बरेली: कारोबारी विदेशों में निर्यात नहीं कर पा रहे बेंत फर्नीचर

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बरेली, अमृत विचार। बांस और बेंत के फर्नीचर के लिए मशहूर बरेली के कारीगर अपना माल विदेशों में निर्यात नहीं कर पा रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह फर्नीचर के कच्चे माल पर महंगाई है। इससे फर्नीचर की लागत बढ़ रही है। इसके अलावा जिला उद्योग केंद्र से कारीगरों को उचित प्रशिक्षण न मिलना भी …

बरेली, अमृत विचार। बांस और बेंत के फर्नीचर के लिए मशहूर बरेली के कारीगर अपना माल विदेशों में निर्यात नहीं कर पा रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह फर्नीचर के कच्चे माल पर महंगाई है। इससे फर्नीचर की लागत बढ़ रही है। इसके अलावा जिला उद्योग केंद्र से कारीगरों को उचित प्रशिक्षण न मिलना भी कारण माना जा रहा है। कारीबारियों के मुताबिक प्रशिक्षण न मिलने से फर्नीचर निर्माण में सफाई नहीं आ पाती। ऐसे में अन्य जिलों के कारोबारी लाभ उठा ले जाते हैं।

बेंत कारोबारी मोहम्मद आलम ने बताया कि इस समय फर्नीचर की मांग बहुत है। इस कारण कच्चे माल पर कीमत दोगुनी हो गई है। फर्नीचर मशहूर होने के बावजूद यहां बड़े स्तर पर कच्चा माल नहीं बनता। बाहर से माल मंगाने पर फर्नीचर की लागत बढ़ जाती है। अन्य जिलों में फर्नीचर की उच्च स्तरीय मशीनें भी हैं। वहां फर्नीचर की कारीगरी में सफाई होती है। इस कारण वहां के फर्नीचरों की मांग ज्यादा होने लगी है। बताया कि अगर उद्योग विभाग मलेशिया, चीन, इंडोनेशिया जैसे देशों से मशीनों को बरेली के कारीगरों को सब्सिडी पर उपलब्ध कराए तो कम लागत में अच्छा माल तैयार हो पाएगा। इससे बेंत कारीगरों को अच्छी आय होगी।

बरेली का माल सीधे नहीं होता निर्यात
मुरादाबाद, संभल, लखनऊ आदि जगह के लोग बरेली का फर्नीचर खरीदकर विदेशों में निर्यात कर रहे हैं। इसका कारण मुरादाबाद आदि जगहों पर मशीनों के जरिये काम किया जाता है जिससे वहां के फर्नीचर में सफाई ज्यादा होती है।

मलेशिया, इंडोनेशिया से आता है कच्चा माल
बेंत के फर्नीचर बनाने के लिए कारोबारियों को मलेशिया, चीन, इंडोनेशिया, असम आदि जगह पर निर्भर रहना पड़ता है लेकिन इस बार कच्चे माल की कीमत दोगुनी हो गई है। पहले मोटे बेंत का बंडल 1800 रुपये का मिलता था जो अब 3000 रुपये का मिल रहा है। 700 से 800 रुपये का मिलने वाला पतले बेंत का बंडल 1500 से 1600 रुपये का मिल रहा है। 700 से 900 रुपये मिलने वाला तार 2500 से 3000 रुपये प्रति किलो मिल रहा है जिससे व्यापारियों को ऑर्डर पूरे करने में दिक्क्त हो रही है।

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