बरेली: बाइक की टक्कर पर तीन हत्याएं, छह आरोपियों को उम्रकैद

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विधि संवाददाता, बरेली, अमृत विचार। मोटरसाईकिल से टक्कर लगने पर गुप्ती (नुकीले चाकू) से कातिलाना वार करके नाबालिग लड़की समेत तीन की हत्या करने वाले नवाबगंज के ग्राम चैना निवासी मुकेश, सूरज व उनकी मं लौंगश्री, नाना केसरीलाल और मामा शम्भुदत्त व धर्मपाल समेत छह को सत्र परीक्षण में दोषी पाते हुए अपर सत्र न्यायाधीश …

विधि संवाददाता, बरेली, अमृत विचार। मोटरसाईकिल से टक्कर लगने पर गुप्ती (नुकीले चाकू) से कातिलाना वार करके नाबालिग लड़की समेत तीन की हत्या करने वाले नवाबगंज के ग्राम चैना निवासी मुकेश, सूरज व उनकी मं लौंगश्री, नाना केसरीलाल और मामा शम्भुदत्त व धर्मपाल समेत छह को सत्र परीक्षण में दोषी पाते हुए अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-3 रचना अरोरा ने आजीवन कारावास की सजा सुनायी। कोर्ट ने प्रत्येक को 56-56 हजार रूपये कुल अर्थदण्ड की सजा सुनाई।

एडीजीसी क्राइम राजेश्वरी गंगवार ने बताया कि नवाबगंज के चैना निवासी छोटेलाल ने थाना नवाबगंज मे तहरीर देकर बताया था कि 12 अप्रैल 2014 की शाम पांच बजे उसका लड़का वीरेन्द्रपाल गंगवार (25) बाजार से सब्जी लेकर अपने गांव आ रहा था। जब वह घर के पास मोटरसाईकिल से पहुंचा तो उसकी बाइक गांव के मुकेश व सूरजपाल से छू गयी। इस पर दोनों ने लड़के से कहा कि ज्यादा नवाबी चढ़ गयी है। वीरेन्द्र ने गलती से लगना कहा तभी गालीगलौच करते हुए अपने घर से मुकेश व सूरज गुप्ती लेकर आये।

उनके साथ उनकी मां लौंगश्री, नाना केसरीलाल व दो मामा शम्भुदत्त व धर्मपाल भी थे। सभी के हाथों में लाठी-डंडे थे और सभी ने एकराय होकर उसके बेटे वीरेन्द्र की पीठ में गुप्ती घोंप दी, बीच बचाव करने आयी उसकी नाबालिग बेटी नीरज (16) की भी पीठ में गुप्ती घोंप दी और बचाये जाने के प्रयास में दूसरी बेटी कमलेश कुमारी उर्फ छोटी के पेट में तथा वादी मुकदमा छोटेलाल की कमर में जान से मारने की नीयत से सभी ने गुप्ती घोंप दी। बेटे और बेटी को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नवाबगंज गया जहां पर डॉक्टरों ने उसके बेटे वीरेन्द्र व बेटी नीरज को तत्काल ही मृत घोषित कर दिया।

पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर गम्भीर घायल वादी मुकदमा छोटेलाल को भी जिला अस्पताल में भर्ती करवाया था, जहां इलाज के दौरान 2 मई 2014 को वादी मुकदमा चुटहिल छोटेलाल की भी मौत हो गयी थी। जबकि कमलेश लम्बे इलाज के बाद बच सकी थी। पुलिस ने उपरोक्त 6 मुल्जिमों के विरूद्व हत्या, हत्या का प्रयास समेत गम्भीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी। सभी को अदालत में पेश करने के बाद जेल भेजा था। उसके बाद साक्ष्य एकत्रित व विवेचना कर आरोप पत्र कोर्ट में पेश किया था। निचली अदालत ने मामले को सेशन ट्रायल पाते हुए 25 जुलाई 2014 को सत्र न्यायालय मे ट्रांसफर किया था। अभियोजन की ओर से 14 गवाह अदालत में परीक्षित कराये गये थे।

14 गवाहों की हुई थी मुकदमे में गवाही
तकरीबन 7 वर्ष चले सेशन ट्रायल के दौरान चुटहैल/चश्मदीद गवाह कमलेश उर्फ छोटी, मृतक वीरेन्द्र व नीरज का पोस्टमार्टम करने वाले डॉ एस के सक्सेना, भानु प्रताप, हेड मोहर्रिर ज्ञानदत्त शुक्ला, वादी मृतक छोटेलाल का पीएम करने वाले डॉ सुधीर यादव, नरेन्द्रपाल, विजयपाल, इंस्पेक्टर सुनील कुमार पचौरी, अरविन्द सिंह चौहान, विवेचक जे पी तिवारी, एसआई कलवा सिंह, तहरीर लेखक सत्य देव सिंह, डॉ सुमित गुप्ता व डॉ वी पी सिंह समेत 14 गवाहों को अभियोजन ने कथानक के समर्थन मे कोर्ट में परीक्षित कराया था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट, गवाही, विधि विज्ञान प्रयोगशाला रिपोर्ट, आलाकत्ल रहे सजा का प्रमुख आधार
कातिलाना हमले में गम्भीर घायल होने पर लम्बे इलाज के बाद स्वस्थ्य हुयी चश्मदीद वादी की पुत्री कमलेश उर्फ छोटी ने कोर्ट में अभियोजन कथानक का समर्थन करते हुए कहा था कि सभी छह मुल्जिमों ने उसके भाई व छोटी बहन नीरज को मौत के घाट उतारा था। पिता छोटेलाल व वह गम्भीर घायल हुये थे। बाद में इलाज के दौरान पिता की भी मौत हो गयी थी।

मृतक वीरेन्द्र सीने के बायीं ओर व पीछे की ओर गहरा घाव था। वहीं नीरज के नाक के ऊपर चोट, सीने पर गहरा घाव, दायें पैर पर चोट थी। वहीं इलाज के दौरान 2 मई 2014 को वादी छोटेलाल की मौत पर हुए पोस्टमार्टम मे कूल्हे की हड्डी के ऊपर गहरे घाव मे सेप्टिक व पीलिया होने से मौत का कारण बताया गया। इसके अलावा मृतकों के कपड़ों को भी विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया था, रिपोर्ट में भी घटना की पुष्टि हुई।

सजा सुनकर फफक-फफक कर अदालत में रो पड़े आरोपी
अदालत ने उम्रकैद की जब सजा सुनाई तो सभी आरोपियों की अदालत में ही रूलाई फूट पड़ी। आरोपियों के वकील ने जब हाईकोर्ट में पैरवी की बात कही तो लौंगश्री बोली कि अब पैरवी करने वाला कौन बचा है साहब। पति को छोड़कर मायके में अपने दो बेटों के साथ रह रहीं थी। बाप, सगे दो भाई सभी को तो उम्रकैद हो गयी है। अब न तो पैसा है और न ही लड़ने की ताकत। पूरी जिंदगी अब जेल में ही काटनी पड़ेगी इसके सिवा कोई चारा नहीं है।

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