बरेली: संकट में पड़ी शहला ताहिर की चेयरमैनी, चुनाव हो सकता है रद

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बरेली, अमृत विचार। चुनाव जीतने के करीब चार साल के दौरान नवाबगंज की पालिकाध्यक्ष शहला ताहिर की कुर्सी संकट में पड़ गई है। पिछड़ी जाति का प्रमाणपत्र निरस्त होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग जल्द चुनाव रद करने के संबंध में फैसला ले सकता है। ऐसा हुआ तो शहला की पद से बर्खास्तगी तय मानी …

बरेली, अमृत विचार। चुनाव जीतने के करीब चार साल के दौरान नवाबगंज की पालिकाध्यक्ष शहला ताहिर की कुर्सी संकट में पड़ गई है। पिछड़ी जाति का प्रमाणपत्र निरस्त होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग जल्द चुनाव रद करने के संबंध में फैसला ले सकता है। ऐसा हुआ तो शहला की पद से बर्खास्तगी तय मानी जा रही है। 2017 में हुए चुनाव में शहला ताहिर ने जीत दर्ज की तो पूर्व भाजपा ज‍िलाध्‍यक्ष रव‍िन्‍द्र राठौर के भाई नीरेन्‍द्र राठौर की श‍िकायत पर राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने शहला ताहिर की पिछड़ी जाति के बने प्रमाणपत्र की जांच शुरू करायी थी।

कई साल जांच चलने के बाद शहला ने कभी सहयोग नहीं किया। तत्कालीन जिलाधिकारी नितीश कुमार की अध्यक्षता वाली समिति की एक भी तारीख में शहला ताहिर ने अपना पक्ष रखना तक जरूरी नहीं समझा। कई मौके देने के बाद समिति ने जाति प्रमाणपत्र निरस्त करने की रिपोर्ट आयोग को भेजी थी। 21 अगस्त को निरस्त होने की रिपोर्ट मिलने के बाद आयोग ने एफआईआर दर्ज के आदेश दिए थे।

नवंबर, 2017 में हुए नगरपालिका के चुनाव में नवाबगंज में नगर पालिकाध्यक्ष की सीट ओबीसी आरक्षित थी। वर्तमान पालिकाध्यक्ष शहला ताहिर ने खुद को मोमिन अन्सार दर्शाते हुए तहसील से प‍िछड़ी जा‍त‍ि का प्रमाण पत्र बनवाया था। भाजपा नेता नीरेन्‍द्र राठौर ने कथ‍ित रूप से शहला ताहिर की जाति का पत्र फर्जी होने का आरोप लगाते हुए ल‍िख‍ित श‍िकायत की थी। गठित समिति ने 11 नवबंर 2020 को शहला को जाति प्रमाण संबंधी साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए बुलाया।

21 नवंबर को मौका दिया। 3 दिसम्बर 2020 को नहीं आयीं। 16 अप्रैल 2021 की तिथि पर भी नहीं पहुंची। 15 जुलाई 2021 को नियत बैठक में भी जब शहला नहीं पहुंची तब समिति ने यह निर्णय लिया कि शहला ताहिर को साक्ष्य/सुनवाई के लिए और अधिक समय न प्रदान करते हुए प्रकरण के गुण-दोष के आधार पर फैसला सुनाया जाए। इसके बाद समिति ने 21 जनवरी 2017 में तहसील प्रशासन द्वारा बनाए गए जाति प्रमाणपत्र को खारिज कर दिया।

21 जनवरी, 2017 में बना था पिछड़ी जाति का प्रमाणपत्र
जाति प्रमाणपत्र फर्जी होने का मामला सामने आने के बाद तहसीलदार नवाबगंज से जांच करायी गई। तहसीलदार ने जांच आख्या भेजकर अधिकारियों को बताया कि शहला ताहिर पत्नी मोहम्मद निवासी मोहल्ला इस्लाम नगर नई बस्ती, तहसील नवाबगंज द्वारा आवेदन क्रमांक 1715000300005460 के साथ पूर्व में 17 अक्टूबर, 1995 को जारी किए गए पिछड़ी जाति, उप जाति मोमिन असार के प्रमाणपत्र की प्रति संलग्न की गयी थी। जिसे आधार मानकर तत्कालीन लेखपाल चंद्रसेन ने आख्या भेजी। उसके आधार पर प्रमाणपत्र क्रमांक 205173000647 21 जनवरी, 2017 को जारी किया गया था। शहला के पिता प्यारे अली का पता 23/41 चाप चौकी, जनपद आगरा था।

25 अक्टूबर को जिलाधिकारी ने मुझे पालिकाध्यक्ष शहला ताहिर के विरुद्ध फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराने का आदेश जारी किया। उस आदेश के अनुपालन में थाना नवाबगंज में पालिकाध्यक्ष के विरुद्ध फर्जी जाति प्रमाण पत्र कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर बनवाने, पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई है। -शेर बहादुर सिंह, तहसीलदार नवाबगंज

आगरा में शहला के पिता के रहने व जाति के संबंध में कुछ नहीं मिला
शहला के पिता की जाति का सत्यापन जिलाधिकारी आगरा से कराया गया। जिसमें आगरा डीएम ने बताया कि शहला पुत्री प्यारे अली निवासी 23/41 चाप चौकी, आगरा को कोई नहीं जानता है। न ही उनकी जाति के संबंध में कोई भी जानकारी प्राप्त हुई है। वर्तमान में उक्त पते के मकान में बबलू पुत्र खुशनूत अमहद बतौर किरायेदार रहते मिले थे। जिनका शहला व उसके पिता से कोई संबंध नहीं है। इनका कोई परिजन भी पते पर नहीं रह रहा।

स्थानीय पार्षद बच्चू सिंह ने भी शहला के पिता के नाम से किसी के रहने से इनकार किया। श्री तेज बहादुर खालसा जूनियर हाईस्कूल माईथान आगरा से प्राप्त टीसी की छायाप्रति व पूछताछ से भी शहला ताहिर की जाति के संबंध में नाम के स्थान पर शैलवी पुत्री प्यारे अली और जाति व धर्म के कॉलम में केवल (मु) लिखा है। जिससे इनकी जाति सत्यापित नहीं होती है।

एफआईआर होना नई बात नहीं, हर बार निरस्त हुई है: शहला

ऊंची जाति का प्रमाण यदि किसी पर हो, तो वह प्रस्तुत करें
एफआईआर दर्ज होने के बाद पालिकाध्यक्षा शहला ताहिर का कहना है कि एफआईआर होना कोई नई बात नहीं है। कई बार एफआईआर हुई है और हर बार एफआईआर निरस्त ही हुई है। इस बार भी ऐसा ही होगा। उन्होंने कहा की जाति प्रमाण पत्र तहसीलदार चोखे लाल ने बनाया था। लेखपाल व कानूनगो की रिपोर्ट भी लगी थी। अगर जाति प्रमाण पत्र फर्जी है तो अकेले मैं दोषी तो नहीं हो सकती तो एफआईआर भी सब के विरुद्ध ही होनी चाहिए थी। मेरी जाति के संबंध में यदि किसी के पास कोई प्रमाण हो कि मैं उच्च जाति की हूं तो वह साक्ष्य प्रस्तुत करें।

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