बरेली: अपनों ने साथ छोड़ा तो वृद्धाश्रम के बागवां में दिवाली मनाएंगे बुजुर्ग
बरेली, अमृत विचार। वृद्धा आश्रम में बुजुर्ग अपनों संग दीपावली मनाने को तरस रहे हैं। जिगर के टुकड़ों के आने के इंतजार में वे टकटकी लगाए बैठे हैं परंतु लाडलों का आना तो दूर अधिकांश तो फोन पर त्योहार की बधाई देना तक उचित नहीं समझ रहे। हालांकि शहर के रहने वाले कुछ बुजुर्ग अपने …
बरेली, अमृत विचार। वृद्धा आश्रम में बुजुर्ग अपनों संग दीपावली मनाने को तरस रहे हैं। जिगर के टुकड़ों के आने के इंतजार में वे टकटकी लगाए बैठे हैं परंतु लाडलों का आना तो दूर अधिकांश तो फोन पर त्योहार की बधाई देना तक उचित नहीं समझ रहे। हालांकि शहर के रहने वाले कुछ बुजुर्ग अपने परिवार के साथ दीपावली की खुशी मनाने के लिए चले गए। जबकि, अधिकतर लोग अपनों के आने का इंतजार करते रहे।
बच्चों की जिंदगी में खुशियां भरने और उनके भविष्य को रोशन करने के लिए खुद का पूरा जीवन लगा दिया लेकिन दीपावली पर उन्हीं लाडलों ने मुंह मोड़ लिया है। दीपावली पर घर-परिवार से उपेक्षित इन बुजुर्गों से बात की तो कइयों की आंखें छलक आईं। वृद्धाश्रम में पनाह लिए यह बुजुर्ग हर त्योहार पर ही उदास हो जाते हैं। बोले, अब क्या दिवाली और क्या होली।
पुरानी जिंदगी याद आती है तो तकलीफ होती है। संस्थाएं और समाजसेवी आकर फल, मिठाई और कपड़े दे जाते हैं। यह सब हमारे मतलब का नहीं हैं। हमें भी अपने परिवार का प्यार और साथ चाहिए। हम चाहते हैं कि हमारे अपने यहां से हमें ले जाएं। बुखारा मोड़ पर स्थित वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों का कहना है कि अब हमारा वृद्धाश्रम ही परिवार है। यहीं एक-दूसरे के साथ मिलकर खुशियां बांट लेते हैं। बुखारा मोड़ पर स्थित वृद्धा आश्रम में मौजूदा समय में 109 लोग हैं। इस बार 7 से 8 लोग दीपावली पर बुधवार को ही घर चले गए जो त्योहार मनाने के बाद वापस लौट आएंगे।
करगैना निवासी 102 साल की गंगा देई ने बताया कि उनका एक लड़का है जो बीमार रहता है। इसलिए वह 11 साल से ही वृद्धा आश्रम में रहकर अपनी जिंदगी काट रही हैं।
पीलीभीत बाईपास निवासी राकेश कुमार 8 माह से वृद्धा आश्रम में रह रहे हैं। इस बार वह वृद्धा आश्रम में रहने वाले लोगों के साथ ही दिवाली की खुशी मनाएंगे।
शाहजहांपुर के अमरनाथ 5 माह से वृद्धा आश्रम में रह रहे हैं। उनका कहना है कि यहां परिवार जैसा प्यार मिल रहा है। वैसे घर पर बच्चों के साथ दिवाली मनाने की खुशी ही अलग है।
