगाई थी। फसल लहलहाई तो उम्मीदें भी परवान चढ़ीं। लेकिन, अनाज के एक-एक दाने की मोहताजगी दिख रही है। पूरी फसल पानी में बह रही है। लगता है परिवार के सदस्यों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। सच तो यह कि गाढ़ी कमाई चौखट पर आकर लुट गई।
यह दर्द भरी कहानी है काफियाबाद की असगरी की। पति गौसे मुल्ला ने कर्ज लेकर खेती में पूंजी लगाई थी। 20 बीघे फसल पक कर तैयार हुई, तो बेटे नाजिम, नासिर, रिजवान और बूढ़ी असगरी ने खेत की ओर रुख किया। घर में इस बात की खुशी थी कि फसल अच्छी आई है। गौसे ने सोचा कि धान बेचकर साहूकार का कर्ज चुका देंगे। वर्ष भर खाने के लिए मनपसंद चावल मिल जाएगा। मगर प्रकृति को कुछ और मंजूर था। अब मानों खेत में धान सूखने के लिए छोड़ने वाले असगरी के कुनबे में मानो विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा है। पूरी फसल पानी में बह रही है।
बुधवार को जब नदी के पानी की धारा खेतों की ओर मुड़ी तो असगरी का कुनबा खेत की ओर दौड़ पड़ा। लबालब डूबी फसल देखकर घरवालों के मुंह को कलेजा आ गया। कई सदस्य सिसकने लगे। बड़े बेटे नाजिम ने परिवार के सदस्य सदस्यों ने को संभाला और डूबी फसल को बाहर निकालने का प्रयत्न शुरू किया। लेकिन, इससे कहां भला होने वाला। नाजिम कहता है कि ऊपर वाले को हमारी खुशी नहीं देखी गई। दिन रात खेत की रखवाली के बाद भी अनाज का एक दाना भी मोहताज हो गया।
जाहिदपुर के नदीम, खैय्या खद्दर के नसीहत खान, काफियाबाद के सनी कुमार, हर स्वरूप सिंह राजगीर, घोसीपुरा के महबूब और लाटूर सिंह का दर्द एक जैसा है। मंगलवार की शाम तक बाढ़ की आहट से गुमसुम किसान बुधवार को लुटे नजर आये। कोई दरवाजे पर सिर झुकाए बैठा था तो किसी के आंख से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। इस्लामनगर, काफियाबाद सहित रामगंगा से सटे गांव का हालात-ए- हाजरा ऐसा ही है। दमदमा और ढेला नदी ने कोसी के पानी का तूफान इन गांवों में मचा रखा है। किसानों की गाड़ी कमाई लुटती दिख रही है।
कािफयाबाद असगरी पानी से धान की फसल छान कर सड़क पर रखते हुए।
